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झारखंड राज्यसभा चुनाव में बड़ा उलटफेरः संख्या बल में पीछे रहकर भी जीते NDA समर्थित नाथवानी

by Live Times 18 June 2026, 8:31 PM IST (Updated 18 June 2026, 8:35 PM IST)
18 June 2026, 8:31 PM IST (Updated 18 June 2026, 8:35 PM IST)
झारखंड राज्यसभा चुनाव में बड़ा उलटफेरः NDA समर्थित परिमल नाथवानी की जीत, कांग्रेस ने लगाया धोखे का आरोप

Jharkhand Rajya Sabha Elections: झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए हुआ चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ. नतीजों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है. संख्या बल के हिसाब से पीछे माने जा रहे एनडीए समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने जीत दर्ज कर सभी को चौंका दिया. वहीं इस चुनाव के बाद महागठबंधन के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं और कांग्रेस के नेताओं ने अपने सहयोगी दलों पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं. राज्यसभा चुनाव में एनडीए समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी को कुल 30 वोट मिले. हालांकि इनमें दो वोट अमान्य घोषित किए गए, जिसके बाद उन्हें 28 वैध मत प्राप्त हुए.

प्रणव झा को मिले केवल 20 वोट

गौर करने वाली बात यह है कि एनडीए के पास विधानसभा में केवल 24 विधायक हैं. ऐसे में नाथवानी की जीत ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं और महागठबंधन की एकजुटता पर चर्चा तेज हो गई है. वहीं कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा को केवल 20 वोट मिले. दूसरी ओर झामुमो के उम्मीदवार बैजनाथ राम को कुल 31 वोट प्राप्त हुए, लेकिन एक वोट अमान्य होने के कारण उन्हें 30 वैध मत मिले.

महागठबंधन में झामुमो, कांग्रेस, राजद और माले समेत सहयोगी दलों के कुल 56 विधायक हैं. इसके बावजूद एनडीए समर्थित उम्मीदवार की जीत ने राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई बहस छेड़ दी है. चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद झारखंड विधानसभा परिसर में एनडीए नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच खुशी का माहौल देखने को मिला. समर्थकों ने परिमल नाथवानी को मिठाई खिलाई, फूल-मालाएं पहनाईं और जीत का जश्न मनाया. एनडीए नेताओं ने इसे अपनी रणनीति की जीत बताते हुए कहा कि उन्होंने जो दावा किया था, उसे पूरा कर दिखाया.

झारखंड के विधायक काफी समझदारः मरांडी

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड के विधायक काफी समझदार हैं और उन्हें पता है कि राज्यहित में किसे वोट देना है. उन्होंने कहा कि यही वजह है कि परिमल नाथवानी की जीत हुई. मरांडी ने यह भी कहा कि नाथवानी पहले भी दो बार राज्यसभा सांसद रह चुके हैं और उन्होंने झारखंड में कई विकास कार्यों में योगदान दिया है.

उधर, हार के बाद कांग्रेस के भीतर नाराजगी खुलकर सामने आई. कांग्रेस विधायक सुरेश बैठा ने सीधे तौर पर अपने सहयोगी दलों पर आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि राजद और माले के विधायकों ने कांग्रेस को धोखा देने का काम किया और पूरी मजबूती से साथ नहीं दिया. वहीं कांग्रेस विधायक ममता देवी ने एनडीए पर गंभीर आरोप लगाए.

विपक्ष ने पैसे के बल पर जीता चुनावः ममता

उन्होंने कहा कि एनडीए को हार का डर सता रहा था, इसलिए धनबल का इस्तेमाल किया गया. ममता देवी का दावा है कि कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट थे, लेकिन विपक्षी खेमे ने पैसे की ताकत के दम पर चुनावी समीकरण बदलने की कोशिश की. राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि राजनीति में केवल संख्या बल ही सब कुछ नहीं होता, बल्कि रणनीति, अंदरूनी समीकरण और राजनीतिक प्रबंधन भी बड़ी भूमिका निभाते हैं.

एनडीए समर्थित परिमल नाथवानी की जीत ने जहां महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति में इसके दूरगामी असर देखने को मिल सकते हैं. यह चुनाव अब सिर्फ जीत और हार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है.

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  • विशाल भारद्वाज की रिपोर्ट

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