MPSC Protest: पुणे में उम्मीदवारों के 11 दिन के विरोध-प्रदर्शन और इस्तीफे की मांग के बाद, महाराष्ट्र सरकार ने MPSC (महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग) के चेयरमैन विवेक भीमन्वार को कथित पेपर लीक मामले की जांच पूरी होने तक अनिवार्य छुट्टी पर भेज दिया है. यह फैसला पुणे के एस.एम. जोशी ब्रिज पर NCP (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन में एक अहम मोड़ है. सरकार के फैसले के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपना आंदोलन फिलहाल रोकने का फैसला किया है.
राज्य मंत्री ने दिलाया भरोसा
राज्य मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने प्रदर्शनकारी उम्मीदवारों से मुलाकात की और घोषणा की कि आंदोलन के सिलसिले में छात्रों के ख़िलाफ दर्ज मामले वापस ले लिए जाएंगे. उन्होंने उन्हें यह भी भरोसा दिलाया कि MPSC पेपर लीक मामले में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. MPSC (महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग) के उम्मीदवारों के साथ बैठक के बाद ANI से बात करते हुए महाराष्ट्र के मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने कहा, “MPSC को लेकर एक सकारात्मक रुख अपनाया गया है. समिति को बस कुछ तकनीकी बदलाव करने थे. हमने वे बदलाव तैयार कर लिए हैं और अब उन्हें ही सौंपा जा रहा है.”
जांच समिति में तुकाराम मुंडे भी शामिल
इससे पहले, X पर एक पोस्ट में भीमन्वार ने लिखा, “राज्य सरकार ने MPSC पेपर लीक मामले की न्यायिक जांच की घोषणा की है. मैंने अपनी पूरी जिदगी में हमेशा नैतिकता को प्राथमिकता दी है. इसलिए, मैंने फैसला किया है कि जब तक यह जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस पद पर काम करने के बजाय मैं छुट्टी पर रहूंगा.” उन्होंने आगे कहा, “MPSC की स्वायत्तता, विश्वसनीयता और छात्रों के हित हमेशा मेरी प्राथमिकता रहे हैं और भविष्य में भी रहेंगे.” सरकार ने MPSC से जुड़े मामले की जांच के लिए बनाई गई समिति का सचिव वरिष्ठ IAS अधिकारी तुकाराम मुंडे को भी नियुक्त किया है.
हालांकि छात्रों ने मुख्य रूप से भीमन्वार के इस्तीफे की मांग की थी, लेकिन जांच पूरी होने तक उन्हें ऑफिस से दूर रखने के सरकार के फैसले के कारण आंदोलन को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है. बातचीत के दौरान उनके इस्तीफे की मांग ही विवाद का मुख्य मुद्दा बनी हुई थी. यह बयान पुणे में MPSC के उम्मीदवारों के चल रहे उस विरोध-प्रदर्शन के बीच आया है, जिसमें वे परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और आयोग से जुड़े अन्य मुद्दों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
क्या है पूरा मामला
22 मार्च को हुई स्क्रीनिंग परीक्षा में कथित गड़बड़ी की शिकायतों के बाद MPSC ने शुरुआती जांच शुरू की थी. आयोग ने 29 जुलाई, 2025 को ड्रग इंस्पेक्टर पद के लिए विज्ञापन जारी किया था. स्क्रीनिंग परीक्षा 22 मार्च को महाराष्ट्र के छह डिविजनल हेडक्वार्टर में ऑफलाइन आयोजित की गई थी और इसका नतीजा 12 जून को घोषित किया गया था. स्क्रीनिंग परीक्षा के बाद, 506 उम्मीदवार इंटरव्यू के लिए योग्य पाए गए. इनमें से 488 उम्मीदवारों के इंटरव्यू 1 जुलाई से 22 जुलाई के बीच आयोजित किए गए.
इंटरव्यू पूरे होने के बाद, आयोग ने 488 उम्मीदवारों की एक प्रोविजनल जनरल मेरिट लिस्ट जारी की, जिसमें पद के लिए 485 योग्य और तीन अयोग्य उम्मीदवार शामिल थे. इस बीच, 22 जुलाई से 26 जुलाई के बीच, आयोग को उम्मीदवारों और जन-प्रतिनिधियों से ईमेल के जरिए शिकायतें मिलीं, जिनमें 22 मार्च की स्क्रीनिंग परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया था. शिकायतों में आरोप लगाया गया कि कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले, यानी 20 मार्च को ही प्रश्न-पत्र या सवाल मिल गए थे और बाद में उन्हें सोशल मीडिया या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए फैलाया गया था. परीक्षा में गड़बड़ियों के बाद MPSC ने इस पद के लिए पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी.
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News Source: ANI
