JK Demolition: जम्मू के बीचों-बीच मौजूद परेड सब्जी मंडी में एक दर्जन से ज़्यादा दुकानों को नगर निगम ने रविवार को जमींदोज कर दिया. इससे व्यापारियों का हजारों का नुकसान हो गया. उनका आरोप था कि जम्मू म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (JMC) ने उन्हें बिना किसी पहले नोटिस या अपना सामान हटाने के लिए पर्याप्त समय दिए उनकी दुकानों को तोड़ दिया. उधर, JMC ने कहा कि दुकानदारों, आने-जाने वालों और आम जनता की जान-माल की सुरक्षा के लिए एहतियात के तौर पर असुरक्षित और जर्जर दुकानों को ही तोड़ा गया है. यह कदम खासकर भारी बारिश और इमारत के गिरने के संभावित खतरों को देखते हुए उठाया गया.
सब्जी मंडी बनेगी आधुनिक
यह कार्रवाई JMC की उस योजना का हिस्सा है जिसके तहत भीड़-भाड़ वाले पुराने शहर में मौजूद पारंपरिक सब्जी मंडी को 5.88 करोड़ रुपये के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत आधुनिक बनाया जाएगा और उसका पूरी तरह से पुनर्विकास किया जाएगा. मंडी के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने और व्यापारियों व आने-जाने वालों के लिए ज़्यादा व्यवस्थित और सुविधाजनक माहौल देने के लिए इसके पुनर्विकास की आधारशिला 22 जून को रखी गई थी. अधिकारियों ने बताया कि JMC ने पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स के साथ मिलकर सुबह करीब 7 बजे यह तोड़-फोड़ अभियान चलाया और लगभग 20 अस्थायी और पक्की दुकानों को ज़मींदोज़ कर दिया.
एसोसिएशन के अध्यक्ष ने उठाए सवाल
परेड सब्जी मंडी की सब्जी और फल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुभाष चंद्र शर्मा ने आरोप लगाया कि व्यापारियों की लगातार बातचीत और बार-बार की अपीलों के बावजूद अधिकारियों ने मनमाना रवैया अपनाया. उन्होंने PTI को बताया कि हम आधुनिकीकरण के खिलाफ नहीं हैं और प्रशासन के साथ सहयोग करने को तैयार हैं, बशर्ते बाजार को दिल्ली, चंडीगढ़ और पंजाब की मंडियों की तरह ठीक से फिर से बनाया जाए, जहां व्यापारियों और ग्राहकों के लिए पर्याप्त जगह हो. उन्होंने फिर से विकसित किए जा रहे बाजार के अंदर आने-जाने के लिए प्रस्तावित जगह पर सवाल उठाया और आरोप लगाया कि केवल छह फीट के संकरे रास्ते से सब्जी व्यापारियों के लिए अपना माल बाजार के अंदर लाना बहुत मुश्किल होगा.
400-500 रुपये कमाने वाले गरीब दुकानदार जाएंगे कहां?
शर्मा ने सवाल किया कि ये व्यापारी किलोग्राम के हिसाब से सब्जियां नहीं लाते हैं. वे पांच क्विंटल, दस क्विंटल, एक टन या दो टन तक माल लाते हैं. अगर आप केवल छह फीट का रास्ता देंगे, तो वे बाजार के अंदर सब्जियां कैसे लाएंगे? एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि तोड़-फोड़ शुरू करने से पहले अधिकारियों को प्रभावित व्यापारियों के लिए पुनर्वास और दूसरी जगह बसाने की उचित योजना तैयार करनी चाहिए थी. शर्मा ने पूछा कि ये गरीब लोग हैं जो दिन में 400 से 500 रुपये कमाते हैं. उनके परिवार हैं. वे कहां जाएंगे? वे कहां बैठकर अपनी रोजी-रोटी कमाएंगे?
News Source: PTI
