Nepal Flood: नेपाल में बुधवार को आई भयानक बाढ़ से चारों ओर तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है. बाढ़ की वजह से आम लोगों का जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है. लोग अब भी इस भयावह आपदा को भुला नहीं पा रहे हैं और कई लोगों के मन में बाढ़ की दहशत बनी हुई है. नेपाल में बाढ़ से इतनी भीषण तबाही हुई है कि अब तक 469 लोगों की जान जा चुकी है. बाढ़ के कारण बिजली व्यवस्था से लेकर बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है. इसी बीच नेपाल के रसुवा जिले में कस्टम्स एजेंट राजू बुधाथोकी ने बताया कि बुधवार की सुबह तो मेरी आम दिनों जैसी ही शुरू हुई और जल्द ही यह दिन जिंदगी बचाने की एक मुश्किल लड़ाई में बदल गया. उन्होंने बताया कि जमीन हिलने लगी और बाढ़ का तेज पानी उनकी आंखों के सामने घरों को बहा ले गया. ‘द काठमांडू पोस्ट’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बुधाथोकी तिमुरे में अपने कमरे में आराम कर रहे थे, तभी सुबह करीब 8:45 बजे पहाड़ी जोर-जोर से हिलने लगी. भूकंप आने की आशंका से वे बाहर निकले और पास की पुलिस चौकी की ओर भागे. इस दौरान वहां देखा कि पुलिसकर्मी खुद ही उस इलाके से भाग रहे थे. वहीं, तार की बाड़ पार करते समय उनका हाथ घायल हो गया, लेकिन वे तब भी भागते रहे.

घायल होने के बाद भी भागते रहे बुधाथोकी
बुधाथोकी तिमुरे ने बताया कि पीछे मुड़कर देखने पर उन्होंने देखा कि तिमुरे बाजार में एक-एक करके घर बाढ़ के पानी में बह रहे थे. आखिरकार वे पहाड़ी पर करीब 500 मीटर ऊपर एक जंगल में पहुंचे, जहां उन्होंने शरण ली और अपनी जान बचाई. अखबार ने त्रिशूली के अस्पताल में उनके हवाले से लिखा कि जब मैंने जंगल से नीचे तिमुरे की ओर देखा, तो मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे ज़िंदगी में इस तरह दूसरा मौका मिलेगा. अब सब कुछ एक बुरे सपने जैसा लगता है. बुधाथोकी उन लोगों में शामिल थे जो भयानक भोटे कोशी अचानक बाढ़ और भूस्खलन से बच गए. आपको बताते चलें कि इस आपदा ने रसुवागढ़ी में नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र और नीचे की ओर बसी कई बस्तियों को तबाह कर दिया. पुलिस और बचाव दलों ने गुरुवार रात तक सैकड़ों शव बरामद कर लिए थे, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता थे.
आसमान में छा गए थे बादल
वहीं, एक और कस्टम एजेंट प्रकाश गौतम ने भी तिमुरे से अपनी जान बचाने के खौफनाक अनुभव के बारे में बताया. उन्होंने ‘द काठमांडू पोस्ट’ को बताया कि गड़गड़ाहट की आवाज के कुछ ही पलों बाद बाजार में अंधेरा छा गया और आसमान काले बादलों से घिर गया. उन्होंने आगे कहा कि मैं बिना यह जाने कि मैं क्या कर रहा हूं, अपने कमरे से बाहर भागा. मुझे कोई अंदाजा नहीं था कि कहां जाना है या किस तरफ भागना है. मैं बस बचना चाहता था. प्रकाश ने बताया कि मैं बाढ़ के पानी में बिखरे और बहते हुए शव देख सकता था. मेरी आंखों के सामने, खूबसूरत तिमुरे खंडहर में बदल गया. गौतम ने कहा कि हेलीकॉप्टर में बैठने के बाद ही मुझे लगा कि मैं सचमुच बच गया हूं.
प्रभावित जिलों में अपने परिजनों को ढूंढ रहे लोग
एक अन्य वक्ति दोलखा के रहने वाले तुलसी बहादुर भंडारी ने बताया कि मेरी जान तब बची जब बाढ़ का पानी उन्हें जोर से पहाड़ी की ढलान की तरफ धकेले ले गया. भंडारी ने मीडिया को बताया कि काले कीचड़ और पानी की तेज लहर ने अचानक बस्ती को अपनी चपेट में ले लिया और एक के बाद एक घर ढह गए. उन्होंने कहा कि अगर पानी का बहाव मुझे ढलान की तरफ न फेंकता, तो आज मैं जिंदा न होता. बिदुर, त्रिशूली और काठमांडू के अस्पतालों और शेल्टर होम में बचे हुए लोग अब अपनी चोटों से उबर रहे हैं. साथ ही वे अपने घरों, रिश्तेदारों, साथियों और दोस्तों को खोने के सदमे से भी जूझ रहे हैं. अस्पताल में घायल रिश्तेदारों की देखभाल कर रहे राम कुमार राणा ने बताया कि बाढ़ से भागने की कोशिश के दौरान कुछ लोग रेत और कीचड़ के नीचे दब गए थे. राम कुमार ने आगे कहा कि भागते समय पानी की तेज लहर ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया और वे दब गए. इसके बाद बचाव दलों ने हेलीकॉप्टर की मदद से उन्हें बाहर निकाला और सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया. उन्होंने बताया कि अफरा-तफरी के बीच बच्चे घबरा गए, कुछ लोग गिर गए और उन्हें चोटें आईं. इस तबाही के कारण प्रभावित जिलों में परिवार अपने लापता रिश्तेदारों को रोते-रोते ढूंढ रहे हैं.

एक स्थानीय निवासी ने समाचार एजेंसी PTI को बताया कि मेरे पिता वहीं है. वे प्रभावित इलाके में एक पनबिजली में काम करते थे. वह लापता हैं. उस सुबह वे ड्यूटी पर थे और तब से हम उनसे संपर्क नहीं कर पाए हैं. रसुवा के एक और बचे हुए व्यक्ति ने तबाही का भयावह मंजर बयां किया. एक दूसरे शख्स ने पीटीआई से कहा कि वहां कुछ अब कुछ भी नहीं बचा है, मैंने सबकुछ खो दिया है. उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता दोनों लापता हैं.
नदी किनारे वाले लोगों को मिला था अलर्ट
स्थानीय लोगों में से कुछ ने बताया कि नदी के पास रहने वाले लोगों को वहां से निकलने का अलर्ट मिला था. हालांकि, वह पूरी तरह भाग नहीं पाए. इसी ग्रुप में एक शख्स ने कहा कि हमें यहां सुबह करीब 9:35 बजे एक समाचार अलर्ट मिला, जिसमें कहा गया था कि बाढ़ का पानी हट गया है और नदी के इलाके में रहने वाले सभी लोगों को वहां से निकल जाना चाहिए. लेकिन हमें वहां से निकलने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला. यहां पहले दो पुल हुआ करते थे. अब शायद ही कोई घर बचा हो. मुझे नहीं पता कि सरकार इस स्थिति को कैसे संभालेगी. दूसरी ओर नेपाल सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की बचाव टीमें रसुवा, धांडिंग, नुवाकोट और चितवन जिलों में बचे हुए लोगों और लापता लोगों की तलाश कर रही हैं. बचाव दल के एक सदस्य ने बताया कि हताहतों की कुल संख्या का अभी पता नहीं चल पाया है, लेकिन शुरुआती रिपोर्टों से पता चलता है कि जान-माल का भारी नुकसान हुआ है और करीब एक हजार लोग लापता हैं.

विनाशकारी बाढ़ से विदेशी नागरिक भी हुए प्रभावित
इसी बीच बचाव दल के सदस्य ने बताया कि तिब्बत क्षेत्र से शुरू हुई और भोटे काशी के बाद त्रिशूली नदी प्रणालियों में तेजी से फैलती चली गई. इसके बाद इस बाढ़ ने बड़े से बड़े पुल और बुनियादी ढांचे को तबाह कर दिया. नेपाल की संसद के सदस्य खगेंद्र सुनार ने कहा कि बचे हुए लोगों को सुरक्षित इलाकों में पहुंचाने और तबाह हुई बस्तियों को फिर से बसाने में काफी समय लगेगा. सुनार ने PTI को बताया कि बाजारों और इलाके को फिर से ठीक करने में निश्चित रूप से बहुत समय लगेगा. लेकिन जो लोग बच गए हैं, उन्हें सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि हर पार्टी योगदान दे रही है क्योंकि यह एक बड़ी आपदा है. यह सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि यह हम सबकी जिम्मेदारी है. इस विनाशकारी बाढ़ से विदेशी नागरिक भी प्रभावित हुए हैं.

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नेपाली और भारतीय अधिकारियों के अनुसार, हज़ारों लोग लापता हैं, जिनमें 30 से ज़्यादा देशों के नागरिक शामिल हैं. साथ ही 290 लापता भारतीय नागरिक भी हैं. बचाव कार्य जारी रहने के बीच बचे हुए लोगों को एक दर्दनाक सच्चाई का सामना करना पड़ रहा है. वे लोग बाढ़ से तो किसी तरह बच निकले लेकिन जब वे लौटे तो पाया कि उनके घर, काम की जगहें और समुदाय पूरी तरह खत्म हो चुके हैं. बाढ़ के बाद जो लोग बच गए हैं, उनके लिए जिंदा रहने की राहत अब उन लोगों को खोने के दुख के साथ जुड़ गई है जो बच नहीं पाए.
सिक्किम सरकार पहुंचाएगी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मदद
बता दें कि सिक्किम सरकार ने राज्य के उन लोगों को राहत और जरूरी मदद पहुंचाने के लिए एक टास्क फोर्स बनाई है जो नेपाल में अचानक आई बाढ़ में फंस गए हैं. उन्होंने कहा कि सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निदेशक प्रभाकर राय की अध्यक्षता वाली यह टास्क फोर्स, आपदा से प्रभावित राज्य के निवासियों के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए केंद्र सरकार, नेपाल में भारतीय दूतावास और कई अन्य एजेंसियों के साथ तालमेल बिठाएगी. साथ ही सिक्किम सरकार ने राज्य के उन लोगों को राहत और जरूरी मदद पहुंचाने के लिए एक टास्क फोर्स बनाई है जो नेपाल में अचानक आई बाढ़ में फँस गए हैं या लापता हो गए हैं.
अधिकारी ने कहा कि सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निदेशक प्रभाकर राय की अध्यक्षता वाली यह टास्क फोर्स, आपदा से प्रभावित राज्य के निवासियों के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए केंद्र सरकार, नेपाल में भारतीय दूतावास और कई अन्य एजेंसियों के साथ तालमेल बिठाएगी. साथ ही यह टास्क फोर्स घटना में लापता, फँसे हुए, घायल, मृत या किसी अन्य तरह से प्रभावित लोगों के बारे में जानकारी इकट्ठा करेगी, उसे व्यवस्थित करेगी और उसकी पुष्टि करेगी. उन्होंने कहा कि टास्क फोर्स प्रभावित सिक्किम निवासियों के परिवारों से संपर्क करेगी और उनकी स्थिति व ठिकाने के बारे में पुष्टि की गई जानकारी के आदान-प्रदान में मदद करेगी.
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