Introduction
08 March, 2026
International Women’s Day Special: दुनियाभर में 8 मार्च का दिन इंटरनेशनल वुमन्स डे के रूप में मनाया जाता है. ये दिन उन आधी आबादी के स्ट्रगल, उनकी जीत और उनके हौसले को सलाम करने का है, जो हर दिन समाज की रूढ़ियों को तोड़कर एक नया इतिहास रचती हैं. 2026 तक आते-आते भारतीय सिनेमा ने महिलाओं को बेचारी वाली इमेज से बाहर निकालकर क्रांतिकारी बना दिया है. महिलाएं लाइफ के हर सेक्टर में अपनी ताकत का लोहा मनवा रही हैं. परदे पर जब कोई फीमेल कैरेक्टर अपने हक के लिए खड़ा होता है, तो वो सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि करोड़ों महिलाओं के लिए इंस्पिरेशन बन जाता है. ऐसे में इंडियन सिनेमा, जिसे अक्सर मेल डोमिनेटिंग माना जाता था, अब पूरी तरह बदल चुका है. आज की फिल्में सिर्फ मसाला और रोमांस ही नहीं दिखातीं, बल्कि वो उन फीमेल कैरेक्टर्स को परदे पर उतार रही हैं, जो खुद अपने भाग्य की विधाता हैं. साल 2026 तक आते-आते बॉलीवुड ने ऐसी कई फिल्में दी हैं, जिन्होंने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर धमाका किया, बल्कि सोसाइटी की सोच को भी झकझोर कर रख दिया. ऐसे में आज हम आपके लिए उन चुनिंदा फिल्मों की लिस्ट लेकर आए हैं, जिन्हें हर उस व्यक्ति को देखना चाहिए जो नारी शक्ति में भरोसा करते हैं.
Table of Content
- क्वीन
- अस्सी
- गंगूबाई काठियावाड़ी
- थप्पड़
- कहानी
- मर्दानी
- इंग्लिश विंग्लिश
- लापता लेडीज
- पीकू
- मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे

क्वीन
विकास बहल के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘क्वीन’ भारतीय सिनेमा की उन फिल्मों में से है, जिसने फीमेल सेंट्रिक मूवीज़ के मायने बदल दिए. कंगना रनौत ने इस फिल्म में ‘रानी’ का कैरेक्टर प्ले किया है जो, दिल्ली की एक बहुत सिंपल और मिडिल क्लास फैमिली की लड़की है. उसकी दुनिया उसके मंगेतर यानी राजकुमार राव के इर्द-गिर्द घूमती है. मगर शादी से ठीक एक दिन पहले उसकी शादी टूट जाती है, तो रानी की दुनिया उजड़ जाती है. फिल्म की खूबसूरती इस बात में है कि रानी घर में बैठकर आंसू बहाने के बजाय अकेले ही अपने हनीमून पर पेरिस और एम्स्टर्डम जाने का फैसला करती है. एक ऐसी लड़की जिसे सड़क पार करने में भी डर लगता था, वो विदेश की अनजान गलियों में खुद को ढूंढती है. वहां वो नए दोस्त बनाती है, अलग कल्चर को समझती है और जब भारत लौटती है, तो वो पहले वाली रानी नहीं रहती, बल्कि एक कॉन्फिडेंट ‘क्वीन’ होती है. वैसे, कंगना रनौत को इस फिल्म के लिए नेशनल अवॉर्ड भी मिल चुका है.

अस्सी
हाल ही में रिलीज हुई तापसी पन्नू की फिल्म ‘अस्सी’ ने पूरे देश में बहस छेड़ दी है. अनुभव सिन्हा के डायरेक्शन में बनी ये फिल्म एक सीरियस कोर्टरूम ड्रामा है. तापसी पन्नू इस फिल्म में एक वकील के किरदार में नजर आई हैं. फिल्म की कहानी एक ऐसी लड़की पर है, जो न्याय की तलाश में है. ये फिल्म सिर्फ कानून की बात नहीं करती, बल्कि हमारे समाज के डबल स्टैंडर्ड पर भी वार करती है. तापसी का किरदार कोर्ट में खड़ा होकर सिर्फ मुवक्किल के लिए नहीं लड़ता, बल्कि वो समाज से सवाल पूछता है कि ‘हमारा देश आखिर किस दिशा में जा रहा है?’ तापसी के अलावा फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, मनोज पाहवा और कुमुद मिश्रा जैसे कलाकार भी हैं. तापसी पन्नू की बेहतरीन एक्टिंग इस फिल्म की जान है.

गंगूबाई काठियावाड़ी
संजय लीला भंसाली की फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी मुंबई के कमाठीपुरा की उस महिला की कहानी है, जिसे धोखा देकर प्रॉस्टिट्यूशन के दलदल में धकेल दिया गया था. आलिया भट्ट ने गंगूबाई के किरदार में पूरी जान डाल दी है. ये एक ऐसी लड़की की कहानी है जो शिकार बनकर यानी विक्टिम बनकर नहीं रहती, बल्कि लड़कर उस इलाके की सबसे पावरफुल फीमेल बनती है. गंगूबाई का स्ट्रगल सिर्फ अपनी सत्ता बचाने के लिए नहीं था, बल्कि उन्होंने प्रॉस्टिट्यूशन में फंसी बाकी महिलाओं और उनके बच्चों के अधिकारों के लिए भी लड़ाई लड़ी. उन्होंने एजुकेशन और सम्मान की मांग की. फिल्म का डायलॉग- शक्ति, संपत्ति और सद्बुद्धि, तीनों ही औरतें हैं, नारी शक्ति का सबसे बड़ा मैसेज देता है. साल 2022 में आलिया भट्ट को इस फिल्म के लिए नेशनल फिल्म अवॉर्ड दिया गया था.

थप्पड़
क्या ‘बस एक थप्पड़’ तलाक की वजह हो सकता है? दरअसल, अनुभव सिन्हा के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘थप्पड़’ इसी सवाल का जवाब है. तापसी पन्नू ने अमृता नाम की एक ऐसी महिला का किरदार निभाया है जो अपने घर और पति का ख्याल रखने में ही खुश है. लेकिन एक पार्टी में उसका पति सबके सामने उसे थप्पड़ मार देता है. पूरा समाज, यहां तक कि उसके अपने माता-पिता भी उसे समझाते हैं कि रिश्तों में थोड़ा-बहुत ऐसा चलता है. लेकिन अमृता के लिए वो एक थप्पड़ सिर्फ उसके मुंह पर नहीं, बल्कि उसके आत्मसम्मान पर पड़ता है. वो उस मानसिक कंडीशनिंग को तोड़ती है जो औरतों को सहना सिखाती है. ये फिल्म हमें बताती है कि हिंसा चाहे छोटी हो या बड़ी, वो गलत है और रिस्पेक्ट के बिना किसी भी रिश्ते का कोई वजूद नहीं है.

कहानी
सुजॉय घोष के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘कहानी’ ने विद्या बालन को बॉलीवुड की असली ‘शेरनी’ बना दिया. एक प्रेग्नेंट लड़की, जो सात समंदर पार से कोलकाता आती है ताकि अपने लापता पति को ढूंढ सके. फिल्म के अंत में जो ट्विस्ट आता है, वो ऑडियन्स के रोंगटे खड़े कर देता है. विद्या का किरदार ये साबित करता है कि एक लड़की बड़े से बड़े सिस्टम और क्रिमिनल्स को भी धूल चटा सकती है. वहीं, ‘कहानी 2’ में एक मां और बेटी के रिश्ते को दिखाया गया है. अपनी बेटी को बचाने के लिए एक मां किस हद तक जा सकती है और कैसे वो अपने पास्ट के काले साए से लड़ती है, ये इस सस्पेंस थ्रिलर में बहुत अच्छी तरह से दिखाया गया है. आप कहानी के दोनों पार्ट्स को फैमिली के साथ एंजॉय कर सकते हैं.

मर्दानी सीरीज
रानी मुखर्जी की ‘मर्दानी’ सीरीज ने बॉलीवुड को एक ऐसा पुलिस ऑफिसर दिया जो निडर भी है और सेंसिटिव भी. शिवानी शिवाजी रॉय बनकर रानी ने क्रिमिनल्स के मन में खौफ पैदा कर दिया. मर्दानी 1 में उन्होंने ह्यूमन ट्रैफिकिंग के रैकेट को खत्म किया. मर्दानी 2 में रानी मुखर्जी ने एक ऐसे साइको किलर को पकड़ा जो महिलाओं के साथ गलत काम करना है और फिर मर्डर करता है. इस साल रिलीज़ हुई मर्दानी 3 में शिवानी एक बार फिर लापता लड़कियों के एक सस्पेंस से पर्दा उठाती नजर आती हैं.

इंग्लिश विंग्लिश
दिवंगत एक्ट्रेस और बॉलीवुड की पहली फीमेल सुपरस्टार श्रीदेवी की फिल्म इंग्लिश विंग्लिश हर उस महिला के दिल को छूती है जो घर की चारदीवारी में अपने अस्तित्व को खो चुकी है. शशि गोडबोले एक ऐसी मां और पत्नी है जिसे उसका परिवार सिर्फ इसलिए कम आंकता है क्योंकि उसे अंग्रेजी बोलनी नहीं आती. न्यूयॉर्क में अकेले नई भाषा सीखना और अपना खोया हुआ कॉन्फिडेंस पाने की ये कहानी, हर उस औरत की जीत है जिसे समाज सिर्फ एक हाउसवाइफ कहता है. श्रीदेवी की ये फिल्म एक बहुत बड़ा सबक देती है कि सम्मान किसी भाषा का मोहताज नहीं होता और हर इंसान का हक है.

लापता लेडीज
किरण राव के डायरेक्शन में बनी फिल्म लापता लेडीज ग्रामीण भारत की सिचुएशन को कॉमिक और सेंसिटिविटी के साथ पेश करती है. घूंघट की वजह से दो दुल्हनों की अदला-बदली की ये कहानी दरअसल उन लाखों महिलाओं की कहानी है जिनकी पहचान उनके छिपी हुई है. फिल्म धीरे-धीरे ये मैसेज देती है कि कैसे ये महिलाएं अपनी आजादी और सपनों को पहचानती हैं. इस फिल्म में नितांशी गोयल और प्रतिभा रत्ना जैसी नई एक्ट्रेसेस ने शानदार काम किया है.
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पीकू
दीपिका पादुकोण ने पीकू में एक ऐसी बेटी का रोल निभाया है जो अपने बीमार और जिद्दी पापा की देखभाल के साथ-साथ अपने करियर को भी संभालती है. ये फिल्म आज की मल्टीटास्किंग महिलाओं का डेली रूटीन दिखाती है. इस फिल्म में दीपिका के साथ-साथ अमिताभ बच्चन और इरफान खान जैसे स्टार्स भी हैं. नारी शक्ति को सेलिब्रेट करने के लिए आप इस फिल्म को भी देख सकते हैं.

मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे
रानी मुखर्जी की फिल्म मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे एक रीयल स्टोरी पर बेस्ड है. फिल्म में रानी एक ऐसी मां बनी हैं, जो अपने बच्चों को पाने के लिए एक पूरे देश की सरकार और कानून से भिड़ जाती हैं. ये फिल्म मदरहुड की उस पावर को दिखाती है जो बड़े से बड़े तूफान का रुख मोड़ सकती है. रानी मुखर्जी को इस फिल्म के लिए नेशनल अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है.
Conclusion
वैसे, लिस्ट में शामिल ये सभी बॉलीवुड फिल्में सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए ही नहीं हैं, बल्कि ये समाज के लिए एक आईना हैं. ये हमें याद दिलाती हैं कि महिलाएं किसी से कम नहीं हैं. चाहे वो कोर्टरूम में इंसाफ की लड़ाई हो, घर के अंदर आत्मसम्मान की जंग हो या फिर सरहद पर दुश्मनों से मुकाबला करना हो, महिलाएं हर जगह अपनी पावर दिखा सकती हैं. इस इंटरनेशनल वुमन्स डे पर, आप इन फिल्मों के जरिए अपने आसपास की महिलाओं के साहस और उनकी प्रीडम को सेलिब्रेट कर सकते हैं. फिल्मों की ये पावर हमें सिखाती हैं कि हार मानना कोई ऑप्शन नहीं है, बल्कि अपनी राह खुद बनाना ही असली जीत है.
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