Home Top News ट्रंप के खिलाफ ईरान का ‘टाइमिंग गेम’! होर्मुज पर दबाव बढ़ाकर US को झुकाने की कोशिश, जानें प्लान?

ट्रंप के खिलाफ ईरान का ‘टाइमिंग गेम’! होर्मुज पर दबाव बढ़ाकर US को झुकाने की कोशिश, जानें प्लान?

by Sachin Kumar 9 August 2026, 9:41 PM IST (Updated 9 August 2026, 9:42 PM IST)
9 August 2026, 9:41 PM IST (Updated 9 August 2026, 9:42 PM IST)
Iran leaders think Trump cornered

US-Iran War: इस साल 28 फरवरी को जंग शुरू होने के बाद से ईरान और अमेरिका के बीच कोई ठोस समझौता नहीं हो पाया है. इस दौरान एक-दो अस्थायी समझौते जरूर हुए, जिनके तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए कच्चे तेल की आपूर्ति जारी रखने की कोशिश की गई. हालांकि, 45 दिनों तक चलने वाला युद्धविराम उस समय समाप्त हो गया, जब अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया. इसके बाद तेहरान ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य में मालवाहक जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा दी. इसी बीच कुछ लोगों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य का नाम एक जोरोस्ट्रियन देवता के नाम पर रखा गया है. इसके बारे में कहा जाता है कि ईरानी लोग अपने दुश्मन के साथ 9,000 साल के टकराव के बाद विजयी होंगे. ईरान के नेताओं को लगता है कि उनकी जीत करीब है और इसके लिए उन्हें इतने लंबे समय तक धैर्य रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी. उन्हें उम्मीद है कि सैन्य दबाव आखिरकार अमेरिका को ग्लोबल एनर्जी के लिए अहम इस जलमार्ग पर उनके नियंत्रण को स्वीकार करने के लिए मजबूर कर देगा और समय उनके पक्ष में है. वे जानते हैं कि अमेरिका के एडवांस्ड मिसाइल इंटरसेप्टर का स्टॉक कम हो रहा है. साथ ही अमेरिकी लोग इस युद्ध के बिल्कुल भी पक्ष में नहीं हैं. खास बात यह है कि जब तक होर्मुज बंद रहेगा, तब तक अमेरिकी सामानों की कीमतें लगातार बढ़ती रहेंगी और इसका सीधा असर नवंबर में होने वाले अमेरिकी कांग्रेस चुनावों में देखने को मिलेगा.

‘एक पर हमला, तीनों पर वार’… पाक, सऊदी और तुर्की का बड़ा रक्षा दांव, क्या बना इस्लामिक NATO?

क्या ट्रंप प्रशासन ईरान के आगे झुकेगा?

ईरानी सरकार का मानना है कि अमेरिका सरकार को पता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को जबरदस्ती खोलने की कोशिश करना महंगा पड़ेगा और इसके लिए अमेरिका को जमीनी सैनिकों की जरूरत पड़ सकती है. यमन में ईरान के सहयोगी हूती विद्रोही युद्ध को बढ़ा सकते हैं और व्यापार के एक और अहम रास्ते में रुकावट डाल सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास झुकने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा. लेकिन ईरान की रणनीति में जोखिम भी हैं. ट्रंप उन हमलों का भी जिक्र करते हैं जिन्होंने ईरान के शीर्ष नेतृत्व, नौसेना और वायु सेना को भारी नुकसान पहुंचाया है. वे कभी तनाव बढ़ाने की धमकी देते हैं तो कभी कहते हैं कि बातचीत अच्छी चल रही है. इस युद्ध में ईरान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिसका एक कारण अमेरिकी नाकेबंदी है. कुछ महीने पहले ही ईरान के लोगों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया था और वे ऐसा दोबारा भी कर सकते हैं. अब ईरान के नेताओं को बस यह देखना होगा कि मध्य पूर्व में ट्रंप का छोटा सा अभियान कैसे उलझ गया. उनको यह भी याद रहे कि युद्ध शायद ही कभी उम्मीद के मुताबिक होते हैं. ईरान का कहना है कि वह ओमान के साथ उस जलडमरूमध्य के प्रबंधन के लिए समझौता करने के करीब है, जो दोनों देशों के बीच स्थित है.

Iran leaders think Trump cornered

क्या ईरान की हो पाएगी कूटनीतिक जीत?

ईरान अगर ओमान से समझौता करके होर्मुज के मुद्दे को सुलझाना चाहता है तो, यह तभी हो पाएगा जब अमेरिका अपनी नाकेबंदी हटाता है. साथ ही भले ही ईरान के अनुसार कोई सीधी बातचीत न हो, फिर भी ट्रंप को इसे मंजूरी देनी होगी. यह स्पष्ट नहीं है कि समझौते के तहत ईरान को शुल्क वसूलने की अनुमति मिलेगी या नहीं. लेकिन इससे उस जलमार्ग पर उसका नियंत्रण औपचारिक हो जाएगा, जो युद्ध से पहले एक खुला अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग था और जिससे दुनिया के व्यापारिक तेल और गैस का पांचवां हिस्सा गुजरता था. वहीं, पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के सलाहकार रहे विश्लेषक अब्दोलरेजा दावरी ने कहा कि जलडमरूमध्य पर ईरान के प्रभावी नियंत्रण ने उसे अमेरिका और क्षेत्रीय देशों के मुकाबले ऐसी बढ़त दिलाई है जो उसकी सुरक्षा की गारंटी में मदद कर सकती है. उन्होंने आगे कहा कि जलडमरूमध्य से होने वाली आय से कहीं ज्यादा ईरान उस पर अपना प्रबंधन और संप्रभुता सुनिश्चित करना चाहता है. जलडमरूमध्य के किसी हिस्से पर भी औपचारिक नियंत्रण ईरान के लिए एक स्पष्ट जीत और अमेरिका के लिए हार होगी. हालांकि, युद्ध में अपने बदलते लक्ष्यों में से ईरान कुछ को अभी तक हासिल नहीं कर पाया है. इससे नेविगेशन की स्वतंत्रता के वैश्विक मानदंडों को भी झटका लगेगा और एक ऐसी मिसाल कायम होगी जो दुनिया के बड़े हिस्से को परेशान करने वाली होगी. ईरान और ओमान अपनी मर्जी से व्यापार के अहम रास्तों (choke points) को बंद कर सकते हैं.

Iran leaders think Trump cornered

‘जीत या हार’ की ट्रंप नीति पर संकट! होर्मुज खोलने के लिए ईरान से करनी पड़ सकती है ये डील

होर्मुज से हो पाएगी सुरक्षित आवाजाही

ईरान से भारी मात्रा में तेल खरीदने वाले चीन ने भी कहा था कि जलडमरूमध्य से सामान्य और सुरक्षित आवाजाही बहाल की जानी चाहिए. दूसरी तरफ ट्रम्प की जियोपॉलिटिक्स की थ्योरी को लेकर ईरान का मानना ​​है कि उसके हाथ में ही सारे पत्ते हैं. ईरान के मुख्य वार्ताकार के सलाहकार मेहदी मोहम्मदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्होंने (अमेरिका-इजरायल) युद्ध शुरू किया, लेकिन इसका अंत कभी उनके हाथ में नहीं था. हम हमेशा खुद तय करते हैं कि यह कब खत्म होगा. ईरान दुश्मन की हार चाहता है. कोई समझौता नहीं. उन्होंने कहा कि जुलाई में जॉर्डन पर ईरान के अचानक हमले ने तेल की कीमतों में गिरावट की भरपाई कर दी है. इसने जून में हुए उस अंतरिम समझौते के टूटने में भूमिका निभाई, जिसमें ईरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल बेचने की अमेरिकी छूट और प्रतिबंधों में बड़ी राहत का वादा किया गया था. ईरान ने बार-बार कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुला जलमार्ग नहीं बनेगा और वह अपनी इजाजत के बिना वहां से गुजरने की कोशिश करने वाले जहाजों पर हमले जारी रखेगा. ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने इसे एक अटूट रेड लाइन कहा है. तेहरान स्थित सुरक्षा विश्लेषक मुस्तफा नजफी ने कहा कि ईरान के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य डराने-धमकाने, क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बनाए रखने और फारस की खाड़ी में सुरक्षा नियमों को फिर से तय करने का एक रणनीतिक हथियार बन गया है.

Iran leaders think Trump cornered

परमाणु मुद्दा काफी पीछे छूटा

वहीं, ईरान स्थित विश्लेषक रहमान गहरमानपुर ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में संघर्ष के कारण परमाणु मुद्दा पीछे छूट गया है और यह ईरान के हित में है. उन्होंने कहा कि अगर परमाणु वार्ता फिर से शुरू होती है, तो जलडमरूमध्य पर नियंत्रण ईरान को बढ़त दिलाएगा. युद्ध के कारण आर्थिक संकट पूरी दुनिया में फैल गया है, लेकिन ईरान में इसका असर बहुत ज़्यादा है. अमेरिका और इजरायल के हमलों ने ईरान के औद्योगिक ढांचे को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया है. अमेरिकी नाकेबंदी की वजह से ईरान का ज्यादातर तेल निर्यात रुक गया है. ईरानी लोग खाने-पीने की चीजों की आसमान छूती कीमतों से जूझ रहे हैं. दूसरी तरफ ट्रंप ने बार-बार पानी और बिजली जैसी आम लोगों की सुविधाओं वाले बुनियादी ढांचे पर बड़े हमले करने की धमकी दी है. दिसंबर में मुद्रा संकट के कारण इस्लामिक रिपब्लिक के 47 साल के इतिहास में सरकार के खिलाफ सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन हुए. अधिकारियों ने हिंसक कार्रवाई की, जिसमें हजारों लोग मारे गए और हजारों को हिरासत में लिया गया. ईरान में उदारवादी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के करीबी लोग भी शामिल हैं, जिनको डर है कि हालात बहुत ज़्यादा बिगड़ सकते हैं.

‘आधा आसमान’ के नारे से पीछे हटा चीन? महिलाओं की राजनीतिक भूमिका घटी, बड़ा खुलासा

खामेनेई की मौत के बाद जनता हुई एकजुट

विदेश मंत्री के तौर पर मोहम्मद जवाद जरीफ ने 2015 के परमाणु समझौते में बातचीत में मदद की थी. उन्होंने हाल ही में एक लेख में लिखा था कि युद्ध में ईरान की कामयाबियों ने कूटनीति के लिए एक असाधारण मौका दिया है. लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही कोई समझौता नहीं हुआ, तो आर्थिक सुधार मुश्किल हो जाएगा. खासकर अमेरिकी चुनावों के बाद आंतरिक अशांति या फिर से आक्रामकता की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इस युद्ध में पहले ही कई चौंकाने वाली घटनाएं हो चुकी हैं. गौरतलब हो कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों के पहले दौर में ईरान के सर्वोच्च नेता और अन्य शीर्ष अधिकारियों के मारे जाने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि यह युद्ध कुछ ही हफ्तो में खत्म हो जाएगा. इसके बजाय इस संघर्ष ने ईरान के नेताओं का हौसला बढ़ाया है और उनके समर्थकों को एकजुट कर दिया. दूसरी तरफ तेहरान इस जलडमरूमध्य का इस्तेमाल यह दिखाने के लिए कर रहा है कि उसे हराया नहीं गया है. इससे देश के भीतर उसकी साख बढ़ी है. लेकिन यह रणनीति उल्टी भी पड़ सकती है. ईरान की सहनशक्ति की भी एक सीमा है और चिंता है कि आर्थिक संकट से अशांति फैल सकती है. साथ ही ईरान हमेशा इस रणनीति पर नहीं चल सकता है और एक समय पर उसे अमेरिका के साथ समझौता करना ही होगा. दावरी ने कहा कि फिलहाल ईरान दबाव झेल सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक हालात की मुश्किलों के बावजूद इस बात की संभावना कम है कि ईरान अपने रुख से पीछे हटेगा.

Iran leaders think Trump cornered

अरामको को बनाया निशाना

आपको बताते चलें कि हूती विद्रोहियों के मिलिट्री प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा कि उन्होंने ड्रोन से सऊदी अरब के जाजान शहर में अरामको रिफाइनरी को निशाना बनाया. उन्होंने कहा कि यह हमला सऊदी ड्रोन द्वारा यमन के हज्जा और सादा प्रांतों के ऊपर हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने के जवाब में किया गया था. रविवार की सुबह सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने अरामको रिफाइनरी में आग लगने की सूचना दी, जिसमें कोई हताहत नहीं हुआ. मंत्रालय ने कहा कि आग बुझा दी गई थी, लेकिन आग लगने के कारणों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी. रविवार को हूती विद्रोहियों का हमला मिसाइल और ड्रोन हमलों की उस कड़ी का हिस्सा है, जिनमें सऊदी अरब और रेड सी में उसके जहाजों को निशाना बनाया गया है.

सऊदी के बड़े तेल रीफाइनरी पर हूतियों का ड्रोन हमला,होर्मुज खोलने के लिए ईरान ने रखी ये नई शर्त

You may also like

Live Times logo

Feature Posts

Newsletter

@2026 Live Time. All Rights Reserved.

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?