Market Update: दुनिया के शेयर बाजारों में मंगलवार को एक बार फिर बेचैनी देखने को मिली. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों का मूड बिगाड़ दिया. अमेरिकी शेयर बाजार के फ्यूचर्स से लेकर यूरोप और एशिया के प्रमुख बाजारों तक दबाव देखने को मिला. सबसे ज्यादा नजर इस समय कच्चे तेल की कीमतों पर है, क्योंकि महंगा तेल आने वाले दिनों में महंगाई को और बढ़ा सकता है.
सऊदी अरब पर हमले
बाजार की इस गिरावट की बड़ी वजह मिडिल ईस्ट की बढ़ती टेंशन है. सऊदी अरब के दक्षिणी इलाके में तेल से जुड़ी सुविधाओं और दूसरी जरूरी सेवाओं पर हूती विद्रोहियों के हमलों ने हालात को और गंभीर कर दिया है. इन हमलों के बाद निवेशकों को डर है कि तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है. इसी चिंता का सीधा असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर दिखाई दिया. मंगलवार की शुरुआत मेंकच्चा तेल करीब 1.5 फीसदी बढ़कर 98.48 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया. वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड में करीब 2.5 फीसदी की तेजी आई. ये 93.79 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया. कच्चा तेल अब 100 डॉलर के काफी नज़दीक पहुंच चुका है.
US फ्यूचर्स में भी कमजोरी
तेल की बढ़ती कीमतों का असर अमेरिकी बाजार पर भी पड़ा. S&P 500 फ्यूचर्स करीब 0.2-0.3 फीसदी नीचे रहा. वहीं, डाउ जोन्स फ्यूचर्स में करीब 0.7-0.8 फीसदी की गिरावट देखी गई. निवेशकों की नजर अब अमेरिका के आने वाले महंगाई आंकड़ों पर है. दरअसल, तेल महंगा होने से कंपनियों की लागत और आम लोगों के खर्च दोनों बढ़ सकते हैं. साथ ही इस हफ्ते अमेरिका में महंगाई से जुड़े दो बड़े आंकड़े आने वाले हैं. गुरुवार को प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स यानी PPI जारी होगा. शुक्रवार को कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI सामने आएगा. CPI से खाने-पीने की चीजों, कपड़ों, फर्नीचर, यात्रा और दूसरी सेवाओं की कीमतों में बदलाव का पता चलता है. यही आंकड़े आगे फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों से जुड़े फैसले को प्रभावित कर सकते हैं.
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जापानी मार्केट भी फिसली
एशियाई बाजारों की बात करें तो जापान का निक्की 225 शुरुआती बढ़त गंवाकर 1.7 फीसदी गिर गया और 65,269.33 के स्तर पर बंद हुआ. जापानी येन मजबूत होने से बड़ी एक्सपोर्ट कंपनियों के शेयरों पर दबाव पड़ा. टोयोटा के शेयर करीब 4.1 फीसदी और पैनासोनिक होल्डिंग्स के शेयर 5.8 फीसदी तक टूटे. हालांकि, जापान की अर्थव्यवस्था को लेकर एक अच्छी खबर भी आई. अप्रैल-जून तिमाही में देश की सालाना GDP ग्रोथ को पहले के 1.1 फीसदी अनुमान से बढ़ाकर 1.4 फीसदी किया गया है. ये सुधार खास तौर से बिजनेस इन्वेस्टमेंट के आंकड़ों में बेहतर प्रदर्शन की वजह से हुआ.
चाइना का हाल
दूसरी तरफ चीन के बाजार का हाल थोड़ा बेहतर रहा. शंघाई कम्पोजिट करीब 0.2 फीसदी चढ़ा. वहीं, हांगकांग का हैंग सैंग 0.4 फीसदी नीचे रहा. चीन के लिए अच्छी खबर यह रही कि अगस्त में उसके एक्सपोर्ट सालाना आधार पर 25 फीसदी बढ़े. ऑटोमोबाइल और हाई-टेक उत्पादों की मजबूत डिमांड ने इस बढ़त में बड़ा रोल प्ले किया. इसके अलावा साउथ कोरिया का कोस्पी भी 0.6 फीसदी गिरा और ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 करीब 1 फीसदी नीचे रहा. यानी मंगलवार का बाजार साफ कह रहा है कि तेल की कीमतों में तेजी इस समय पूरी दुनिया के शेयर बाजारों के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है. अगर मिडिल ईस्ट का तनाव लंबे समय तक जारी रहता है और क्रूड 100 डॉलर के ऊपर टिकता है, तो महंगाई, ब्याज दरों और कंपनियों की लागत पर इसका असर देखने को मिलेगा.
News Source: PTI
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