MP Protest : रक्षाबंधन… बहन के प्यार, भाई के वचन और खुशियों का त्यौहार है. आज के दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं, मिठाइयां खिलाती हैं, लेकिन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के नीलम पार्क से आई यह तस्वीर किसी भी संवेदनशील इंसान का कलेजा चीर देगी.
आज त्यौहार के दिन भी, प्रदेश की बेटियां नीलम पार्क में अनिश्चितकालीन धरने और भूख हड़ताल पर बैठी हैं. हाथों में राखी तो है पर आंखों में सिर्फ आंसू और भविष्य का अंधेरा. शिक्षक भर्ती-2025 में पदवृद्धि की मांग को लेकर पिछले 10 दिनों से ये अभ्यर्थी नीलम पार्क में डटे हैं.
खामोश दर्द का गवाह बन रहा नीलम पार्क
त्योहार की उमंग के बीच भोपाल का नीलम पार्क आज एक खामोश दर्द का गवाह बन रहा है. वर्ग-2 माध्यमिक और वर्ग-3 प्राथमिक शिक्षक भर्ती-2025 में पदवृद्धि की मांग को लेकर 21 अगस्त से शुरू हुआ यह आंदोलन आज अपने 10वें दिन में प्रवेश कर चुका है. धरने पर बैठी इन महिला अभ्यर्थियों के चेहरे पर थकावट जरुर है, लेकिन आंखों में भविष्य को बचाने की जिद्द भी है.
भाइयों की कलाई सूनी रह जाएगी
लाइव टाइम्स की टीम जब नीलम पार्क पहुंची और उन्होंने महिला अभ्यर्थियों से बात की तो वह आंखों में आंसू लिए बोलीं- हमें बहुत दुख है कि आज हमारे भाइयों की कलाई सूनी रह जाएगी, पर हम क्या करें, यह हमारे भविष्य का सवाल है. किसी के सिर पर बूढ़े माता-पिता की जिम्मेदारी है तो कोई अपने छोटे-छोटे बच्चों को छोडक़र यहां बैठी है. अगर आज हम अपने हक के लिए नहीं लड़े तो कल उनका सहारा कौन बनेगा. मोहन सरकार से हाथ जोड़कर निवेदन है कि हमारी सुनवाई करें.
नौकरी के इंतजार में सड़कों पर उतरे शिक्षक अभ्यर्थी, भोपाल में पदवृद्धि को लेकर आंदोलन ने पकड़ा जोर
किसी बूढ़े बाप का इकलौता सहारा
बता दें ये सिर्फ शिक्षक अभ्यर्थी नहीं हैं, ये किसी घर की लाड़ली बेटियां हैं, किसी बूढ़े बाप का इकलौता सहारा हैं और किसी मासूम बच्चे की मां हैं. नवंबर 2025 से जुलाई 2026 तक कई चरणों में आंदोलन करने के बाद जब सरकार ने इनकी सुध नहीं ली तो मजबूरन इन्हें इस पावन त्यौहार पर भी सड़कों पर बैठना पड़ा. कलाई पर बंधने वाली राखी आज मांगों के ज्ञापन में तब्दील हो चुकी है और भाइयों की खुशियों की जगह आंखों के आंसुओं ने ले ली है.
कलाई और आंखों के आंसू देख पाएंगी
सवाल सिर्फ एक भर्ती का नहीं है, सवाल उन भावनाओं का है जो आज भोपाल की सड़कों पर बिखरी पड़ी हैं. क्या डॉ. मोहन यादव की सरकार इन बेटियों की सूनी कलाई और आंखों के आंसू देख पाएगी. क्या इन बेटियों को रक्षाबंधन पर हक का तोहफा मिलेगा.
