Home Top News कोर्ट पर नियंत्रण को लेकर टस्क और राष्ट्रपति में टकराव, Poland में तख्तापलट के दावों से बढ़ी हलचल

कोर्ट पर नियंत्रण को लेकर टस्क और राष्ट्रपति में टकराव, Poland में तख्तापलट के दावों से बढ़ी हलचल

by Sachin Kumar 31 October 2026, 12:12 PM IST
31 October 2026, 12:12 PM IST
Poland Violation of constitutional order

Poland Crisis: पोलैंड की राजधानी वारसॉ में राजनीतिक और संवैधानिक संकट गहरा गया है. प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने संवैधानिक ट्रिब्यूनल के प्रमुख को हटाने के बाद न्यायालय में नई नियुक्तियां की थीं. हालांकि, राष्ट्रपति करोल नावरोत्स्की ने नवनियुक्त न्यायाधीशों को शपथ नहीं दिलाई. इसके बावजूद न्यायाधीश ट्रिब्यूनल के भवन में पहुंच गए और वहां डटे रहे, जिससे विवाद और बढ़ गया. राजधानी में बढ़ते गतिरोध के बीच राष्ट्रपति नावरोत्स्की ने अपनी विदेश यात्रा बीच में ही छोड़ दी और वापस लौटकर सीधे संवैधानिक ट्रिब्यूनल पहुंच गए. इस दौरान उनके सुरक्षाकर्मियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की होने की भी खबर सामने आई है.

ट्रिब्यूनल पर नियंत्रण को लेकर खड़ा हुआ विवाद

वहीं, राष्ट्रपति नावरोत्स्की बैरिकेड पारकर भीतर गए और जजों को साफ शब्दों में कह दिया कि जिन्होंने ने भी शपथ नहीं ली है, वे जज नहीं हैं. आपको बताते चलें कि प्रधानमंत्री टस्क सेंट्रिस्ट-लेफ़्टिस्ट गठबंधन के नेता हैं, जबकि राष्ट्रपति नावरोत्स्की ‘ लॉ एंड जस्टिस पार्टी’ से संबद्ध रखते हैं. वह एक दक्षिणपंथी दल है. बताया जा रहा है ट्रिब्यूनल के मामले में जो घटित हो रहा है और राष्ट्रपति के दृश्य जो सामने आए हैं, यह सब टस्क खेमे के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है. इसी बीच, अदालत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के निलंबन के बाद देश में तख्तापलट की आशंकाओं को भी तेज कर दिया है और यह पूरा विवाद संवैधानिक ट्रिब्यूनल (शीर्ष अदालत) पर नियंत्रण को लेकर खड़ा हुआ है.

संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन का लगाया आरोप

पोलैंड के राष्ट्रपति कैरोल नावरोत्स्की ने शनिवार को सरकार पर देश की संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है. संवैधानिक ट्रिब्यूनल को लेकर राजनीतिक टकराव बढ़ने के बाद उन्होंने कानून व्यवस्था को बहाल करने और संसदीय दलों के प्रतिनिधियों के साथ तत्काल परामर्श बैठक बुलाने की मांग की. राष्ट्रपति कार्यालय ने एक्स पोस्ट में नावरोत्स्की के हवाले से कहा कि रातों-रात संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन हुआ है और एक संवैधानिक सरकारी अंग पर जबरन कब्जा कर लिया गया है.

सुरक्षा बलों को ट्रिब्यूनल से निकल जाना चाहिए

कैरोल नावरोत्स्की बताया कि आज रात पोलैंड गणराज्य की संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन हुआ है और एक संवैधानिक सरकारी अंग पर जबरन कब्जा कर लिया गया है. उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पहले अध्यक्ष जबिग्न्यू कपिंस्की के साथ चर्चा की है. कपिंस्की ने भी संवैधानिक न्यायाधिकरण में सत्ता हथियाने वाले लोगों द्वारा की गई कार्रवाइयों को कानूनी नहीं माना है. संवैधानिक व्यवस्था को बहाल करने की मांग करते हुए नावरोत्स्की ने कहा कि सरकार द्वारा तैनात सुरक्षा बलों को न्यायाधिकरण परिसर से बाहर निकल जाना चाहिए. मैं कानूनी व्यवस्था की बहाली की मांग करता हूं और चाहता हूं कि सरकार द्वारा वहां भेजे गए सुरक्षा बल न्यायाधिकरण परिसर से चले जाएं.

आपातकालीन बैठक बुलाई गई

राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि उन्होंने संवैधानिक न्यायाधिकरण के कानूनी रूप से नियुक्त उपाध्यक्ष बार्टलोमी सोचांस्की को संस्थान के अंदर जाने में मदद की है. पोलैंड की आंतरिक सुरक्षा को लेकर चिंताओं और बढ़ते राजनीतिक टकराव के बीच नावरोत्स्की ने घोषणा की कि वे इस स्थिति से निपटने के लिए संसदीय दलों के प्रतिनिधियों के साथ तत्काल परामर्श बैठक बुला रहे हैं. इसका उद्देश्य राजनीतिक स्थिति में स्थिरता लाना और संवैधानिक व्यवस्था को बहाल करना है.

पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री ने कही ये बात

पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री सिकोरस्की ने कहा कि निवर्तमान राष्ट्रपति बहुमत से चुने गए लोगों को काम करने से रोक रहे थे. उन्हें फैसले सुनाने, कानूनों की व्याख्या करने या अपना बजट पारित करने से भी रोका जा रहा था. यही वजह है कि न्यायाधिकरण को फिर से काम करने लायक बनाने के लिए कदम उठाना जरूरी था. पुलिस की तैनाती की मांग जज अन्ना कोरविन-पियोट्रोव्स्का ने की थी, जिन्होंने जजों और प्रशासनिक कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर संभावित खतरे की ओर इशारा किया था.

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News Source: ANI

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