Introduction
30 December, 2025
Gold in 2025: साल 2025 की विदाई हो रही है. वैसे, साल कोई भी हो, जाते वक्त इंसान दो चीजों का कैलकुलेशन जरूर करता है. पहला, नए साल में क्या कर सकता है और दूसरा, इस साल उसने क्या हासिल किया. 21वीं सदी में जब हर बात पैसों से ड्राइव होती है तो, इस कैलकुलेशन के केंद्र में भी पैसा तो पक्का है. वहीं, अगर आप पैसे का हिसाब-किताब लगाएंगे तो, बात इन्वेस्टमेंट तक पहुंच ही जाएगी. फिर कौन से निवेश ने किसे कितना फायदा पहुंचाया, किसने किसको डुबाया, ये सारी बातें जहन में आती है. इन्हीं बातों के बीच अगर आप 2025 में फायदे वाले इन्वेटमेंट की चर्चा करें तो, आपको सबसे ऊपर वो Precious metal नजर आएगा, जो निवेश का सदियों पुराना तरीका रहा है. 2025 में भी वो सबसे सेफ ठिकाना साबित हुआ. जब दुनियाभर की अर्थव्यवस्था उथल-पुथल हो रही थी, तब सोने और चांदी ने ही इन्वेस्टर्स के लिए सेफ्टी नेट का काम किया. लोगों को गोल्ड और सिल्वर ने सिर्फ सेफ्टी नहीं, बल्कि बंपर मुनाफा भी दिया.
Table of Content
- गोल्डन ईयर का ग्राफ
- तीन हिस्सों में समझें
- 5 सालों में चांदी का सफर
- इन्वेस्टर्स की नज़र
- फायदा ही फायदा
- क्यों भागा सोना?
- आसान ऑप्शन
- लॉन्ग टर्म विजन
- इंडस्ट्रियल डिमांड
- ऑलटाइम हाई
- इन बातों को रखें ध्यान
गोल्डन ईयर का ग्राफ
1 जनवरी 2025 को 24 कैरेट वाले 10 ग्राम सोने का रेट था 78 हजार रुपया.
1 फरवरी को सोने का दाम पहुंचा, 84 हजार रुपये पर.
1 मार्च को 86 हजार 620 रुपये.
1 अप्रैल को 92 हजार 840 रुपये.
1 मई को 95 हजार 730 रुपये.
1 जून को 97 हजार 310 रुपये.
1 जुलाई को 98 हजार 400 रुपये.
1 अगस्त को 99 हजार 820 रुपये.
1 सितंबर को पहली बार एक लाख को पार किया और प्राइज 1 लाख 5 हजार 880 रुपये तक पहुंच गया.
1 अक्टूबर को 1 लाख 19 हजार 240 रुपये.
1 नवंबर को 1 लाख 23 हजार रुपये.
1 दिसंबर को 1 लाख 30 हजार 480 तक पहुंच गया.
15 दिसंबर को 24 कैरेट सोने का भाव 1 लाख 37 हजार 600 के लाइफटाइम हाई पर पहुंच गया था.

तीन हिस्सों में समझें
जब मार्च से मई तक कीमतें 90 और 95 हजार के बीच झूलती रहीं तो, जुलाई का महीना अचानक सोने के इतिहास में स्वर्णम साबित हुआ. पहली बार सोना प्रति 10 ग्राम एक लाख रुपये के रेट को पार कर गया. ये वो मनोवैज्ञानिक या साइकोलॉजिकल लेवल, जिसे सोने ने पहली बार तोडा था. ये बाजार के लिए एक बहुत बड़ी घटना थी. जुलाई की तेजी के बाद सोना थोड़ा सुस्ताया, लेकिन कोई बड़ी गिरावट नहीं आई. इसके बाद आया अक्टूबर का महीना, जो भारत में त्योहारों के लिए रिजर्व रहता है. दीवाली और धनतेरस की मांग ने कीमतों में आग में घी का काम किया. अक्टूबर में भारी खरीदारी के चलते सोने ने अपना पिछला सारा रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया. त्योहारी सीजन में सोने ने एक लाख 15 हजार के लेवल को पार करके नया ऑलटाइम हाई और रिकॉर्ड बना दिया. इसके बाद शादियों के सीजन की डिमांड ने इस तेजी को और हवा दी. फिर आया साल का आखिरी दिसंबर का महीना. शुरुआत जानदार थी और अंत भी धमाकेदार है. जब सोने के दाम ने 15 दिसंबर को अपने अब तक के शिखर को छुआ. सोने के इस गोल्डन रिकॉर्ड ने सालों से सोने के कारोबार में जुटे लोगो को भी हैरान किया है. माना जा रहा है कि, सोना 2026 में ढाई लाख तक पहुंच सकता है तो, चांदी 2025 में ही 2 लाख को पार कर गई है. यानी सिर्फ 5 सालों के सफर में चांदी दो लखटकिया बन गई.
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5 सालों में चांदी का सफर
2020 में एक किलो चांदी की कीमत 60 हजार रुपये थी.
कोरोना की वजह से थोड़ा वक्त लगा और 2021 और 22 में चांदी ने कुछ खास तेजी नहीं पकड़ पाई.
लेकिन फिर 2023 में चांदी ने 70 हजार रुपये के रेट को पार कर दिया.
2024 में चांदी 80 हजार रुपये और उसी साल 90 हजार रुपये के लेवल को भी टच कर गई.
2025 में चांदी की कीमत 1 लाख भी पहुंची और 2 लाख रुपये के पार भी.
इन्वेस्टर्स की नज़र
17 दिसंबर को पहली बार चांदी ने 2 लाख रुपए प्रति किलो के रेट को पार करके 200750 रुपए पर ओपन हुई. उसके बाद रेट थोड़े डाउन जरूर हुए लेकिन कमोबेश आसपास ही बने रहे. चांदी की चमत्कारी चाल का अंदाजा आप इस आंकडे से लगा सकते हैं कि, 18 मार्च 2025 को चांदी पहली बार 1 लाख रुपए पर पहुंची थी. यानी चांदी को 1 लाख से 2 लाख रुपए प्रति किलो तक पहुंचने में सिर्फ 9 महीने का समय लगा, जबकि इसे 50 हजार से 1 लाख रुपए तक पहुंचने में 14 साल लगे थे. वैसे, बुलियन मार्केट में सोने और चांदी के लिए एक कहावत मशहूर है कि, सोने की चाल में स्टेबिलिटी होती है, लेकिन चांदी के भाव में चंचलता. स्टॉक मार्केट की भाषा में चंचलता का मतलब है VOLATILITY. यानी चांदी बहुत तेजी से कभी ऊपर तो कभी नीचे जाती है. वहीं, सोना धीरे-धीरे अपने भाव बढ़ाता रहता है. हालांकि, साल 2025 में सोने और चांदी की कीमतें तेज रफ्तार से एक-दूसरे को चुनौती देती रही. आखिरकार चांदी ने इस साल इन्वेस्टर्स को सोने से ज्यादा रिटर्न दिया है.
फायदा ही फायदा
चांदी ने इस साल सोने से करीब-करीब दोगुनी रफ्तार से प्रोफिट बनाकर दिया है. खास बात ये भी कि चांदी ने ना सिर्फ इस साल तेजी पकड़ी बल्कि, उसी चाल को बरकरार भी रखा. कुल मिलाकर सोने और चांदी के इन्वेस्टर्स के लिए साल 2025 शानदार साबित हुआ है. साल 2025 को अगर हम सोने का साल कहें तो बिल्कुल गलत नहीं होगा. शेयर बाजार और यहां तक कि म्युचुअल फंड के भी निगेटिव रिटर्न के बीच जिस एसेट क्लास ने निवेशकों को सबसे ज्यादा सेफ्टी और मोटा मुनाफा दिया, वो सोना-चांदी ही हैं. साल की शुरुआत से लेकर दिसंबर के इस हफ्ते तक सोने की कीमतों ने एकतरफा तेजी दिखाई है. MCX पर सोने का भाव जिस तरह से बढ़ा, उसने पिछले सारे अनुमानों को ध्वस्त कर दिया. यही वजह है कि आम लोगों का अब भी सोने में भरोसा बना हुआ है.

क्यों भागा सोना?
सोने के भागने की सबसे पहली वजह है, जिओपॉलिटिकल टेंशन. दरअसल, दुनिया में इस वक्त कई मोर्चे पर वॉर या वॉर का तनाव है. चाहे इजरायल और हमास का युद्ध हो या फिर रूस और यूक्रेन का युद्ध हो, ये सब 3 सालों से ज्यादा वक्त से जारी है. हाल ही में थाईलैंड और कंबोडिया का युद्ध हुआ. इससे अलग भी दुनिया के कई और क्षेत्रों में युद्ध का तनाव है. डोनाल्ड ट्रंप बार-बार 8 युद्ध रुकवाने का दावा करते हैं. खुद अमेरिका की ही वेनेजुएला के साथ टेंशन बढ़ रही है. ऐसे में जब भी दुनिया में युद्ध या पॉलिटिकल टेंशन बढ़ती है, या आर्थिक अस्थिरता बढ़ती है, तो इन्वेस्टर्स सेफ इन्वेस्टमेंट की तरफ भागते हैं और सोना निवेश का सबसे सुरक्षित तरीका रहा है. यही 2025 में सोने की मांग और दाम दोनों में तेजी का सबसे बड़ा कारण बना.
दूसरा कारण
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की टैरिफ वॉर ने दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था को टेंशन में डाल दिया. हालांकि, बड़े सहयोगी होने के बावजूद अमेरिका ने भारत के खिलाफ सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा टैरिफ लगाने का फैसला किया. पहले अप्रैल महीने में और फिर अगस्त में. इस वजह से भी भारत की इकॉनमी प्रभावित हुई. तब से शेयर बाजार में भी लगातार गिरावट का दौर जारी है. यहां तक कि म्युचुअल फंड में इस साल निगेटिव रिटर्न तक मिले हैं. इस डर के माहौल ने भी निवेशकों को सेफ इन्वेस्टमेंट यानी सोने की तरफ अट्रैक्ट किया.

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तीसरा कारण
जब से डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका की सत्ता में आए हैं, तब से डॉलर इंडेक्स में कमजोरी देखी जा रही है. वैसे, यहां डॉलर और रुपये का कम्पैरिज़न नहीं हो रहा, बल्कि डॉलर इंडेक्स की बात हो रही है. इसमें डॉलर की तुलना कुछ यूरोपीय देशों की करेंसी और जापान जैसे देशों की करेंसी से होती है. जहां ट्रंप की ऊलजलूल नीतियों के चलते डॉलर कमजोर हो रहा है. ऊपर से अमेरिका के ऊपर बढ़ता कर्ज, जो उसकी जीडीपी से भी ज्यादा पहुंच चुका है. इसकी एक वजह ये भी रही कि ब्रिक्स जैसे संगठनों ने अपनी करेंसी में ट्रेड करने की पहल शुरू कर दी.
चौथा कारण है
कई देशों के सेंट्रल बैंकों ने जमकर सोने की खरीदारी शुरू कर दी. चाहे बैंक ऑफ इंग्लैंड हो या अमेरिका का फेडरल बैंक. इसके अलावा चीन, जापान, पोलैंड जैसे कई देशों कें फेडरल बैंक ने लगातार सोना खरीदा है. ऐसा इसलिए क्योंकि कई दूसरे देशों ने अमेरिका के ट्रेजरी बॉण्ड में बहुत बडे़ पैमाने पर निवेश कर रखा है. ये आंकड़ा ट्रिलियन डॉलर में है. इन सबके बीच उन देशों को डॉलर के कमजोर होने की आशंका हो रही है. इस वजह से वो अमेरिका से अपना पैसा निकालकर सोने में सुरक्षित निवेश के नाम पर लगा रहे हैं. इन सबके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये में रिकॉर्ड कमजोरी ने भी भारत में सोने की कीमतों में बढ़ोतरी को बल दिया. दरअसल, सोने का भाव डॉलर में तय होता है. लिहाजा जब भी रुपया कमजोर होता है तो, भारत में सोना और महंगा हो जाता है. यानी उतना ही सोना खरीदने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ते हैं.
आसान ऑप्शन
एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ETF सोने में इनवेस्ट करने का बढ़िया तरीका है. पहले सोने में निवेश का मतलब था दुकानों पर जाकर फिजिकल गोल्ड खरीदना. लेकिन हाल के महीनों में इटीएफ काफी पॉपुलर हुए हैं. इसी बीच सोने के भाव में तेजी आई तो लोग अपने घर बैठे स्टॉक की तरह डिमैट अकाउंट से गोल्ड ईटीएफ या सिल्वर ईटीएफ में जमकर निवेश कर रहे हैं. इसने भी सोने-चांदी के भाव को आसमान पर पहुंचा दिया. इसमें एक फैक्टर FOMO भी रहा, जिसने सोने के दाम को दौड़ाया. FOMO का मतलब Fear of Missing out है. यानी रेट जब भाग रहा है, तो हम कहीं पीछे ना रह जाएं. ग्राहकों को लगता है कि कहीं सोने का दाम और ज्यादा ना बढ़ जाए, इसलिए वो बगैर सही भाव देखे खरीदारी के लिए निकल पड़ते हैं. इस बार भी लोगों ने इसी FOMO में आकर प्रीमियम पर जाकर खरीदारी की. प्रीमियम मतलब एक्चुअल प्राइस से 5-10 फीसदी ऊपर पर खरीदना.

लॉन्ग टर्म विजन
अब सबसे बड़ी बात ये कि सोना में अभी भी लॉन्ग टर्म में मोमेंटम बरकरार है. सोने की कीमतों को लेकर निवेशकों के लिए वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के सीईओ डेविड टैट ने एक हिंट दिया है, जिसके मुताबिक सोने की मौजूदा तेजी किसी एक जंग की वजह से नहीं, बल्कि गहरे और लंबे वक्त तक रहने वाले आर्थिक कारणों से जुड़ी है. इसमें सबसे बड़ा कारण है, दुनिया भर में लिया जा रहा कर्ज. इसे बेतरतीब तरीके से खर्च किया जा रहा है. उसे कंट्रोल करने में ज्यादातर देश नाकाम साबित हो रहे हैं, जिससे इकॉनमी कमजोर हालत में पहुंच रही है. इस हालात को आप भारत और अमेरिका जैसे देशों से जोड़कर भी समझ सकते हैं. ये एक बडी़ वजह बनी हुई है, जिससे आने वाले सालों में गोल्ड की चमक और तेज हो सकती है. अब सोने का दाम और कितना भाग सकता है, ये भी एक बड़ा सवाल है. कहा जा रहा है कि 2030 तक सोना 3 लाख के पार चला जाएगा. 2026 तक सोना 2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल को छू सकता है. अब थोड़ा चांदी की चमत्कारी चाल के चार कारण भी समझ लेते हैं.
इंडस्ट्रियल डिमांड
चांदी के प्राइज बढ़ने के पीछे सबसे पहला कारण है इंडस्ट्रियल डिमांड. दरअसल, चांदी सिर्फ गहने बनाने के काम में नहीं आती, बल्कि इसकी इंडस्ट्रियल डिमांड भी बढ़ता जा रहा है. आज के दौर में सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स और EV में चांदी का भारी इस्तेमाल हो रहा है. यानी अब चांदी बिजनेस के लिए एक जरूरी कच्चा माल बन गई है.
दूसरी वजह
कम प्रोडक्शन से मची होड़ चांदी की कीमतों में उछाल का दूसरा कारण है. इंडस्ट्रियल यूज में इस्तेमाल होने वाली चांदी रिसाइकल नहीं हो पाती. समझ लीजिए कि जितनी चांदी का इस्तेमाल हुआ, वो खत्म हो गई. यानी चांदी का हर साल जितना प्रोडक्शन हो रहा है. उसका एक बड़ा हिस्सा खपत भी होता जा रहा है. जबकि दुनिया में तेल, सोना और चांदी ये सब ऐसे कमोडिटी हैं, जो लिमिटेड हैं. वहीं, सोने की एक अच्छी चीज ये है कि वो एक हाथ से दूसरे हाथ में जाता रहता है, लेकिन खत्म नहीं होता. वहीं, इंडिस्ट्रियल डिमांड की वजह से मैन्यूफैक्चरर के बीच चांदी के स्टोरेज के लिए होड़ मच गई है, जो आने वाले दिनों में भी चांदी में तेजी बनाए रखेगी.
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तीसरी और चौथी वजह
तीसरा कारण है ट्रंप का टैरिफ ऑर्डर. अमेरिका दूसरे देशों को टैरिफ से डरा रहा है, जबकि अमेरिकी कंपनियां चांदी का भारी स्टॉक जमा कर रही हैं. ग्लोबल सप्लाई में कमी से भी कीमतें ऊपर चढ़ रही हैं. इसके अलावा चांदी में निवेश का आसान ऑप्शन मौजूद है और ये भी दाम बढ़ाने के कारणों में से एक है. निवेशक सोने की तरह चांदी में भी ETF के जरिए भरपूर इन्वेस्ट कर रहे हैं. इससे चांदी की डिमांड बढ़ रही है. कुल मिलाकर 2025 में सोना सिक्योरिटी की वजह से महंगा हुआ और चांदी इंडस्ट्रियल डिमाड प्लस इन्वेस्टमेंट की वजह से तेज भागी.
ऑलटाइम हाई
ऑलटाइम हाई के बाद फिर किसी-किसी दिन चांदी की कीमत में थोडी गिरावट भी दर्ज की गई है. पर फिर से चांदी 2 लाख के पार है और सोना 1 लाख 40 हजार रुपये के करीब बना हुआ है. ऐसे में अगर आप लॉन्ग टर्म निवेशक हैं तो आपको चिंता करने की जरुरत नहीं है. आने वाले दिनों में सोने और चांदी की चाल में तेजी बनी रहने वाली है. लॉन्ग टर्म निवेशकों को निवेश के लिए टाइमिंग की जरुरत नहीं होती. उनके लिए एक फॉर्मूला हमेशा फिट होता है कि any time is the right time. इस बीच अगर थोड़ी बहुत गिरावट नजर आती है, तो उसे मुनाफावसूली माना जा सकता है. कभी कीमतें थोड़ी ऊपर-नीचे हो सकती हैं. लेकिन ये परमानेंट डाउनफॉल नहीं हो सकता. एक्सपर्ट के मुताबिक निवेशकों को डरने की जरुरत नहीं है.

इन बातों को रखें ध्यान
सोना खरीदते वक्त निवेशकों को दो बातों का ख्याल रखना चाहिए. पहला- सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें. यानी हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड यानी BIS का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदना चाहिए. दूसरा- खरीदारी से पहले कीमतों को क्रॉस चेक जरूर करें. खरीद के दिन आप इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन यानी IBJS की वेबसाइट पर जाकर रेट को मैच कर सकते हैं. यहां आपको 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग सोने का भाव मिल जाता है.
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