Price Hike News: बीते 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला बोला था. उसके बाद से लेकर अभी तक इनके बीच रुक-रुक कर जंग और तनाव जारी है. ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष ने पश्चिम एशिया को कई प्रकार की परेशानियों में डाल दिया है. इनके बीच इस तनातनी ने भारत समेत दुनिया के कई देशों के लिए एनर्जी सप्लाई को लेकर काफी अहम समुद्री रास्ता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बाधित कर दिया है. इसके बाधित हो जाने से भारत समेत दुनिया के कई देशों में तेल और गैस के दाम लगातार बढ़ रहे हैं. इसका प्रभाव अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है और देश में अन्य चीजों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो रही है. इससे सबसे अधिक असर आम जनता पर पड़ रहा है.
कई जानकार बता रहे हैं कि अगर पश्चिम एशिया में जारी तनाव कम नहीं होता है तो दुनिया के कई देशों में मंदी आ सकती है. इससे तेल और गैस के दाम आसमान छूते हुए दिखाई देंगे. लोगों को खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर के लिए बड़ी कीमत तक चुकानी पड़ सकती है. तेल-गैस के दाम बढ़ने से ई-रिक्शा से लेकर हवाई जहाज तक के किराये बढ़ सकते हैं. इससे देश में और महंगाई की आशंका हो जाएगी.
इस बीच आज देश में एक बार फिर से घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं. जी हां, पिछले तीन महीनों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में यह दूसरी बढ़ोतरी है. न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू एलपीजी सिलेंडर (14.2 केजी) की कीमत 29 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ गई है. अब दिल्ली में 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर की कीमत 7 जून यानी आज से 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो जाएगी.
देश में ऐसा नहीं है कि केवल घरेलू एलपीजी सिलेंडर के ही दाम बढ़े हैं. इसके पहले कई बार पेट्रोल-डीजल, कमर्शियल सिलेंडर के भी दाम बढ़े हैं. हालांकि, केंद्र की मोदी सरकार का कहना है कि वैश्विक बेंचमार्क में 46 प्रतिशत की वृद्धि के बावजूद भारत में रेट्स दुनिया में सबसे कम हैं.
आइए अब जानते हैं कि पश्चिम एशिया संघर्ष से देश के लोगों पर महंगाई की कैसी मार पड़ रही है. इसके साथ ही जानेंगे कि जब से ईरान और अमेरिका के बीच जंग और संघर्ष जारी है तब से लेकर अभी तक भारत में तेल और गैस के दाम कब-कब और कितने बार बढ़े हैं, इसके पीछे की वजहें क्या हैं. शुरुआत हम घरेलू एलपीजी की कीमतों में 29 रुपये प्रति सिलेंडर की वृद्धि पर केंद्र सरकार के बयान से करेंगे. उसके बाद हम भारत सहित दुनिया के तमाम देशों की एनर्जी सप्लाई (कच्चे तेल, गैस आदि) के लिए अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बारे में जानेंगे.
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भारत में दरें दुनिया में सबसे कम- केंद्र सरकार
देश की मोदी सरकार ने कहा है कि वैश्विक बेंचमार्क में 46 प्रतिशत की वृद्धि के बावजूद भारत में दरें दुनिया में सबसे कम हैं. केंद्र सरकार ने रविवार को कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकटों के कारण अंतरराष्ट्रीय एलपीजी की कीमतों में भारी वृद्धि के बावजूद, भारतीय घरों में खाना पकाने की गैस की कीमतें वैश्विक स्तर पर सबसे कम हैं. यह बयान घरेलू एलपीजी की कीमतों में 29 रुपये प्रति सिलेंडर की वृद्धि करने के बाद आया है. सरकार ने एक बयान में कहा कि फरवरी के अंत में पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय कीमतों में हुई बढ़ोतरी के चलते घरेलू एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति की लागत बढ़कर 1,600 रुपये से अधिक हो गई है.
भारत की एलपीजी आयात लागत सऊदी अरब के अनुबंध मूल्य (सीपी) से जुड़ी है, जो ईंधन के लिए वैश्विक मानक है. बयान के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से संबंधित व्यवधानों के कारण खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति कम होने के बाद से इस मानक में फरवरी से लगभग 46 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
सरकार ने कहा कि बढ़ोतरी के बावजूद, घरेलू एलपीजी की कीमतें पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में जारी कीमतों से कम हैं और संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा सहित उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में कीमतों की तुलना में काफी कम हैं.

भारत अपनी एलपीजी आवश्यकताओं का 60% करता है आयात
केंद्र सरकार ने कहा, “भारत अपनी एलपीजी आवश्यकताओं का 60 प्रतिशत आयात करता था और उस आयात की लागत सऊदी अरब के अनुबंध मूल्य (सीपी) के अनुरूप होती है. इसे सऊदी अरामको हर महीने की शुरुआत में निर्धारित करता है. यह एक बाहरी कीमत है जिस पर भारतीय उपभोक्ता का कोई नियंत्रण नहीं है.” पश्चिम एशिया में संकट के कारण बेंचमार्क में तेजी से वृद्धि हुई है.
भारत में एलपीजी के लिए उपयोग किए जाने वाले 50:50 प्रोपेन-ब्यूटेन मिश्रण के रूप में व्यक्त, संकट से पहले फरवरी में एलपीजी के लिए सऊदी सीपी लगभग 543 अमेरिकी डॉलर प्रति टन था. फरवरी के अंत में होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के बाद, अप्रैल अनुबंध मूल्य – व्यवधान के बाद मध्य पूर्व खाड़ी निर्यात में आई कमी के बाद निर्धारित पहला अनुबंध – बढ़कर 775 अमेरिकी डॉलर प्रति टन हो गया, जिसमें प्रोपेन 750 अमेरिकी डॉलर और ब्यूटेन 800 अमेरिकी डॉलर था और जून में यह और बढ़कर 790 अमेरिकी डॉलर प्रति टन हो गया. बयान में कहा गया है कि इस प्रकार मिश्रित एलपीजी का मानक संकट से पहले के फरवरी स्तर से लगभग 46 प्रतिशत बढ़ गया है.
दुनिया, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और भारत
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की बात करें तो यह दुनिया का बहुत ही महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है. यह जब से ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव में युद्ध का केंद्र बना है, तब से इसने दुनिया की अर्थव्यवस्था को काफी प्रभावित किया है. फारस और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला यह समुद्री मार्ग 33 किमी चौड़ा और करीब 167 किमी लंबा है. रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया का करीब 20 से 25 फीसदी तेल और गैस का व्यापार इसी समुद्री मार्ग से होता है. यह रास्ता एशियाई बाजारों तक करीब 80 फीसदी से अधिक तेल की सप्लाई का माध्यम है.

भारत के लिए भी यह रास्ता बहुत ही खास है क्योंकि यहां से वह 30 से 50 फीसदी तक कच्चे तेल और गैस का आयात करता है. भारत इसी समुद्री मार्ग से ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात समेत अन्य देशों से तेल का आयात करता है. अब यह समुद्री मार्ग प्रभावित हो गया है तो भारत ने अपने खास मित्र रूस से कच्चे तेल की सप्लाई को और अधिक बढ़ा दी है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बाधित हो जाने के तच्चे तेल के दाम और गैस की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. इसकी वजह से भारत की सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों नुकसान हो रहा है. इसी के कारण देश में तेल और गैस के दामों में बढ़ोतरी हो रही है. यहां हम यह कह सकते हैं कि पश्चिम एशिया संघर्ष से देश के लोगों पर महंगाई की मार पड़ रही है.
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देश में कितनी बार बढ़ी तेल की कीमत?
सबसे पहले हम यहां बात देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में हुई बढ़ोतरी की करेंगे. करीब चार साल बाद बीते 15 मई को देश में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़े थे. 15 मई को पूरे भारत में पेट्रोल की कीमत प्रति लीटर 3.29 रुपये बढ़ गई जबकि डीजल 3.11 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया. उसके बाद 19 मई को एक बार फिर से इनके दाम बढ़े. इस दिन पेट्रोल की कीमत प्रति लीटर 0.96 रुपये और डीजल 0.94 रुपये बढ़ी.
19 मई के बाद 23 मई को पेट्रोल और डीजल के दामों में एक बार फिर से बढ़ोतरी की गई. इस दौरान पेट्रोल 0.94 रुपये और डीजल 0.95 रुपये प्रति लीटर महंगे हो गए. 15 मई से 25 मई यानी मात्र 10 दिनों के भीतर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार बार बढ़त की गई. 25 मई को पेट्रोल प्रति लीटर 2.87 रुपये और डीजल 2.80 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया. इन चारों बढ़ोतरी को मिलाकर देखें तो पेट्रोल की कीमत में कुल 8.06 रुपये और डीजल की कीमत में 7.80 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई है.
फरवरी से अब तक 1422 रुपये महंगा हुआ कमर्शियल सिलेंडर
यहां अब कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के बढ़े दामों की बात करेंगे. देश में जनवरी 2026 में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर का दाम 1691.50 रुपये था. इसमें फरवरी में 49 रुपये, मार्च 2026 में 115 रुपये, अप्रैल 2026 में 195.50 रुपये, मई 2026 में 993 रुपये और जून में 42 रुपये की बढ़ोतरी हुई. अब देश में (खासकर के राजधानी दिल्ली) कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम 3113.50 रुपये प्रति सिलेंडर हो गया है. फरवरी से अब तक इसमें करीब 84 फीसदी यानी कि 1422 रुपये की बढ़ोतरी हुई है.
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दो बार बढ़ी घरेलू एलपीजी गैस की कीमत
रविवार 7 जून से घरेलू खाना पकाने वाली एलपीजी गैस की कीमत में 29 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई है. दिल्ली में 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर की कीमत 7 जून से 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है. इससे पहले अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतों में वृद्धि होने के बाद 7 मार्च को प्रति सिलेंडर 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद यह दूसरी वृद्धि हुई है.
तेल कंपनियों को हो रहा नुकसान
पश्चिम एशिया में संघर्ष जारी है. इसके कारण ग्लोबल एनर्जी सप्लाई बाधित है क्योंकि दुनिया के कई देशों के लिए एनर्जी सप्लाई के लिए काफी अहम समुद्री रास्ता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान-अमेरिका तनाव में बंद है. इस अहम रास्ते के बंद हो से भारत भी काफी प्रभावित हुआ है. इस रास्ते से देश में पहले की तरह तेल और गैस का आयात नहीं हो पा रहा है. इस कारण सरकारी स्वामित्व वाले तेल खुदरा विक्रेता ग्लोबल एनर्जी लागत में वृद्धि से जूझ रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, लेटेस्ट दाम बढ़ाने से पहले, सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों को बेचे गए प्रत्येक एलपीजी सिलेंडर पर लगभग 703 रुपये का नुकसान हो रहा था.

वहीं, मई के मध्य से लेकर अब तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल मिलाकर 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है, जबकि सीएनजी की दरों में लगभग 6 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि हुई है. हालिया बढ़ोतरी के बावजूद, तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल को लागत मूल्य से कम पर बेच रही हैं, जिससे उन्हें पेट्रोल पर लगभग 11 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 33.6 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है.
