Team India: आयरलैंड के बाद इंग्लैंड के खिलाफ भी पांच मैचों की सीरीज में 0-4 से भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा है. पांचवें टी-20 मैच में 56 रनों से जीतने के बाद इंग्लैंड ने भारतीय टीम का नंबर वन का भी ताज भी छीन लिया. अगले हफ्ते आने वाली आईसीसी रैंकिंग में भारत का ये ताज इंग्लिश टीम को सौंप दिया जाएगा. BCCI ने विश्व विजेता रही भारतीय टीम का कप्तान सूर्यकुमार यादव की जगह श्रेयस अय्यर के बनाया था. वहीं, अभी तक टीम इंडिया को विफलता का ही सामना करना पड़ा है और शुरुआती 6 मैचों में टीम को हार का मुंह देखना पड़ा है. ऐसे में अब सोशल मीडिया पर क्रिकेट प्रेमी खिलाड़ियों से लेकर सेलेक्टर्स पर सवाल खड़े कर रहे हैं.
4.5 साल बाद बादशाहत हुई खत्म
इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की सीरीज में 0-4 से हार मिलने के बाद 2022 से चली आ रही टी-20 क्रिकेट में नंबर वन की बादशाहत भी खत्म हो गई है. इंग्लैंड ने सीरीज जीतने के साथ ही आईसीसी रैंकिंग में शीर्ष स्थान प्राप्त कर लिया है और भारत खिसककर दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं. भारतीय टीम टी-20 क्रिकेट में करीब 1600 दिनों से नंबर वन का ताज ओढ़े हुए था, लेकिन अब यह बादशाहत अंग्रेजों ने छीन ली है.

वैभव को कर दिया था लास्ट मैच में बाहर
इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें टी-20 मैच में भारतीय टीम ने हैरान कर देने वाला फैसला लिया था. इस मैच में कप्तान श्रेयस अय्यर ने युवा प्लेयर वैभव सूर्यवंशी को सिर्फ तीन मैच खिलाने के बाद टीम से बाहर कर दिया. उनकी जगह एक अनुभवी प्लेयर संजू सैमसन को खिलाया, जिनको सूर्यवंशी की वजह से ड्रॉप किया गया था. वैभव ने इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज में तीन मैच खेले और इस दौरान उन्होंने कुल 42 रन बनाए. तेजी से रन बनाने के बीच वैभव इंग्लिश गेंदबाजों की बाउंसर को ढंग से नहीं खेल पाए और गेंदबाजों के जाल में फंसकर आउट हो गए. वहीं, लास्ट मैच में वैभव की जगह संजू सैमसन को मौका दिया गया, जिसमें वह बुरी तरह फेल हो गए. सैमसन ने 14 गेंदों में तीन चौके और दो छक्कों की मदद से 27 रन बनाकर पवेलियन की तरफ चल दिए.
इन कारणों से मिली टीम इंडिया को हार
शीर्ष क्रम साबित नहीं हुआ प्रभावशाली
इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज में भारतीय टीम की ओपनिंग पूरी तरह फ्लॉप रही. अभिषेक ने शुरुआती दो मैचों में रन बनाए लेकिन तीन अगले तीन मैचों में उनका बल्ला पूरी तरह खामोश दिखा. वहीं, संजू सैमसन रन बनाने के लिए काफी संघर्ष करते हुए दिखाई और उनकी जगह पर वैभव सूर्यवंशी भी ज्यादा कुछ खास नहीं कर पाए. ओपनिंग बल्लेबाजी की नाकामी का असर मध्य क्रम के बल्लेबाजों पर भी देखने को मिला. जब किसी टीम का टॉप ऑर्डर कुछ खास नहीं कर पाता है तो मध्य क्रम के बल्लेबाजों पर भारी दबाव बन जाता है. ऐसे में टीम किसी बड़े चेज को पूरा नहीं कर पाती है.

कुछ खास नहीं कर पाया मध्य क्रम
टी-20 सीरीज में भारतीय टीम का मध्य क्रम कुछ खास नहीं कर पाया और इंग्लिश गेंदबाजों के सामने बेबस सा नजर आया. ईशान किशन आखिरी मैच को छोड़कर बाकी बचे चार मैचों में संघर्ष करते हुए दिखाई दिए और उनके बल्ले से कोई बड़ी पारी नहीं आ पाई. ऐसा ही कुछ हाल तिलक वर्मा का भी देखने को मिला. इस दौरान खुद कप्तान श्रेयस अय्यर भी कुछ खास नहीं कर पाए और आईपीएल जैसा जादू बिखेरने में नाकामयाब रहे.
बल्लेबाजों को नहीं रखा गया स्थिर
इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज में भारतीय बल्लेबाजों के क्रम में कई बार बदलाव किए गए और उन्हें स्थिर होकर नहीं खेलने दिया गया. तिलक वर्मा और शिवम दुबे की बल्लेबाजों में बार-बार बदलाव किया गया और वह मैदान पर रन बनाने के लिए जूझते रहे. वहीं, तीसरे टी-20 मैच में तिलक और शिवम से ऊपर बल्लेबाजी करने के लिए अक्षर पटेल को भेजा गया. साथ ही अक्षर भी एक स्थान पर बल्लेबाजी करने के लिए मैदान पर नहीं उतरे.
गेंदबाजों का नहीं दिखा मैदान पर दम
इंग्लैंड की मददगार पिच पर भारतीय गेंदबाज पूरी तरह फ्लॉप रहे. टीम इंडिया के प्रमुख गेंदबाज अर्शदीप सिंह पांच मैचों में सिर्फ चार विकेट ही चटका पाए और इस दौरान उनकी इकोनॉमी 9.47 रही. ऐसा ही हाल कुछ हर्षित राणा का भी देखने को मिला. उन्होंने 10 की इकोनॉमी से रन देकर मात्र तीन विकेट ही ले पाए. प्रसिद्ध कृष्णा सिर्फ एक विकेट ले पाए और उनका इकोनॉमी 9 रहा. युवा गेंदबाज प्रिंस यादव ने भी 10.72 की इकोनॉमी रन दिए. साथ ही प्रिंस की अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शुरुआत बहुत बुरी रही और उनको आयरलैंड के खिलाफ डेब्यू करने का मौका मिला था. लेकिन वह कुछ खास नहीं कर पाए , ऐसे में अब उनकी गर्दन पर भी तलवार लटकी हुई है. वहीं, भारतीय टीम को जसप्रीत बुमराह की सबसे ज्यादा कमी खली.
कुछ खास नहीं दिखा पाए कप्तान
श्रेयस अय्यर की कप्तानी में इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज में ज्यादा खास नहीं दिख पाई. गेंदबाजों के सेलेक्शन के अलावा फील्डिंग के मामले में भी वह काफी फ्लॉप साबित हुए. साथ ही कप्तानी का दबाव भी उनकी बल्लेबाजी पर भी देखने को मिला. बताया जा रहा है कि वह गौतम गंभीर के साथ मिलकर एक शानदार टीम को मैदान पर उतारने में नाकामयाब रहे. लगातार दो सीरीज में हार के बाद अब श्रेयस अय्यर की कप्तानी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. वह उन कप्तानों की लिस्ट में शामिल हो गए हैं, जिनको शुरुआती सात मैचों में कोई जीत देखने को नहीं मिली. श्रेयस के अलावा ब्रेंडन टेलर एल्टन चिगुम्बुरा और तिषारा परेरा ही अभी तक ऐसा कर पाए हैं.

अब BCCI पर टिकी सबकी निगाह
हेड कोच के रूप में जब गौतम गंभीर ने कमान संभाली है तभी से ही भारतीय टीम का प्रदर्शन उतार-चढ़ाव भरा रहा है. हालांकि, उनके साथ अभी दो बड़ी उपलब्धि जुड़ी हुई है. गंभीर की कोचिंग में भारतीय टीम ने आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 और टी20 विश्व कप 2026 का खिताब अपने नाम किया है. लेकिन टेस्ट फॉर्मेट में टीम का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा है. न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका ने भारत को घरेलू मैदान पर हराया है. ऐसा ही शायद ही कभी हुआ हो कि कोई टीम भारत को उसके घरेलू मैदान पर टेस्ट में हराकर चला गया हो. वहीं, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी को भी गंवा दिया था. पिछले साल इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में 2-2 से बराबर हो गई थी.
हालांकि, अभी तक सीमित ओवरों में भारत का दबादबा नजर आ रहा था. लेकिन आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज गंवाने के बाद भारतीय टीम की कई कमियों को उजागर कर दिया है. साथ ही इंग्लैंड के खिलाफ हार तक तो ठीक है लेकिन आयरैंड के खिलाफ मिली हार को कोई भी पचा नहीं पा रहा है. इसी बीच आगामी दिनों में टीम इंडिया को जिम्बाब्वे के खिलाफ भी तीन मैचों की टी-20 सीरीज खेलनी है. इसके बाद सितंबर-अक्तूबर में एशियाई खेलों में भी मैदान पर उतरना है. भारतीय टीम का जिस तरह प्रदर्शन देखने को मिला रह है उस हिसाब से आने वाले दिनों में उसे काफी संघर्ष करते हैं.
वैभव के 14 और सचिन के 15 रन को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म, घेरे में आए रवि बिश्नोई; जानें पूरा मामला
आपको बताते चलें कि हाल ही में BCCI के सचिव देवजीत सैकिया ने कहा था कि पुरुष टी-20 टीम इस समय अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही है. ऐसे में टीम का इंग्लैंड दौरा खत्म होने के बाद विस्तार से चर्चा की जाएगी. उन्होंने कहा कि ये सच्चाई है कि आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ भारतीय टीम का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा. यही वजह है कि सीरीज खत्म होने के बाद हम समीक्षा करेंगे. टीम किन समस्याओं का सामना कर रही है और फिर इसका विस्तार से विश्लेषण किया जाएगा. इसी बीच खबर है कि फिल्डिंग कोच टी. दिलीप को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है. दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि गौतम गंभीर और श्रेयस अय्यर भी बोर्ड की रडार पर है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि लगातार दो सीरीज में हार के बाद BCCI कोई बड़ा फैसला लेगा या फिर कोचिंग स्टाफ में थोड़ा बहुत फेरबदलकर चीजों को आगे बढ़ाएगा.

खिलाड़ियों दोषी बनाना बहुत आसान
वहीं, पूर्व भारतीय खिलाड़ी संजय मांजरेकर ने इंग्लैंड के खिलाफ 0-4 से सीरीज में हार मिलने के बाद खिलाड़ियों का बचाव किया है. मांजरेकर का मानना है कि खिलाड़ियों को दोष देने की जगह आईपीएल से जुड़ी समस्याओं को दूर करने का किया जाना चाहिए. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि खिलाड़ियों का सेलेक्शन आईपीएल के आधार पर नहीं करना चाहिए. लगातार दो बार की चैंपियन के लिए ये दौरा बहुत ज्यादा निराशाजनक रहा है. आयरलैंड से 0-2 में हारने के बाद इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की सीरीज में 0-4 से हार का सामना करना पड़ा है. ऐसे में अब खिलाड़ियों के सेलेक्शन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. मांजरेकर ने आगे कहा कि विदेश में मिली इस करारी हार के लिए खिलाड़ियों को दोषी ठहराना सबसे ज्यादा आसान है. लेकिन मुझे लगता है कि जिम्मेदार उन लोगों को ठहराना चाहिए जिन्होंने आईपीएल को ही एक पैमाना मान लिया है. साथ ही अब सेलेक्टर्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह आईपीएल के प्रदर्शन के दबाव में आए बिना ऐसे बल्लेबाजों का चयन करें जो विदेशों में खेल सकते हैं. साथ ही टीम इंडिया को अब अपने ज्यादातर टी-20 मैचों को विदेश की धरती पर ही खेलना चाहिए.
