Javed Miandad : पाकिस्तानी क्रिकेटर जावेद मियांदाद एक समय अपनी बल्लेबाजी के अलावा जुमलों से भी अपने प्रशंसकों का दिल जीत लिया करते थे. फिलहाल वह क्रिकेट जगत से संन्यास लेने के बाद कराची के गिज़री इलाके में अपनी जिंदगी के खूबसूरतों पलों का आनंद ले रहे हैं. इसी महीने में उन्होंने अपनी जिंदगी का 69वां साल पूरा किया और अपनी जवानी के दिनों की तरह ही वह आज भी अपने सेंस ऑफ ह्यूमर से लोगों का दिल जीत लेते हैं. वह खुद भी हंसते हैं लोगों को भी खूब हंसाते हैं. फिलहाल जावेद मियांदाद इन दिनों अपने घर पर ही रहते हैं और अगर कोई उन्हें किसी कार्यक्रम में निमंत्रण दे देता है तो वह चले जाते हैं. वह अपनी जिंदगी में इतने व्यस्त रहते हैं कि क्रिकेट भी नहीं देखते हैं और अगर मौका मिले तो कुछ हाईलेट्स मैच जरूर देख लिया करते हैं. एक समय था जब वह क्रिकेट की दुनिया में राज करते हैं और अब एक ऐसे मोड़ पर आ गए हैं कि क्रिकेट मैच तक नहीं देख पाते हैं.
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6 वर्ल्ड कप खेलने वाले बने पहले खिलाड़ी
पाकिस्तानी क्रिकेटर जावेद मियांदाद क्रिकेट इतिहास के पहले ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने 6 विश्व कप खेले थे. उन्होंने 975 से लेकर 1996 के बीच लगातार सभी छह आईसीसी क्रिकेट विश्व कप खेले. इसके अलावा साल 1992 में पाकिस्तान को विश्व कप जिताने में मियांदाद ने एक बल्लेबाज के रूप में अहम भूमिका निभाई थी. साथ ही जावेद ने जब क्रिकेट जगत से संन्यास ले लिया तो उसके बाद भारतीय क्रिकेट सचिन तेंदुलकर एक मात्र दूसरे क्रिकेटर रहे जिन्होंने 6 विश्व कप खेलने का रिकॉर्ड अपने नाम किया. इसी बीच जब उनसे एक बार पूछा गया कि उनको अपने करियर में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के किस चैयरमैन के साथ काम करने में मजा आया तो उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) तौकीर ज़िया का नाम लिया. जावेद ने कहा कि जनरल साहब की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि उन्हें खिलाड़ियों से काम लेना आता था. साथ ही वह क्रिकेट की बारीकियों को अच्छी तरह से सुनते थे और अगर वह महत्वपूर्ण होती थी तो वह उसे अमल में लाने का भी काम करते थे. मेरी उनके साथ एक शानदार अंडरस्टैंडिंग थी. उनके कार्यकाल में पाकिस्तान क्रिकेट को नई ऊंचाइयां मिली और कई युवा खिलाड़ियों को भी टीम में मौका दिया गया.

उनकी शरारतों से कोई नहीं बचा
उनके बचपन के साथी हारून रशीद ने एक बार कहा था कि मैं और जावेद कराची के चर्चा स्कूल में पढ़ते थे. यह वही स्कूल है जहां पर पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने शिक्षा हासिल की थी. साथ ही जावेद के बड़े भाई बशीर मियांदाद हमारी स्कूल टीम के कप्तान थे. बशीर के स्कूल से जाने के बाद मैं टीम का कप्तान बनाया गया था. उस दौरान बशीर भाई ने स्कूल से जाते वक्त कहा था कि मेरे छोटे भाई जावेद को भी देख लेना. वह भी बहुत अच्छा क्रिकेट खेलता है. रशीद ने आगे कहा कि जब स्कूल की टीम चुनने के वक्त आया तो मैंने अपने टीचर से बात की और जावेद को टीम में शामिल करने का सुझाव दिया. इस पर मेरे शिक्षक ने कहा कि यह तो बहुत छोटा है. साथ ही अगर इसको मैदान पर खिलाया गया तो इसको चोट लगने का खतरा बहुत ज्यादा है.
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वसीम अकरम से भी जुड़ा है एक वाकया
आपको बताते चलें कि बचपन से ही जावेद मियांदाद में क्रिकेट को लेकर जुनून था और वह पढ़ाई से ज्यादा क्रिकेट की प्रैक्टिस में अपना समय बिताते थे. इस पर हारून राशीद ने कहा कि काफी छोटे होने की वजह से शुरुआत में जावेद से सिर्फ फिल्डिंग ही कराई जाती थी. हारून ने बताया कि जब हम पाकिस्तान क्रिकेट टीम में शामिल हो गए तो उस वक्त भी जावेद की शरारतें कम नहीं हुई थीं. साथ ही जब हम जहाज से कहीं जाते थे तो उस वक्त जावेद ऐसी आवाजें निकाला करते थे कि मानो पास से कोई पंछी गुजर गया हो. मियांदाद के सेंस ऑफ ह्यूमर की एक घटना वसीम अकरम से भी जुड़ी हुई है. वसीम ने बताया कि जब मैं पहली बार न्यूजीलैंड दौरे के लिए पाकिस्तान टीम के लिए चुना गया तो मैंने उस वक्त जावेद मियांदाद को फोन किया. उस वक्त वह टीम के कप्तान हुआ करते थे और उस दौरान मैंने उनसे पूछा कि इस दौरे पर मेरे कितने रुपये खर्च हो जाएंगे. इस पर जावेद ने बहुत ही गंभीरता से जवाब दिया कि करीब एक लाख रुपये खर्च हो जाएंगे.
एक लाख रुपये की बात सुनने के बाद वसीम अकरम परेशान हो गए और वह कहने लगे कि जावेद भाई मेरे पास तो इतने रुपये नहीं है. अब मैं इस दौरे पर नहीं जा सकता हूं. दूसरी तरफ जावेद मियां की हंसी छूट पड़ी और वह कहने लगे कि वेबकूफ. तुम्हें एक भी पैसे देने की जरूरत नहीं है और तुम्हें खेलने के सरकार उल्टा पैसा देगी.

खिलाड़ियों से भी हुई नोक-झोंक
भारतीय पूर्व क्रिकेटर सुनील गावस्कर और जावेद मियांदाद के बीच में काफी शानदार दोस्ती रही है. गावस्कर ने पहली बार जावेद को विश्व कप 1975 में लदन के एक होटल में देखा था. उस दौरान उनकी इंग्लिश कमजोर होने की वजह से उन्हें एक रेस्टोरेंट के बारे में पता करने में काफी दिक्कत हो रही थी. इसके अलावा गावस्कर न केवल जावेद की बल्लेबाजी के फैन थे बल्कि उनके सेंस ऑफ ह्यूमर को भी काफी पसंद करते थे. गावस्कर को जब भी मौका मिलता है तो वह किसी भी टीवी शोज में उनकी आवाज निकालते और उनके सेंस ऑफ ह्यूमर का मजाक उड़ाते हुए नजर आ जाते हैं.
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बता दें कि जावेद ने साल 1982 में भारत के खिलाफ घरेलू सीरीज में दिलीप दोशी को अपने निशाने पर रखा था. वह हर एक गेंद पर शॉट मारते और उनसे पूछते थे कि तुम्हारा कमरा नंबर क्या है? इसके बाद जब बात बढ़ने लगी तो दिलीप ने इसकी शिकायत अपने कप्तान सुनील गावस्कर से कर दी. इसके बाद एक दूसरे मैच में भी वह इसी तरह विकेटकीपर किरण मोरे पर भी कमेंट करते हुए दिखाई दिए.
वहीं, इसी तरह 1981 में पाकिस्तानी टीम ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर पहुंची थी. इस दौरान गेंदबाज डेनिस लिली ने जावेद मियांदाद लात मार दी थी और उसके बाद काफी विवाद हो गया था. इसी बीच बदला लेने के लिए मियांदाद ने अपना बल्ला हवा में लहराया और उनकी एक्टिंग करते हुए दिखाई दिए.

ऐसा रहा मियांदाद का रिकॉर्ड
जावेद मियांदाद ने अपने करियर में टेस्ट और वनडे करियर दोनों फॉर्मेट खेले हैं. इस बीच उनके टेस्ट क्रिकेट पर निगाह डालते तो उन्होंने अपने करियर में 124 मैच खेले हैं और उसमें 189 इनिंग में बल्लेबाजी करने का मौका मिला है. मियांदाद ने टेस्ट क्रिकेट में कुल 8832 रन बनाए हैं और उनका सर्वोच्च स्कोर नाबाद 288 रन रहा है. साथ ही उन्होंने 23 शतक और 43 अर्धशतकीय पारियां भी खेली हैं. बता दें कि वह उन क्रिकेटरों में से एक हैं जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 50 नीचे अपना औसत नहीं गिरने दिया. मियांदाद ने अपने डेब्यू टेस्ट क्रिकेट में न्यूजीलैंड के खिलाफ शतक जड़कर क्रिकेट जगत के महान क्रिकेटरों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था. उस मैच के बाद उन्होंने 17 साल तक पाकिस्तान क्रिकेट का नेतृत्व किया और बुरे वक्त में टीम को बाहर निकालने का काम किया. उनके लिए कहा जाता है कि अगर वह पिच पर चिपक गए तो इतनी आसानी से आउट होने का नाम नहीं लेते थे. इसके अलावा फर्स्ट क्रिकेट में भी उनका औसत 50 से ज्यादा ही रहा था. उनके नाम 28000 से ज्यादा रन फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी है.
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आपको बताते चलें कि भले ही डॉन ब्रैडमैन का (99.94) औसत सबसे ज्यादा था. लेकिन उन्होंने अपने करियर में 50 से नीचे का औसत एक बार जरूर देखा था. मगर सटक्लिफ और मियांदाद दो ऐसे बल्लेबाज रहे हैं जिन्होंने औसत के मामले में कभी भी 50 से नीचे नहीं गिरने दिया. उनका टेस्ट क्रिकेट में औसत 52.57 रहा था और वह इस फॉर्मेट में अपने समय के सबसे प्रभावशाली बल्लेबाजों में से एक थे. साथ ही सटक्लिफ (1924 से 1935) अपने समय सबसे भरोसेमंद ओपनर माने जाते रहे थे. उनकी भी एक खासियत यह थी उन्होंने अपने पूरे टेस्ट करियर में कभी एवरेज 50 से नीचे नहीं गिरने दिया. उन्होंने इस फॉर्मेट में 16 से ज्यादा शतक और 4500 से ज्यादा रन बनाए थे.

इसके अलावा उनके वनडे करियर में निगाह डालते तो उन्होंने इस फॉर्मेट में भी कमाल का क्रिकेट खेला है. 233 एकदिवसीय मैचों में उन्होंने 7381 रन बनाए है और इस दौरान उनका सर्वोच्च स्कोर नाबाद 119 रन रहा है. साथ ही इस फॉर्मेट में मियांदाद ने 8 शतक और 50 अर्धशतकीय पारियां भी खेली हैं. इसी बीच उन्होंने पाकिस्तान को 1992 में विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभाई थी और वह उस टूर्नामेंट में रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में दूसरे स्थान पर रहे थे. एक सीनियर बल्लेबाज के रूप में उन्होंने प्रभावी बल्लेबाजी की थी. भले ही टीम को विश्व कप जिताने का श्रेय इमरान खान को दिया जाता है. लेकिन जावेद साहब की भूमिका भी शानदार रही थी और यही वजह रही कि पाकिस्तान ने पहली बार विश्व कप का खिताब जीता था.
