India US Deal: बीते साल अमेरिका के द्वारा भारत पर मनमाने ढंग से टैरिफ लगाने के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते थोड़े तनाव वाले हो गए थे. अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने सबसे पहले ब्रिक्स सदस्यों पर 10 फीसदी का टैरिफ लगाया, क्योंकि इन देशों ने अपने ट्रेड को डॉलर में नहीं बल्कि अपनी-अपनी करेंसी में करने का फैसला किया था. उसके बाद ट्रंप ने भारत पर कुल 25 फीसदी का टैरिफ लगा दिया था, यह पारस्परिक टैरिफ (Reciprocal Tariff) था. उसके बाद अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड में तनाव और बढ़ता गया. अगस्त 2025 में अमेरिकी प्रेसिडेंट ने भारत पर अतिरिक्त 25 फीसदी का और टैरिफ लगा दिया, जिससे अमेरिका के द्वारा भारत पर कुल टैरिफ 50 फीसदी का हो गया. मतलब कि भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले सामानों पर ट्रंप 50 फीसदी का टैक्स वसूलने लगे.
ट्रंप के इस मनमाने टैरिफ से भारत-अमेरिका ट्रेड के बीच टेंशन वाला माहौल हो गया. दोनों देशों के बीच जारी द्विपक्षीय ट्रेड बातचीत भी थम गई. शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई. कई कंपनियों के शेयर औंधे मुंह गिर गए. उसके बाद ट्रंप की भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में आलोचना होने लगी. अमेरिका में ही कई दिग्गज लोग ट्रंप का विरोध करने लगे. हालांकि, इस साल फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप के बीच बैठक से दोनों देशों के रिश्ते में आई कड़वाहट कम हुई और ट्रंप ने भारत पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ को वापस लेने का फैसला कर लिया. उसके बाद ट्रंप को अमेरिकी अदालत से भी झटका लगा.
इस बीच हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत के चार दिवसीय दौरे पर आए थे. उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते को मजबूत करने के लिए अपनी बात कही और कई कदम भी उठाए. इतना ही नहीं उन्होंने पीएम मोदी को ट्रंप के आमंत्रण पर अमेरिका आने का न्योता भी दिया. इस दौरान बुधवार को अमेरिका और भारत के बीच व्यापार को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई. जानकारी के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को पूरा करने के लिए दोनों ही देश तेजी के साथ काम कर रहे हैं. उम्मीद की जा रही है कि यह डील आगामी 24 जुलाई से पहले पूरी हो सकती है. इसी बातचीत को लेकर अगले महीने 1 से 4 जून तक के लिए अमेरिकी टीम भारत के दौरे पर आ रही है. वह टीम दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी. इसके बाद जुलाई तक भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय ट्रेड समझौते को पूरा होने की उम्मीद है.
आइए जानते हैं कि ट्रंप, टैरिफ और टेंशन के बाद अब जो ऐतिहासिक ट्रेड डील पर मुहर लगने जा रही है, वहां तक पहुंचने से पहले भारत और अमेरिका के बीच व्यापार रिश्ते को लेकर क्या-क्या हुआ, इसके साथ ही जानेंगे कि भारत और अमेरिका के बीच होने वाला व्यापार कितने करोड़ रुपये का है.

फरवरी 2025 में शुरू हुई थी BTA की बातचीत
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की घोषणा फरवरी 2025 में हुई थी. यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी यात्रा के दौरान वाशिंगटन में की गई थी. तब प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त रूप से इसका ऐलान किया था. इस व्यापार डील का उद्देश्य साल 2030 तक अपने ट्रेड को 500 अरब अमेरिकी डॉलर (“मिशन 500”)पहुंचाना है. इन दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को 2025 के अंत तक पूरा करने का टारगेट किया था, लेकिन ट्रंप टैरिफ की वजह से यह पूरा नहीं हो पाया.
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ट्रंप ने थोपा था भारत पर 50% का टैरिफ
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते में अभी तक देरी अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप के द्वारा थोपे गए 50 फीसदी के टैरिफ की वजह से हो रही थी. बीते साल अगस्त में अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर कुल 50 फीसदी का टैरिफ लगा दिया था, जिसमें 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ भी शामिल था. अमेरिकी प्रेसिडेंट ने भारत पर 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ यह कहते हुए लगाया था कि भारत, रूस के साथ तेल की खरीदारी करता है. इससे मिलने वाले पैसों का रूस, यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में इस्तेमाल करता है.
हालांकि, तब ट्रंप और अमेरिका का परवाह किए बगैर पीएम मोदी ने रूस के साथ तेल की खरीदारी को जारी रखा. बीते साल भारत आए रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन ने भी कहा था कि बिना किसी दबाव और रुकावट के रूस, भारत को तेल भेजने की सप्लाई को जारी रखेगा. उन्होंने संकेत दिए थे कि भारत रूस से पहले के मुकाबले और भी अधिक मात्रा में तेल की खरीदारी करेगा.

अब भारत पर केवल 10% का टैरिफ
बीते साल अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी तक का टैरिफ लगा दिया था. इसमें 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ भी शामिल था, जो भारत पर रूस से तेल की खरीदारी करने पर लगाया गया था. इस वजह से भारतीय सामानों को अमेरिका में भेजने पर काफी अधिक टैक्स देना पड़ता था. लेकिन इस साल 2 फरवरी 2026 को पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई ऐतिहासिक ट्रेड डील पर बातचीत के बाद 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ को हटा दिया गया था और मूल टैरिफ को घटाकर मात्र 18 फीसदी कर दिया गया था.
उसके बाद 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ आदेश के खिलाफ एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया. इस फैसले में ट्रंप के टैरिफ वाले आदेश को असंवैधानिक करार दिया गया. कोर्ट ने आदेश दिया कि 24 जुलाई 2026 तक सभी देशों पर 10 फीसदी का टैरिफ लागू रहेगा. भारत पर भी 10 फीसदी का ही टैरिफ लागू है. कोर्ट के आदेश के अनुसार, 24 जुलाई अब नजदीक आ रही है. ऐसे में जानकार उम्मीद कर रहे हैं कि अमेरिका और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता को लेकर पहले ही बात बन जाएगी.
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अमेरिका-भारत संबंधों में कोई कमी नहीं आई – रुबियो
क्वाड मीटिंग में भाग लेने के लिए हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत के चार दिवसीय दौरे पर आए थे. इस दौरान उनसे भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में टैरिफ की वजह से आए तनाव को लेकर सवाल किया गया. इसपर उन्होंने कहा कि अमेरिका-भारत संबंधों में कोई कमी नहीं आई है.
जी हां, नई दिल्ली में रुबियो ने एस. जयशंकर के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “अमेरिका-भारत संबंधों में कोई कमी नहीं आई है. मैं पूरी तरह से नहीं समझता, लेकिन मैं समझता हूं कि कुछ लोग ऐसा क्यों कहते हैं. यह भारत के बारे में नहीं है. यह व्यापार के संदर्भ में संयुक्त राज्य अमेरिका के बारे में है.” उन्होंने आगे कहा, “भारत संयुक्त राज्य अमेरिका का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है, विश्व में हमारे सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक है.”

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अमेरिकी टीम का 1 से 4 जून तक भारत का दौरा
न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, बुधवार 27 मई को एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि अगले महीने अमेरिकी टीम भारत आ रही है. उन्होंने कहा कि ये टीम अंतरिम व्यापार समझौते के विवरण को अंतिम रूप देने और बाजार पहुंच, गैर-टैरिफ उपायों और सीमा शुल्क सुविधा जैसे विभिन्न क्षेत्रों पर व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए आ रही है. अधिकारी के अनुसार, अमेरिकी टीम इन सभी मुद्दों पर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए 1 से 4 जून तक भारत का दौरा करने वाली है.
बता दें कि भारत और अमेरिका ने बीते 7 फरवरी को एक संयुक्त बयान जारी किया था. इसमें दोनों देशों ने पारस्परिक और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार पर एक अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे पर सहमति व्यक्त की थी. इस रूपरेखा ने व्यापक भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) वार्ता के प्रति देशों की प्रतिबद्धता की पुष्टि की. इसके बाद, भारतीय पक्ष ने 20-23 अप्रैल, 2026 को अपने अमेरिकी समकक्षों के साथ आमने-सामने की बैठकों के लिए वाशिंगटन डीसी का दौरा किया.
अधिकारी ने बताया, “चर्चाओं को आगे बढ़ाने के लिए, मुख्य वार्ताकार के नेतृत्व में अमेरिकी टीम 1 से 4 जून, 2026 तक भारत का दौरा करेगी. अंतरिम समझौते के विवरण को अंतिम रूप देने और व्यापक बीटीए के तहत बाजार पहुंच, गैर-टैरिफ उपाय, सीमा शुल्क और व्यापार सुविधा, निवेश प्रोत्साहन, आर्थिक सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों पर बातचीत को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव है.”

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अमेरिका-भारत के बीच कुल कितना ट्रेड?
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अमेरिका भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर रहा है. भारत ने अमेरिका को कुल 87.316.01 मिलियन डॉलर का निर्यात किया है. रुपये में बात करें तो यह 7 लाख 70 हजार 279.59 करोड़ रुपये का निर्यात है. बीते वित्त वर्ष के मुकाबले भारत के एक्सपोर्ट में 0.93 फीसदी की ग्रोथ दिखी है.

वहीं, आयात की बात करें तो भारत ने अमेरिका से वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 53,488.70 मिलियन डॉलर का आयात किया है. मतलब कि 4 लाख 72 हजार 725.40 करोड़ रुपया का इंपोर्ट किया है. भारत का अमेरिका के साथ ट्रेड फायदे का रहा है. वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच कुल ट्रेड 12 लाख 43 हजार 4.99 करोड़ रुपये का रहा है. अमेरिकी डॉलर में बात करें तो यह ट्रेड एक लाख 40 हजार 804.71 मिलियन डॉलर का रहा है. भारत के ट्रेड सरप्लस की बात करें तो यह अमेरिका के साथ करीब 40,889.09 मिलियन डॉलर का है.
