Industrial Policy 2026 : हरियाणा की नायाब कैबिनेट ने नई औद्योगिक नीति 2026 को मंजूरी दे दी है. इस नीति का मकसद राज्य में 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश और 10 लाख नौकरियां पैदा करना है. साथ ही निवेशकों के लिए सकारात्मक इकोसिस्टम भी तैयार करना है.
Industrial Policy 2026 : हरियाणा सरकार ने सोमवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में 10 औद्योगिक नीतियों को मंजूरी दी है. इस नीति का मकसद राज्य में 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश और 10 लाख नौकरियां पैदा करना है. साथ ही राज्य में निवेशकों के लिए पसंदीदा निवेश स्थल बनाने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करती है. कैबिनेट की बैठक के बाद मीडिया कर्मियों से बात करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि ‘मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति 2026. को कैबिनेट ने मंज़ूरी दे दी है. साथ ही रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के साथ-साथ, इस नई नीति का उद्देश्य हरियाणा को एक अग्रणी निवेश स्थल के रूप में स्थापित करना है.
विभिन्न सेक्टरों में निवेश पर जोर
वित्त विभाग का प्रभार भी संभालने वाले मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि अपनी उद्योगों को नीतियों अनुकूल से ही हरियाणा पूरे देश और विदेश के निवेशकों के लिए एक पसंदीदा निवेश स्थल के रूप में उभरा है. इसके अलावा निवेश, रोजगार, AI, इलेक्ट्रॉनिक्स, निर्यात और कृषि-उद्योग को जोरदार बढ़ावा देना हरियाणा के लिए विकास का एक नया मोड़ है. बता दें कि ‘मेक इन हरियाणा’ औद्योगिक नीति 2026 साल 2020 में बनाई गई नीतियों की जगह लेगी और राज्य में यही औद्योगिक नीति काम करेगी.
अनुसंधान और विकास पर दिया जाएगा जोर
वहीं, राज्य बजट 2026-27 में घोषणा की गई थी कि सभी सेक्टर्स में औद्योगिक निवेश के लिए वित्तीय प्रोत्साहन उपलब्ध कराए जाएंगे. साथ ही एक ऑफिशियल स्टेटमेंट में भी कहा गया था कि इस नीति के जरिए प्रोत्साहन राज्य के हर ब्लॉक तक पहुंचेंगे. यह नीति नए औद्योगिक निवेश के लिए पूंजी सब्सिडी, ‘हरियाणा कौशल रोज़गार निगम’ पोर्टल पर पंजीकृत युवाओं की भर्ती और अनुसंधान एवं विकास के लिए प्रोत्साहन प्रदान करती है. वहीं, विशेष पैकेजों के तहत बड़ी इकाइयों को यह लाभ सात साल तक मिलेगा, मेगा इकाइयों को 10 साल और अल्ट्रा मेगा परियोजनाओं को 12 साल तक लाभ मिलेगा. इसके अलावा बड़ी इकाइयां 5-20 प्रतिशत की पूंजी सब्सिडी के लिए पात्र होंगी.
EPF योगदान की प्रतिपूर्ति मिलेगी
दूसरी तरफ हरियाणा कौशल रोजगार निगम पोर्टल के माध्यम से भर्ती करने वाली कंपनियों और कर्मचारी दोनों को EPF योगदान की प्रतिपूर्ति मिलेगी. निवेशकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए 1 अप्रैल, 2026 के बाद भुगतान में देरी होने पर 8 फीसदी प्रति वर्ष की दर से ब्याज देने का प्रावधान किया गया है. निर्यात को बढ़ावा देने और ग्रीन इंडस्ट्रीज के लिए भी प्रावधान किए गए हैं, जिनमें कार्बन क्रेडिट, रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन बिल्डिंग्स और ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम शामिल हैं.
नीति का मकसद विभिन्न सेक्टरों में तेजी लाना
आपको बताते चलें कि औद्योगिक नीति 2026 के तहत नायाब कैबिनेट ने 10 प्रमुख औद्योगिक नीतियों को मंजूरी दी है. इन नीतियों का लक्ष्य मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, उभरती टेक्नोलॉजीज़, ग्रीन इंडस्ट्री और कृषि-आधारित आर्थिक विकास को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देकर ‘संकल्प पत्र’ (BJP के चुनावी वादे) की अहम प्रतिबद्धताओं और बजट घोषणाओं को लागू करना है. कैबिनेट ने ‘हरियाणा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिज़ाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी 2026’ को भी मंज़ूरी दी है. यह नीति राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और सेमीकंडक्टर्स में निवेश को भी बढ़ावा देगी.
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News Source: PTI
