‘कोई कहता था समुंदर हूं मैं…’ पढ़ें कैफी आजमी के शानदार शेर

'कोई कहता था समुंदर हूं मैं...' पढ़ें कैफी आजमी के शानदार शेर

'कोई कहता था समुंदर हूं मैं...' पढ़ें कैफी आजमी के शानदार शेर.

गर डूबना ही अपना मुकद्दर है तो सुनो,
डूबेंगे हम जरूर मगर नाख़ुदा के साथ.

अपना मुकद्दर

बेलचे लाओ खोलो जमीं की तहें,
मैं कहां दफ्न हूं कुछ पता तो चले.

बेलचे लाओ

कोई कहता था समुंदर हूं मैं,
और मिरी जेब में कतरा भी नहीं.

समुंदर हूं

बहार आए तो मेरा सलाम कह देना,
मुझे तो आज तलब कर लिया है सहरा ने.

मेरा सलाम

इतना तो जिंदगी में किसी के खलल पड़े,
हंसने से हो सुकून न रोने से कल पड़े.

जिंदगी में

जो इक खुदा नहीं मिलता तो इतना मातम क्यूं,
यहां तो कोई मिरा हम-जबां नहीं मिलता. 

खुदा नहीं मिलता

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