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SC का आदेश- नाबालिग और बेदाग छात्र होंगे रिहा, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल सबूत रखें सुरक्षित

by Sanjay Kumar Srivastava 28 July 2026, 2:02 PM IST (Updated 28 July 2026, 2:03 PM IST)
28 July 2026, 2:02 PM IST (Updated 28 July 2026, 2:03 PM IST)
सुप्रीम कोर्ट का आदेश- नाबालिग और बेदाग छात्र होंगे रिहा, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने के निर्देश

NEET PROTEST: दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर संसद मार्च के दौरान गिरफ्तार प्रदर्शनकारी छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 18 साल से कम उम्र के और बिना किसी आपराधिक रिकॉर्ड वाले प्रदर्शनकारी छात्रों को रिहा करने का आदेश दिया है. साथ ही, कोर्ट ने अधिकारियों से NEET पेपर लीक को लेकर हाल ही में हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने को कहा.

कई अंतरिम निर्देश भी जारी

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि छात्रों के खिलाफ पुलिस की ज्यादती के आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए. प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की बर्बरता के आरोपों वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कई अंतरिम निर्देश जारी किए. जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना वाली बेंच ने उन सभी राज्यों को, जहां विरोध-प्रदर्शन हुए थे, निर्देश दिया कि वे प्रदर्शनों से जुड़े CCTV फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी-कैमरा फुटेज, वायरलेस कम्युनिकेशन रिकॉर्ड, PCR लॉग और अन्य डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखें. कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि प्रदर्शनकारियों के बारे में इकट्ठा किया गया कोई भी डिजिटल डेटा सुरक्षित रखा जाए, लेकिन उसे सार्वजनिक न किया जाए.

छह राज्यों के मुख्य सचिवों से मांगा जवाब

बेंच ने अधिकारियों को प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई भी कठोर कार्रवाई करने से रोक दिया, लेकिन यह भी कहा कि यह सुरक्षा उन लोगों को नहीं मिलेगी जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है. बेंच ने दिल्ली सरकार को दर्ज FIR की जांच जारी रखने की अनुमति दी, लेकिन कहा कि कार्यवाही के दौरान योग्य प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए. पीठ ने याचिकाओं में उठाए गए आरोपों पर दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, केरल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों से भी जवाब मांगा.

हिंसा की सभी घटनाओं की हो निष्पक्ष जांच

सीजेआई ने कहा कि आरोप प्रथम दृष्टया निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच पर विचार करने लायक हैं, जिसमें 200 से अधिक घायल पुलिस कर्मियों के परिवारों की चिंताओं का भी समाधान होना चाहिए. पीठ ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा की सभी घटनाओं की निष्पक्ष, पारदर्शी और गहन जांच सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र समिति या विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने पर विचार करने से पहले केंद्र और संबंधित राज्यों को अपने बयान रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया गया है. शुरुआत में अदालत ने पूछा कि पुलिस ज्यादती के आरोपों की स्वतंत्र जांच क्यों नहीं होनी चाहिए. पीठ ने कहा कि जिसने भी ज्यादती की, कानून अपने हाथ में लिया, उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए.

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News Source: PTI

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