Home Latest News & Updates Digital Payment में हरियाणा देश में नंबर वन, 54% से ज्यादा परिवार अब भी कैश व ऑफलाइन खरीदारी पर निर्भर

Digital Payment में हरियाणा देश में नंबर वन, 54% से ज्यादा परिवार अब भी कैश व ऑफलाइन खरीदारी पर निर्भर

by Sanjay Kumar Srivastava 30 October 2026, 2:43 PM IST (Updated 30 October 2026, 2:44 PM IST)
30 October 2026, 2:43 PM IST (Updated 30 October 2026, 2:44 PM IST)
Digital Payment में हरियाणा देश में नंबर वन, 54% से ज्यादा परिवार अब भी कैश और ऑफलाइन खरीदारी पर निर्भर

Digital Payment: देश में डिजिटल लेन-देन का चलन तेजी से बढ़ रहा है. अब लगभग 45.6 प्रतिशत भारतीय परिवार कम से कम एक उपभोग की वस्तु (Consumer Item) खरीदने के लिए ऑनलाइन शॉपिंग और डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं. इस बात का खुलासा भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक हालिया रिसर्च रिपोर्ट में हुआ है. हालांकि, रिपोर्ट यह भी बताती है कि 54.4 प्रतिशत परिवार अब भी खरीदारी के लिए पारंपरिक तरीकों पर निर्भर हैं.

खाने-पीने पर होता है 32.82% डिजिटल लेन-देन

राज्यों के स्तर पर देखें तो भोजन, सेवाओं और टिकाऊ सामानों पर होने वाले औसत मासिक उपभोग व्यय के मामले में हरियाणा देश में पहले स्थान पर है. इसके बाद गोवा, नागालैंड और केरल भी प्रमुख उपभोग श्रेणियों में सबसे आगे रहने वाले राज्यों में शामिल हैं. SBI की रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल घरेलू उपभोग खर्च में खाने-पीने पर होने वाला खर्च लगभग 32.82 प्रतिशत है, जो यह दिखाता है कि बुनियादी उपभोग की जरूरतों का महत्व आज भी बना हुआ है. खाने-पीने की श्रेणी में, रोजमर्रा के किराने के सामान की खरीदारी में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल सबसे ज्यादा (4.29 प्रतिशत) होता है. इसके बाद तैयार प्रोसेस्ड फूड (2.6 प्रतिशत) और पैक्ड प्रोसेस्ड फूड (1.65 प्रतिशत) का स्थान है.

जल्दी खराब होने वाली खाद्य वस्तुओं की खरीदारी में भरोसा कम

जल्दी खराब होने वाली खाद्य वस्तुओं की खरीदारी के लिए लोग अभी भी काफी हद तक ऑफलाइन बाजारों पर ही निर्भर हैं. सब्जियों के मामले में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल केवल 1.32 प्रतिशत, ताजे फलों के लिए 1 प्रतिशत, अंडे, मछली व मांस के लिए 0.59 प्रतिशत है. उपभोग की वस्तुओं और सेवाओं की श्रेणी में, सामान्य सेवाओं का डिजिटल खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा (37.93 प्रतिशत) है, जिसके बाद ईंधन और बिजली का नंबर आता है, जिनका हिस्सा 15.96 प्रतिशत है. हालांकि, शिक्षा और चिकित्सा सेवाओं के लिए ऑनलाइन लेनदेन का स्तर काफी कम है – क्रमशः 1.83 प्रतिशत और 1.69 प्रतिशत. टिकाऊ वस्तुओं में, कपड़ों की ऑनलाइन खरीदारी सबसे ज्यादा (19.97 प्रतिशत) होती है.

आय बढ़ते ही ऑनलाइन खरीदारी में भी तेजी

इसके बाद फुटवियर (जूते-चप्पल) का नंबर आता है, जिसका हिस्सा 12.05 प्रतिशत है. हालांकि, फर्नीचर और मेडिकल उपकरणों जैसी महंगी वस्तुओं के मामले में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल बहुत कम है – क्रमशः 0.18 प्रतिशत और 0.32 प्रतिशत. रिपोर्ट में आय समूहों के बीच डिजिटल अपनाने के स्तर में एक बड़ा अंतर भी सामने आया है. जैसे-जैसे ‘मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय’ (MPCE) बढ़ता है, वैसे-वैसे ऑनलाइन खरीदारी भी बढ़ती जाती है. सबसे कम आय वाले 20 प्रतिशत परिवारों में यह आंकड़ा 25.3 प्रतिशत है, जबकि सबसे अधिक आय वाले 20 प्रतिशत परिवारों में यह 69.5 प्रतिशत तक पहुंच जाता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे निचले और सबसे ऊपरी आय समूहों के बीच 44.3 प्रतिशत अंकों का यह अंतर, ऑनलाइन माध्यमों को अपनाने और उपभोग के स्तर के बीच एक बड़ा फर्क दिखाता है.

डिजिटल लेन-देन में अधिक खर्च का दावा

राज्यों की बात करें तो, भोजन, उपभोग की अन्य वस्तुओं, सेवाओं और टिकाऊ सामानों पर होने वाले औसत मासिक उपभोग व्यय के मामले में हरियाणा पहले स्थान पर है. गोवा, नागालैंड और केरल भी प्रमुख उपभोग श्रेणियों में सबसे आगे रहने वाले राज्यों में शामिल हैं. रिपोर्ट में यह भी देखा गया है कि जो परिवार डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते हैं, उनका उपभोग व्यय उन परिवारों की तुलना में अधिक होता है जो भुगतान के पारंपरिक तरीकों पर निर्भर हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने वाले परिवारों का MPCE 7.5% अधिक होता है, जो यह दर्शाता है कि ऑनलाइन उपयोगकर्ताओं के बीच उपभोग का स्तर ऊंचा है. ये नतीजे बताते हैं कि डिजिटल माध्यमों को अपनाने का संबंध अधिक उपभोग और उपभोग के विविध तरीकों की ओर झुकाव से है.

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News Source: ANI

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