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राम मंदिर में विशेष अनुष्ठान: मुर्मू ने की पूजा-अर्चना, प्राण प्रतिष्ठा को बताया ‘इतिहास का सुनहरा क्षण’

by Sanjay Kumar Srivastava
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राम मंदिर में विशेष अनुष्ठान: राष्ट्रपति मुर्मू ने की पूजा-अर्चना, प्राण प्रतिष्ठा को बताया 'इतिहास का सुनहरा क्षण'

Murmu Ayodhya Visit: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को अयोध्या में राम मंदिर का दौरा किया. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने मुर्मू का स्वागत किया.

Murmu Ayodhya Visit: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को अयोध्या में राम मंदिर का दौरा किया. राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने मुर्मू का स्वागत किया. मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने कहा कि वैदिक गणित पर आधारित श्री राम यंत्र सकारात्मक आध्यात्मिक ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए बनाया गया है. यह भगवान राम की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक है. 150 किलोग्राम सोने की परत चढ़ी चौकोर धातु की प्लेट पर वैदिक और ‘बीज’ मंत्र उकेरे गए हैं. मिश्रा ने कहा कि यह यंत्र कांची कामकोटि पीठम के श्री राम यंत्र पर आधारित है और स्वामी विजयेंद्र सरस्वती के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है. उन्होंने कहा कि यह यंत्र लगभग दो साल पहले एक औपचारिक जुलूस के रूप में तिरूपति देवस्थानम से अयोध्या लाया गया था और तब से इसकी प्रतिदिन पूजा की जाती है. इसे चैत्र नवरात्रि और हिंदू नव वर्ष से जुड़े अनुष्ठानों के हिस्से के रूप में शुभ ‘अभिजीत मुहूर्त’ के दौरान मंदिर की दूसरी मंजिल पर स्थापित किया जाएगा.

विशेष धार्मिक समारोहों में लिया भाग

राष्ट्रपति के दौरे को लेकर पूरे अयोध्या में सख्त सुरक्षा रही. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव ग्रोवर ने कहा कि मंदिर परिसर और शहर भर में 7,000 से अधिक कर्मियों को तैनात किया गया था, साथ ही संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल तैनात किए गए थे. राष्ट्रपति ने दावा किया कि भगवान श्री राम के आशीर्वाद से भारत 2047 तक या उससे भी पहले विकसित राष्ट्र बन सकता है. “जय श्री राम” के उद्घोष के साथ अपना संबोधन शुरू करते हुए उन्होंने कहा कि भक्त अनुयायियों और भक्ति दोनों का मार्ग एक ही है. यहां उन्होंने विशेष धार्मिक समारोहों में भाग लिया और 150 किलोग्राम सोने की परत वाली धातु की प्लेट स्थापित की, जिसे ‘श्री राम यंत्र’ के नाम से जाना जाता है. राष्ट्रपति ने कहा कि इस पवित्र राम जन्मभूमि पर भूमि पूजन, प्राण प्रतिष्ठा, भक्तों के लिए राम दरबार का उद्घाटन और मंदिर के शीर्ष पर धर्म ध्वज फहराना ये सभी हमारे इतिहास के सुनहरे क्षण हैं. उन्होंने कहा कि वही भावना जो भगवान के प्रति समर्पण को प्रेरित करती है. राम देशभक्ति की भावना भी जगाते हैं.

एकता और विकास का दिया संदेश

मुर्मू ने कहा कि वही हृदय जो ‘नमामि रामम रघुवंश नाथम’ से गूंजता है, वही हृदय है जिससे हमारा राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ गाया जाता है. इस मौके पर समावेशी विकास की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारत एक विकसित और समतापूर्ण समाज के निर्माण की दिशा में लगातार प्रगति कर रहा है. भगवान श्री राम के आशीर्वाद से हम इन लक्ष्यों को वर्ष 2047 तक या शायद उससे भी पहले हासिल कर लेंगे. मुर्मू ने भगवान राम की विरासत के सांस्कृतिक और संवैधानिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राम-रावण युद्ध जीतने के बाद माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ भगवान श्री राम के अयोध्या आगमन का बहुत ही कलात्मक रेखाचित्र हमारे संविधान की मौलिक छवि में सुशोभित है. यह रेखाचित्र मौलिक अधिकारों के अत्यंत महत्वपूर्ण भाग 3 की शुरुआत में दिखाई देता है. उन्होंने इस चित्रण के बारे में जागरूकता फैलाने के प्रयासों पर प्रसन्नता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि मुझे यह जानकर खुशी हुई कि यह पेंटिंग जागरूकता और ज्ञान फैला रही है और जनता को संवैधानिक आदर्शों व पवित्र सांस्कृतिक प्रतीकों से जोड़ रही है.

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News Source: PTI

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