Kashmiri Pandits: घाटी में कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास की मांग तेज हो गई है. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सलाहकार नासिर असलम वानी ने इस मामले पर अपनी आवाज मुखर की है. वानी ने शनिवार को कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास की देखरेख करने वाली शीर्ष समिति को फिर से शुरू करने की मांग की.
2014 में भंग हो गई थी समिति
कहा कि 2009 में जम्मू-कश्मीर की अब्दुल्ला सरकार ने विस्थापित कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास की देखरेख और सुविधा के लिए और केंद्र द्वारा घोषित पुनर्वास उपायों के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक शीर्ष समिति का गठन किया था. इस समिति में सरकारी प्रतिनिधि और कई कश्मीरी पंडित संगठनों के सदस्य शामिल थे. विदेशों में रहने वाले कश्मीरी पंडितों द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वानी ने कहा कि 2014 में भंग की गई समिति को फिर से शुरू करने का समय आ गया है.
वानी ने कहा कि यह सम्मेलन ठीक है, लेकिन इसके अलावा हमें एक साथ बैठकर बात करनी होगी. आपकी तरफ से कुछ प्रतिनिधि और हमारी तरफ से कुछ प्रतिनिधि आपस में बात करेंगे और कश्मीरी पंडितों की वापसी के लिए कोई रास्ता निकालेंगे. मुझे लगता है कि सरकारी स्तर पर शीर्ष समिति को बहाल करने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि अब उस कमेटी को फिर से बनाने का समय आ गया है जो कश्मीरी पंडितों की अपनी मातृभूमि में सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी के लिए एक रोडमैप तैयार करे. उन्होंने कहा कि यह कमेटी आपके समुदाय से बात करेगी और फैसले लेगी.
घाटी में उग्रवाद से मुसलमान भी प्रभावित
उन्होंने आगे कहा कि हम मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल से भी बात करेंगे और जल्द ही इस कमेटी का पुनर्गठन करेंगे. मुख्यमंत्री के सलाहकार ने कहा कि 1990 में घाटी में उग्रवाद के फैलने से न केवल कश्मीरी पंडित, बल्कि मुसलमान भी प्रभावित हुए थे. उन्होंने जोर देकर कहा कि 1990 के उस दौर ने सभी को प्रभावित किया. इसने दोनों समुदायों पर असर डाला और इसका समाधान भी मिलकर ही निकलेगा. वानी ने माना कि यह एक सच्चाई है कि लोगों का एक वर्ग ऐसा है जो शांति नहीं चाहता.
उन्होंने कहा कि आप सभी पर एक जैसा आरोप नहीं लगा सकते. ऐसे लोग भी हैं जिनके दिल तब भी आपके लिए धड़कते थे और आज भी धड़कते हैं. संतों की यह घाटी पंडितों की वापसी के बिना अधूरी है. उन्होंने कहा कि सरकार ने पंडितों को वापस लाने के लिए अपने स्तर पर कोशिश की है. उन्होंने कहा कि चाहे पुनर्वास का काम हो, प्रधानमंत्री का पैकेज, ट्रांज़िट कैंप, अस्थायी आवास या शीर्ष समिति हमने अपनी पूरी कोशिश की. कुछ लोगों से गलतियां हुईं, लेकिन उन गलतियों को सुधारने की कोशिशें भी की गईं.
आरोप-प्रत्यारोप से नहीं निकलेगा हल
कहा कि अगर आपको कांटा चुभा, तो वह दर्द हमने भी महसूस किया. वानी ने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप से कोई नतीजा नहीं निकलेगा. उन्होंने कहा कि हम चाहे कितनी भी कोशिशें कर लें – बातचीत हो या समितियां बनाना – जब तक हमारे कश्मीरी पंडित भाई घाटी में वापस नहीं बस जाते, तब तक सब कुछ अधूरा है. इसके लिए हमें मिलकर काम करना होगा. बहुत समय बीत चुका है और अगर हम आज भी आरोप-प्रत्यारोप का खेल जारी रखते हैं, तो किसी समाधान तक नहीं पहुंच पाएंगे.
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News Source: PTI
