National Sports Day 2026: राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर गुजरात ने खेल प्रतिभाओं की पहचान और विकास की दिशा में एक बड़ी वैज्ञानिक पहल शुरू की है. गुजरात सरकार ने ‘स्पोर्ट्स जीनोमिक्स प्रोग्राम’ लॉन्च किया है, जिसके तहत खिलाड़ियों के DNA और आनुवंशिक विशेषताओं का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा. इस पहल के जरिए गुजरात में खेल प्रतिभाओं की पहचान को आधुनिक विज्ञान, स्पोर्ट्स साइंस, फिजियोलॉजी और न्यूट्रिशन साइंस से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.
गुजरात देश का पहला राज्य
इस कार्यक्रम के तहत ‘गुजरात एथलीट जीनोम डेटाबेस’ (G-AGD) तैयार किया जाएगा. इसमें खिलाड़ियों की आनुवंशिक, शारीरिक और खेल प्रदर्शन से जुड़ी जानकारी को एकीकृत किया जाएगा. सरकार का दावा है कि इस तरह का स्पोर्ट्स जीनोमिक्स कार्यक्रम शुरू करने वाला गुजरात देश का पहला राज्य है।गुजरात के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (GBRC) ने इस कार्यक्रम पर काम शुरू कर दिया है. विभिन्न खेलों से जुड़े खिलाड़ियों के सैंपल एकत्र करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. कार्यक्रम के पहले चरण में गुजरात स्टेट टेनिस एसोसिएशन (GSTA) से जुड़े टेनिस खिलाड़ियों के सैंपल लिए गए हैं. इसके बाद विजय भारत फाउंडेशन से जुड़े तीरंदाजी, फेंसिंग, जूडो और शूटिंग के खिलाड़ियों के सैंपल भी लिए जाएंगे.
प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की स्क्रीनिंग की जाएगी
इस साल करीब 2,000 सैंपल एकत्र कर उनका विश्लेषण करने का लक्ष्य रखा गया है. गुजरात स्टेट बायोटेक्नोलॉजी मिशन के मिशन डायरेक्टर दिग्विजयसिंह जाडेजा के मुताबिक, इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का होल-जीनोम सीक्वेंसिंग होगा. आने वाले पांच वर्षों में करीब 10,000 सैंपल एकत्र करने का लक्ष्य रखा गया है. हर वर्ष लगभग 2,000 सैंपल का होल-जीनोम सीक्वेंसिंग और विश्लेषण करने की योजना है. इसमें अलग-अलग खेलों के प्रमुख और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की स्क्रीनिंग की जाएगी, ताकि उनके आनुवंशिक और शारीरिक गुणों का व्यापक अध्ययन किया जा सके.
किन खेलों के खिलाड़ियों को किया जाएगा शामिल?
- एथलेटिक्स
- स्विमिंग
- बॉक्सिंग
- कुश्ती
- जूडो
- ताइक्वांडो
- जिम्नास्टिक
- फेंसिंग
- फुटबॉल
- हॉकी
- हैंडबॉल
- वॉलीबॉल
- बास्केटबॉल
- बैडमिंटन
- टेबल टेनिस
- लॉन टेनिस
- कबड्डी
- खो-खो
- तीरंदाजी
- शूटिंग
- शतरंज
कार्यक्रम में अलग-अलग आयु वर्ग के खिलाड़ियों को शामिल करने की योजना है. इसमें 14 वर्ष से कम, 14 से 18 वर्ष से कम और 18 वर्ष से अधिक आयु के खिलाड़ी शामिल होंगे. राज्य और राष्ट्रीय स्तर के चैंपियन खिलाड़ियों को प्राथमिकता देने की योजना है.
DNA से तय नहीं होती
स्पोर्ट्स जीनोमिक्स एक उभरता हुआ वैज्ञानिक क्षेत्र है, जिसमें किसी खिलाड़ी की आनुवंशिक विविधताओं और उसकी खेल क्षमता से जुड़े संभावित संबंधों का अध्ययन किया जाता है. इसके तहत मांसपेशियों की संरचना, सहनशक्ति, मेटाबॉलिज्म, एक्सरसाइज के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया, रिकवरी और चोट लगने की संभावनाओं जैसे पहलुओं का अध्ययन किया जा सकता है. हालांकि, सरकार और वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि किसी खिलाड़ी की सफलता केवल उसके DNA से तय नहीं होती. ट्रेनिंग, कोचिंग, पोषण, इंफ्रास्ट्रक्चर, सामाजिक सहयोग और पर्यावरणीय परिस्थितियां भी खिलाड़ी के प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.
व्यापक प्रोफाइल तैयार की जा सके
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव पी. भारती के अनुसार, पारंपरिक तौर पर खिलाड़ियों की प्रतिभा की पहचान शारीरिक क्षमता, कोचिंग मूल्यांकन और प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन के आधार पर की जाती है. गुजरात का नया मॉडल इसमें आनुवंशिक और जैविक जानकारी को भी जोड़ने का प्रयास करेगा, जिससे खिलाड़ी की अधिक व्यापक प्रोफाइल तैयार की जा सके. कार्यक्रम के तहत पावर, एंड्यूरेंस, चोट के जोखिम और एक्सरसाइज के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया के साथ-साथ न्यूट्रीजेनोमिक्स, लाइफस्टाइल जीनोमिक्स, व्यक्तित्व संबंधी विशेषताओं और सर्केडियन रिदम जैसे पहलुओं के अध्ययन का भी प्रस्ताव है.
तैयार होगा गुजरात एथलीट जीनोम डेटाबेस
इस पूरी पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा Gujarat Athlete Genome Database यानी G-AGD होगा।इस डेटाबेस में खिलाड़ियों की आनुवंशिक जानकारी के साथ-साथ उनके शारीरिक मापदंड और खेल प्रदर्शन से संबंधित डेटा को एक साथ रखा जाएगा. भविष्य में यह डेटाबेस खिलाड़ियों की प्रोफाइलिंग, वैज्ञानिक शोध और खेल प्रतिभा के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण संसाधन बन सकता है. इसके आधार पर खिलाड़ियों के लिए उनकी जरूरत के मुताबिक ट्रेनिंग और न्यूट्रिशन प्लान तैयार करने में भी मदद मिल सकती है.
हर खिलाड़ी का शरीर ट्रेनिंग, एक्सरसाइज, रिकवरी और पोषण के प्रति अलग-अलग प्रतिक्रिया दे सकता है. ऐसे में आनुवंशिक जानकारी को शारीरिक और प्रदर्शन संबंधी डेटा से जोड़कर खिलाड़ियों के लिए अधिक व्यक्तिगत विकास कार्यक्रम तैयार करने की संभावना है. इस पहल के संभावित परिणामों में आनुवंशिक प्रोफाइलिंग, वैज्ञानिक तरीके से प्रतिभा पहचान, चोट के जोखिम का आकलन, बेहतर रिकवरी रणनीति और व्यक्तिगत ट्रेनिंग एवं न्यूट्रिशन प्रोग्राम शामिल हैं. बायोइन्फॉर्मेटिक्स के जरिए भविष्य में जीनोटाइप और खेल प्रदर्शन के बीच संबंधों को समझने वाले मॉडल विकसित करने की भी संभावना है.
2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी में अहम पहल
गुजरात वर्ष 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की तैयारियां कर रहा है. ऐसे समय में खेल प्रतिभाओं की वैज्ञानिक पहचान और उनके हाई-परफॉर्मेंस विकास की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है. वैज्ञानिक तरीके से खिलाड़ियों की प्रोफाइल तैयार होने से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम खिलाड़ियों की पहचान और तैयारी को मजबूती मिल सकती है.
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इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल खिलाड़ियों के DNA का अध्ययन करना नहीं है. इसके व्यापक लक्ष्य के तहत गुजरात की बायोटेक्नोलॉजी क्षमताओं को स्पोर्ट्स साइंस और हाई-परफॉर्मेंस एथलीट डेवलपमेंट के साथ जोड़कर राज्य को ‘स्पोर्ट्स बायोटेक्नोलॉजी इनोवेशन हब’ के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है. GBRC के पास सैंपल प्रोसेसिंग, जीनोमिक सीक्वेंसिंग और डेटा एनालिसिस के लिए आधुनिक वैज्ञानिक सुविधाएं मौजूद हैं। इनमें NovaSeq 6000, GridION, PromethION, Illumina iScan और Illumina DRAGEN जैसे प्लेटफॉर्म तथा हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सुविधाएं शामिल हैं.
टू-लेवल बारकोडिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा
आनुवंशिक जानकारी बेहद संवेदनशील होती है। ऐसे में खिलाड़ियों के DNA और जीनोमिक डेटा की सुरक्षा इस कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी. प्रस्तावित व्यवस्था में खिलाड़ियों की पहचान सुरक्षित रखने के लिए टू-लेवल बारकोडिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा. कार्यक्रम के आगे बढ़ने के साथ खिलाड़ियों की सूचित सहमति, डेटा सुरक्षा और स्पष्ट गवर्नेंस व्यवस्था सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण होगा. वैज्ञानिकों के मुताबिक इस कार्यक्रम का मतलब यह नहीं है कि किसी एक ‘स्पोर्ट्स जीन’ के आधार पर खिलाड़ी के भविष्य या सफलता का फैसला किया जा सकता है. खेल प्रदर्शन एक जटिल प्रक्रिया है, जिस पर कई आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारकों का प्रभाव पड़ता है. इसलिए जीनोमिक जानकारी को खिलाड़ी के ट्रेनिंग, फिटनेस, पोषण, कोचिंग और वास्तविक प्रदर्शन के साथ जोड़कर देखा जाएगा.
गुजरात ने खेल और विज्ञान को जोड़ा
राष्ट्रीय खेल दिवस से पहले गुजरात की यह पहल खेल प्रतिभाओं की पहचान को वैज्ञानिक आधार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. DNA, जीनोमिक्स, स्पोर्ट्स साइंस और न्यूट्रिशन को एक साथ जोड़कर गुजरात आने वाले वर्षों में खिलाड़ियों की वैज्ञानिक प्रोफाइल तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. सरकार के अनुसार, स्पोर्ट्स जीनोमिक्स कार्यक्रम शुरू करने वाला गुजरात भारत का पहला राज्य है, और अगले पांच वर्षों में 10,000 सैंपल के लक्ष्य के साथ यह पहल राज्य में खेल और बायोटेक्नोलॉजी के नए संगम की नींव रख सकती है.
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