Fake Medicine Website: दिल्ली पुलिस ने एक ऑनलाइन धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़ किया है. इसमें एक फर्जी वेबसाइट के जरिए हेल्थ सप्लीमेंट और दवाइयां बेची जा रही थीं. इस रैकेट का निशाना मुख्य रूप से पंजाब के लोग थे. पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है. अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी. आरोपियों की पहचान 22 वर्षीय हितेन कुमार और आयुष आर्य के रूप में हुई है. पुलिस के अनुसार, आरोपी पीड़ितों से ठगी गई रकम को अपने बैंक खातों के जरिए ट्रांसफर करवाते थे, जिसके बदले में वे 10 प्रतिशत कमीशन लेते थे.
पेमेंट की, लेकिन नहीं मिली दवाइयां
पुलिस के मुताबिक, यह मामला तब सामने आया जब पंजाब के अमृतसर के एक निवासी ने शिकायत दर्ज कराई. उसने आरोप लगाया कि 27 सितंबर से 30 सितंबर के बीच, उसने www.openlifevedixa.com नाम की एक वेबसाइट से हेल्थ सप्लीमेंट और दवाइयां मंगवाईं और ऑनलाइन पेमेंट किया. लेकिन उसे कोई भी सामान नहीं मिला. शिकायत मिलने के बाद, पूर्वी जिले के साइबर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई और मामले की जांच शुरू हुई.
एक अन्य की तलाश जारी
जांच के दौरान, पुलिस ने बैंक खातों की डिटेल, KYC दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की जांच की. इसमें पता चला कि धोखाधड़ी से जुड़ी कुल 2,66,437 रुपये की रकम दो बैंक खातों में आई थी. बाद में इस पैसे को ATM के जरिए निकाल लिया गया. पुलिस ने बताया कि पूछताछ के दौरान आयुष आर्य ने खुलासा किया कि उसने 10 प्रतिशत कमीशन के बदले अपने और अपने एक दोस्त के बैंक खाते की जानकारी अपने चचेरे भाई हितेन कुमार को दे दी थी. ठगी गई रकम को निकाला जाता था और कमीशन काटकर बाकी पैसे हितेन कुमार को दे दिए जाते थे.
जांच के आधार पर, 21 अक्टूबर को हितेन कुमार को पकड़ लिया गया और गिरफ्तार कर लिया गया. पूछताछ के दौरान, हितेन कुमार ने बताया कि वह एक अन्य व्यक्ति के साथ जुड़ा हुआ था, जो इस वेबसाइट को चला रहा था और ऑनलाइन धोखाधड़ी को अंजाम दे रहा था. पुलिस अब उस व्यक्ति की पहचान करने और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रही है.
आगे की जांच कर रही पुलिस
पुलिस ने आयुष आर्य के पास से एक मोबाइल फोन भी बरामद किया है. कथित तौर पर इस डिवाइस में वेबसाइट का लिंक और आरोपियों के बीच हुई व्हाट्सएप बातचीत मौजूद थी. पुलिस डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है ताकि और कड़ियां जोड़ी जा सकें और अन्य पीड़ितों की पहचान की जा सके. पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने पीड़ितों से पैसे लेने के लिए बैंक खातों का इंतजाम किया था. वे एटीएम के जरिए पैसे निकालते थे और अपना कमीशन काटकर बाकी रकम नेटवर्क के अन्य सदस्यों को भेज देते थे. अन्य साथियों की पहचान करने, पैसों के पूरे लेन-देन का पता लगाने और पीड़ितों की कुल संख्या का पता लगाने के लिए आगे की जांच चल रही है.
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News Source: ANI
