Home Latest News & Updates दुधवा की बेटी भवानी नहीं होगी बेघर: ‘लाइव टाइम्स’ की मुहिम लाई रंग, खुले आसमान में ही रहेगी योगी की लाडली

दुधवा की बेटी भवानी नहीं होगी बेघर: ‘लाइव टाइम्स’ की मुहिम लाई रंग, खुले आसमान में ही रहेगी योगी की लाडली

by Rajeev Ojha 28 July 2026, 6:33 PM IST (Updated 28 July 2026, 6:34 PM IST)
28 July 2026, 6:33 PM IST (Updated 28 July 2026, 6:34 PM IST)
दुधवा की बेटी भवानी नहीं होगी बेघर: 'लाइव टाइम्स' की मुहिम लाई रंग, खुले आसमान में ही रहेगी CM योगी की लाडली

Dudhwa Park: दुधवा की धरती पर जन्मी अनाथ शिशु हथिनी भवानी अब बेघर नहीं होगी. वह दुधवा की प्राकृतिक हरियाली के बीच अपने झुंड के साथ ही रहेगी. विरोध के बाद उसे चिड़ियाघर शिफ्ट करने का फैसला शासन ने वापस ले लिया है. यह मुद्दा सबसे पहले ‘लाइव टाइम्स’ ने उठाया था. इस बेबी हथिनी का नामकरण खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था. सामाजिक कार्यकर्ता एवं हाईकोर्ट के अधिवक्ता एसएम हैदर रिज़वी ने यह मुद्दा उठाया.

मिलता रहेगा इरशाद का स्नेह

उनका कहना था कि अनाथ बेबी हथिनी भवानी पुनः एक अन्यायपूर्ण विछोह की पीड़ा झेलने को विवश है. जिस Surrogate हथिनी दुर्गा ने उसे अपनाया, जिस महावत इरशाद अली ने उसे मातृत्व समान स्नेह दिया, उससे अलग कर उसे चिड़ियाघर की कैद में भेजना न केवल अमानवीय है, बल्कि संविधान प्रदत्त जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का भी घोर उल्लंघन है. उन्होंने मांग की कि भवानी से उसका प्राकृतिक परिवेश न छीना जाए. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और पशु कल्याण नियमावली में स्पष्ट निर्देश है कि किसी जीव को उसके स्वाभाविक आवास से जबरन हटाना, उसकी शारीरिक मानसिक सुरक्षा पर आघात है. दुधवा की हरियाली, उसके झुंड का अपनापन और महावत का वात्सल्य, यही भवानी का वास्तविक घर है. उसे चिड़ियाघर की दीवारों में कैद करना, उसके जीवन की धारा को रोकना है. भवानी को दुधवा में ही रहने दिया जाए. यह केवल एक हथिनी की रक्षा नहीं, बल्कि हमारी संवैधानिक आत्मा और मानवीय करुणा की रक्षा भी है.

दुधवा में कुल 25 हाथी

‘लाइव टाइम्स’ ने यह मुद्दा उठाया तो मामला शासन के संज्ञान में आया. प्रमुख सचिव वन ने अधिवक्ता एसएम हैदर रिज़वी को अवगत कराया कि बेबी हथिनी को दुधवा से शिफ्ट नहीं किया जाएगा. यूपी के लखीमपुर खीरी जिले में स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व में वर्तमान समय में कुल 25 राजकीय हाथी हैं, जिनका इस्तेमाल वन विभाग द्वारा अलग-अलग जरूरी कामों में किया जाता है. इनमें जंगल सफारी के दौरान पर्यटन, गैंडों की निगरानी, वन्य जीवों का रेस्क्यू और मानसून में संवेदनशील इलाकों की गश्त और वन सुरक्षा जैसे काम शामिल हैं. इनमें चार नर हाथी नकुल, गजराज, भास्कर और विनायक यहां की खास पहचान बन चुके हैं. ये हाथी कई महत्वपूर्ण कामों में वन विभाग की मदद करते हैं.

पार्क में हैं कई जानवर

दुधवा आने वाले पर्यटक भी इन हाथियों को देखने के लिए उत्सुक रहते हैं. वैसे दुधवा नेशनल पार्क में बाघ, एक सींग वाले गैंडे और बारहसिंगा जैसे कई प्रमुख जंगली जानवर पाए जाते हैं. पार्क में स्तनधारी, पक्षी और रेंगने वाले जीवों की समृद्ध विविधता भी है. दुधवा राष्ट्रीय उद्यान घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से मार्च के बीच का होता है, क्योंकि इस दौरान मौसम सुहावना होता है और जानवर आसानी से दिखाई देते हैं. आधिकारिक तौर पर यह पार्क हर साल 15 नवंबर से 15 जून तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है.

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