Home Latest News & Updates शिक्षक अभ्यर्थियों के आंदोलन में उतरे दिग्विजय सिंह, बोले- मांगें नहीं मानीं तो 5 सितंबर के बाद करेंगे भूख हड़ताल

शिक्षक अभ्यर्थियों के आंदोलन में उतरे दिग्विजय सिंह, बोले- मांगें नहीं मानीं तो 5 सितंबर के बाद करेंगे भूख हड़ताल

by Nitin Thakur 27 August 2026, 6:12 PM IST
27 August 2026, 6:12 PM IST
Digvijaya Singh joins agitation teacher aspirants

MP News: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश शिक्षक भर्ती परीक्षा-2025 के अंतर्गत वर्ग-2 (माध्यमिक शिक्षक) एवं वर्ग-3 (प्राथमिक शिक्षक) की जारी भर्ती प्रक्रिया में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखा है. दिग्विजय सिंह ने सरकार से मांग की है कि माध्यमिक शिक्षक भर्ती में 14,200 अतिरिक्त पद तथा प्राथमिक शिक्षक भर्ती में 11,911 अतिरिक्त पद जोड़कर दोनों वर्गों में 25-25 हजार पदों पर भर्ती सुनिश्चित की जाए. सिंह ने यह भी कहा है कि यदि राज्य सरकार आगामी शिक्षक दिवस से पहले शिक्षक पदों की संख्या में अपेक्षित वृद्धि को लेकर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो वे शिक्षक अभ्यर्थियों के समर्थन में 5 सितंबर से 24 घंटे की भूख हड़ताल पर बैठने के लिए विवश होंगे.

अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे प्रदर्शनकारी

दिग्विजय सिंह ने बताया कि भोपाल के नीलम पार्क में 21 अगस्त 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे माध्यमिक एवं प्राथमिक शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों से उन्होंने 26 अगस्त 2026 को नीलम पार्क पहुंचकर मुलाकात की थी. इस दौरान उन्होंने आंदोलनरत अभ्यर्थियों से विस्तार से चर्चा कर उनकी समस्याएं, भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी विसंगतियां और उनकी मांगों को सुना. दिग्विजय सिंह ने कहा कि प्रदेश में एक तरफ सरकारी विद्यालय बड़ी संख्या में शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं. वहीं, दूसरी तरफ शिक्षक पात्रता एवं चयन परीक्षाएं उत्तीर्ण कर चुके हजारों योग्य युवा नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं. ऐसे में स्वीकृत एवं रिक्त पद उपलब्ध होने के बावजूद सीमित संख्या में पदों पर भर्ती करना न तो शिक्षा व्यवस्था के हित में है और न ही पात्र अभ्यर्थियों के साथ न्याय है.

दिग्विजय ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में प्राप्त जानकारी का उल्लेख करते हुए कहा है कि वर्तमान में स्कूल शिक्षा विभाग में माध्यमिक शिक्षकों के 1,10,883 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 44,546 पद रिक्त बताए गए हैं. इसी प्रकार प्राथमिक शिक्षकों के कुल 1,33,576 स्वीकृत पदों में से 55,626 पद रिक्त हैं. जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित विद्यालयों में भी माध्यमिक शिक्षकों के 43,734 पद तथा प्राथमिक शिक्षकों के 54,625 पद रिक्त बताए गए हैं.

शिक्षकों के 88,280 पद खाली

स्कूल शिक्षा विभाग एवं जनजातीय कार्य विभाग को मिलाकर माध्यमिक शिक्षकों के कुल 88,280 रिक्त पद हैं. प्राथमिक शिक्षकों के कुल 1,10,251 रिक्त पद हैं. इस तरह दोनों वर्गों के कुल पद 1,98,531 रिक्त बताए गए हैं. दिग्विजय सिंह ने कहा कि जब प्रदेश में इतनी बड़ी संख्या में शिक्षक पद रिक्त हैं और राज्य सरकार द्वारा बजट में भी पदों की भर्ती के लिए प्रावधान किए जाने की जानकारी है, तब वर्तमान भर्ती प्रक्रिया को केवल सीमित पदों तक रखना समझ से परे है. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में जारी भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत माध्यमिक शिक्षक वर्ग-2 के केवल 10,800 पदों तथा प्राथमिक शिक्षक वर्ग-3 के केवल 13,089 पदों पर भर्ती की जा रही है.

अभ्यर्थी भी चयन से वंचित हो रहे

उन्होंने कहा कि इतनी कम संख्या में पद विज्ञापित किए जाने के कारण अत्यधिक अंक और उच्च पर्सेंटाइल प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी भी चयन से वंचित हो रहे हैं. आंदोलनरत अभ्यर्थियों ने उन्हें बताया कि पात्रता एवं चयन परीक्षा में 99.8 पर्सेंटाइल तक अंक हासिल करने वाले अभ्यर्थियों को भी पर्याप्त पद नहीं होने के कारण नियुक्ति का अवसर नहीं मिल पा रहा है. दिग्विजय सिंह ने इसे पात्र एवं योग्य युवाओं के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि जिन युवाओं ने वर्षों तक तैयारी कर पात्रता और चयन परीक्षाएं उत्तीर्ण की हैं, उन्हें पद उपलब्ध होने के बावजूद नियुक्ति से वंचित रखना उचित नहीं है. पूर्व यह कहा कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थी कई वर्षों से शिक्षक भर्ती की प्रतीक्षा कर रहे हैं. भर्ती प्रक्रिया में लगातार विलंब और पर्याप्त पदों पर नियुक्ति न होने के कारण अनेक पात्र अभ्यर्थी निर्धारित अधिकतम आयु सीमा को पार करने के निकट पहुंच चुके हैं.

वर्षों की मेहनत व्यर्थ हो जाएगी

उन्होंने कहा कि यदि योग्य अभ्यर्थी केवल भर्ती प्रक्रिया में देरी अथवा पदों की कम संख्या के कारण आयु सीमा पार कर जाते हैं तो उनके वर्षों की मेहनत व्यर्थ हो जाएगी. सरकार को युवाओं के भविष्य से जुड़े इस गंभीर विषय पर संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए. पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सरकारी विद्यालयों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए सीएजी रिपोर्ट का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि शिक्षा के लिए 7,165 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान के बावजूद प्रदेश के 1,895 सरकारी विद्यालयों में एक भी शिक्षक नहीं होने की स्थिति अत्यंत गंभीर है.

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