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Explained: दुनिया में आएगा जल संकट? 130 करोड़ लोगों के हिस्से का पानी पी जाएंगे AI डेटा सेंटर!

by Amit Dubey 13 June 2026, 4:38 PM IST (Updated 13 June 2026, 5:16 PM IST)
13 June 2026, 4:38 PM IST (Updated 13 June 2026, 5:16 PM IST)
AI Water Consumption

AI Water Consumption: आज की दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ओर बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है. भारत समेत विश्व के कई देश इस होड़ में एक-दूसरे से आगे बढ़ने की कोशिश में लगे हुए हैं. इसको देखते हुए यह कहा जा सकता है कि आने वाला समय एआई के एक युग की तरह हो सकता है. अगर हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में आसान शब्दों में बात करें तो पता चलता है कि एआई एक कंप्यूटर साइंस का ही हिस्सा है, जो सॉफ्टवेयर या किसी इलेक्ट्रिक मशीन को इंसानों की तरह सोचने, समझने और फैसले लेने के लिए काम करता है.

आज के समय में लैंग्वेज प्रोसेसिंग पर भी एआई बहुत ही तेजी के साथ काम कर रहा है. डिजिटल के इस समय में एआई लोगों को कई प्रकार की सुविधाएं दे रहा है, जिनमें ऑनलाइन किसी भी मुद्दे के बारे में जानकारी हासिल करना, किसी विषय पर कोई आइडिया लेना, इंसानों के दिमागों का नकल पर डीप लर्निंग करना, वर्चुअल असिस्टेंट के रूप में काम करना, नेविगेशन और ऑटोमेशन आदि. एआई एक तरह से वर्चुअल इंसान के रूप में भी काम कर रहा है. एआई से फिल्में बन रही हैं. बहरहाल, दुनिया में बढ़ते एआई के मार्केट ने अब पानी को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

जी हां, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए अलग-अलग देशों में डेटा सेंटर बनाए जाते हैं. इस डेटा सेंटर की बात करें तो यह बहुत ही हाई डेवलप कंप्यूटर सर्वर हब होता है, जिसका इस्तेमाल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को प्रशिक्षित करने इसके साथ ही उसे विकसित करने और तेजी के साथ आसानी से चलाने में किया जाता है. इस एआई डेटा सेंटर को चलाने के लिए काफी अधिक मात्रा में फ्रेश पानी की जरूरत होती है. इसका इस्तेमाल डेटा सेंटर में लगी मशीनों को ठंडक देने के रूप में किया जाता है.

इस बीच संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट आई है, जिसने दुनिया के लिए जल पर आने वाले संकट को लेकर चिंता बढ़ा दी है. इस रिपोर्ट के अनुसार, साल 2030 तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटर करीब 130 करोड़ लोगों के हिस्से का पानी अपने लिए इस्तेमाल करता हुआ दिखेगा. मतलब कि ये डेटा सेंटर अरबों लीटर पानी पीएंगे और इससे मनुष्य को पानी की परेशानी हो सकती है. अब सवाल यह है कि क्या दुनिया में आएगा जल संकट? क्या 130 करोड़ लोगों के हिस्से का पानी पी जाएंगे AI के डेटा सेंटर? आइए जानते हैं कि क्या कहती है यूएन की यह रिपोर्ट और इसके साथ ही जानेंगे कि दुनिया में सबसे अधिक किस देश में एआई डेटा सेंटर हैं और इस नजरिये से भारत की क्या स्थिति है. इसकी शुरुआत हम देश की राजधानी दिल्ली में भू जल स्तर की तेजी से गिरावट के साथ करेंगे.

पिछले 5 वर्षों में 4.50% नीचे आया दिल्ली का भू जल

देश-दुनिया में बढ़ते प्रदूषण और तेजी के साथ बढ़ती आबादी कई देशों में भू जल के स्तर को तेजी से और नीचे करती हुई दिख रही है. हम यहां दुनिया की नहीं बल्कि अपने ही देश की राजधानी नई दिल्ली की बात करेंगे. बीते दिनों केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में एक रिपोर्ट पेश की थी. इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि पिछले पांच वर्षों में देश की राजधानी दिल्ली में भू-जल करीब साढ़े चार मीटर से अधिक नीचे चला गया है. जानकारी के अनुसार, वर्ष 2020 में दिल्ली की जनसंख्या करीब दो करोड़ थी, तब जमीन की सतह से 64.1 मीटर नीचे पानी मिल जाता था, लेकिन अब इसका स्तर और नीचे चला गया है. रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में दिल्ली में भू-जल का स्तर गिरकर 68.69 मीटर पर हो गया है. साल 2025 में दिल्ली की जनसंख्या करीब 2 करोड़ 22 लाख से अधिक हो गई है.

रिपोर्ट और आंकड़ों के अनुसार, 2020 में दिल्ली में भू जल जमीन स्तर से 64.1 मीटर नीचे मिल जाता था. वहीं 2021 में यह 65.67 मीटर, 2022 में 67.64 मीटर, 2023 में 67.41 मीटर, 2024 में 68.26 और 2025 में 68.69 मीटर नीचे चला गया है. दिल्ली में घटते इस भू जल स्तर के पीछे की वजह बढ़ती आबादी बताई गई है. अब जल को कम करने के लिए एक नई चुनौती के रूप में एआई डेटा सेंटर का नाम आ रहा है. भारत में कई जगहों पर एआई डेटा सेंटर बने हैं और इससे अधिक आने वाले समय में बनाने के कार्यक्रम है. ये सेंटर देश के लोगों के लिए पानी की कमी को बढ़ा सकते हैं. अब आइए यूएन की उस रिपोर्ट पर नजर डालते हैं जिसमें संभावना जताई गई है कि दुनिया में साल 2030 तक एआई डेटा सेंटर करीब 130 करोड़ लोगों के पीने के पानी के बराबर पानी का इस्तेमाल करेंगे.

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यूएन की रिपोर्ट में चौंकाने वाली बातें (वर्ष 2030 तक के अनुमान)

945 टेरावॉट-घंटे बिजली की खपत करेंगे AI डेटा सेंटर

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय के जल, पर्यावरण और स्वास्थ्य संस्थान (UNU-INWEH) के द्वारा एक रिपोर्ट जारी की गई है. इसमें एआई, पर्यावरण और प्रदूषण को लेकर कई चौंकाने वाली बातें कहीं गई हैं. फिलहाल हम यहां इस रिपोर्ट के जरिए दुनिया में एआई के डेटा सेंटर से जल संकट की ओर बढ़ती संभावनाओं की बात कर रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण भूमि, जल और जलवायु पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ रहे हैं, जो इस तकनीक की तीव्र और तेजी से बढ़ती ऊर्जा खपत से उत्पन्न हो रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने UNU-INWEH की एक नई रिपोर्ट में तत्काल, बहु-हितधारक कार्रवाई का आह्वान किया है.

इस रिपोर्ट के अनुसार, अनुमान है कि 2030 तक एआई को पावर देने वाले ग्लोबल डेटा सेंटर 945 टेरावॉट-घंटे बिजली की खपत करेंगे. यह पाकिस्तान, बांग्लादेश और नाइजीरिया की संयुक्त वार्षिक बिजली खपत का लगभग तीन गुना है.

130 करोड़ लोगों की जरूरत के बराबर पानी का इस्तेमाल

इस रिपोर्ट में दुनिया भर में एआई सेंटर के द्वारा यूज होने वाले पानी को लेकर बड़ा चौंकाने वाला अनुमान लगाया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक ग्लोबल एआई डेटा सेंटर करीब 9.3 ट्रिलियन लीटर पानी का इस्तेमाल करेंगे. रिपोर्ट में बताया गया है कि ये पानी इतने ज्यादा हैं कि इनसे अफ्रीका महाद्वीप के सभी 130 करोड़ लोगों की सालभर की पानी की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है.

रिपोर्ट के अनुसार, “2030 में डेटा-सेंटर की बिजली से जुड़ा पानी का इस्तेमाल (water footprint), सब-सहारा अफ्रीका के 1.3 अरब लोगों की सालाना घरेलू पानी की बुनियादी जरूरतों के बराबर होगा.”

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रिपोर्ट की अन्य बड़ी बातें

रिपोर्ट में बताया गया है कि अनुमानित दैनिक ChatGPT प्रॉम्प्ट्स (2.5 बिलियन), जो एक ही प्रोडक्ट के लिए सालाना लगभग 383 GWh बिजली की खपत के बराबर हैं. रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि 2030 तक AI से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक कचरे का अनुमानित सालाना स्तर, जो हर साल लगभग 250 एफिल टावर फेंकने के बराबर होगा. ये करीब 2.5 मिलियन टन होंगे.

वहीं, साल 2030 में डेटा-सेंटर की बिजली की खपत से होने वाले कार्बन फुटप्रिंट की भरपाई के लिए लगभग 6.7 अरब पेड़ों को 10 साल तक उगाना होगा—यह संख्या यूनाइटेड किंगडम में मौजूद अनुमानित पेड़ों की संख्या से लगभग दोगुनी है.

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दुनिया में सबसे अधिक किस देश में एआई डेटा सेंटर?

अब बात करते हैं कि दुनिया में सबसे अधिक किस देश में एआई डेटा सेंटर हैं. जी हां, एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में सबसे अधिक एआई डेटा सेंटर अमेरिका में हैं. AI डेटा सेंटर्स के मामले में अमेरिका दुनिया में सबसे आगे है और ताइवान की एक फाउंड्री इनमें लगने वाली ज्यादातर चिप्स बनाती है. अमेरिका में कुल 5,427 एआई डेटा सेंटर्स हैं, जो किसी भी दूसरे देश के मुकाबले करीब दस गुना से अधिक हैं. इन सेंटरों में अमेरिका में किसी भी दूसरे क्षेत्र के मुकाबले अधिक एनर्जी की खपत होती है.

अमेरिका के बाद सबसे अधिक एआई डेटा सेंटर जर्मनी के पास हैं. इसके पास कुल 529 डेटा सेंटर हैं. 523 की संख्या के साथ यूके तीसरे स्थान पर, 449 के साथ चीन चौथे और 337 डेटा सेंटर के साथ पांचवें स्थान पर कनाडा है.

भारत में कितने डेटा सेंटर?

अब बात भारत में एआई डेटा सेंटर की करते हैं. दुनिया के साथ-साथ भारत भी तकनीक और एआई के मामले में अपने आप को काफी मजबूत कर रहा है. इस साल की शुरुआत यानी कि फरवरी में भारत में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट का आयोजन भी किया गया था. इसमें एआई से निर्मित कई टेक्नोलॉजी को प्रदर्शित किया गया और आने वाले दिनों में एआई के क्षेत्र में दुनिया में भारत की भूमिका को और अधिक मजबूत करने के लिए कई चर्चाएं हुईं थीं. आप इस बात से ही अंदाजा लगा सकते हैं कि भारत की राजधानी दिल्ली में आयोजित इस एआई समिट में 20 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्ष, 60 मंत्री और 500 से अधिक ग्लोबल एआई के नेतृत्व कर्ता शामिल हुए थे.

भारत में एआई का खास महत्व भी है. इसका इस्तेमाल आज शिक्षा क्षेत्र में, हेल्थकेयर सेक्टर में, कृषि सेक्टर में, फाइनेंस और कॉमर्स क्षेत्र में, शासन और पब्लिक सेक्टर समेत अन्य क्षेत्रों में किया जा रहा है. इस वजह से देश में आय दिन एआई डेटा सेंटर की संख्या भी बढ़ाने की बात कही जा रही है. एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अभी 150 से अधिक एआई डेटा सेंटर हैं. एआई इंडेक्स रिपोर्ट 2026 की बात करें तो इसमें भारत के पास कुल 153 एआई सेंटर होने की बात कही गई है. हालांकि, इनमें से अभी कई सेंटरों को और भी मजबूत बनाने का काम हो रहा है.

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