Plastic Currency Notes: पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने भारत समेत दुनिया के कई देशों को प्रभावित किया है. ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनातनी ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बाधित कर दिया है. इससे दुनिया के कई देशों में एनर्जी सप्लाई (तेल, गैस आदि) की दिक्कत हो गई है और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है. कच्चे तेल के दाम बढ़ रहे हैं और डॉलर की मांग बढ़ने के बीच भारतीय करेंसी रुपये में लगातार उतार-चढ़ाव देखी जा रही है. इस बीच भारत की करेंसी नोट को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है. विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश का केंद्रीय बैंक आरबीआई अपनी करीब 14 साल पहले की उस योजना पर फिर से विचार करने की प्लानिंग कर रहा है, जिसमें देश में प्लास्टिक के नोट को जारी करने की तैयारी थी.
इसकी एक वजह और खास कारण यह बताया जा रहा है कि हर साल लाखों की संख्या में कागज के नोट खराब हो जा रहे हैं. इससे आरबीआई को नुकसान उठाना पड़ रहा है. बैंक के द्वारा यह ख्याल ऐसे समय में आया है, जब दुनिया में कई प्रकार के भू-राजनीतिक तनाव देखे जा रहे हैं. हालांकि, अगर भारत में प्लास्टिक के नोट जारी कर दिए जाते हैं या फिर इसको जारी करने की तैयारी की जाती है तो ऐसा दुनिया में पहली बार करने वाला देश भारत नहीं है. इससे पहले भी कई देशों में प्लास्टिक के नोट चल रहे हैं.
अब आइए जानते हैं कि आखिरकार आरबीआई देश में प्लास्टिक के नोट को क्यों चलाने की तैयारी कर रहा है. इसके साथ ही जानेंगे कि इससे पहले केंद्रीय बैंक ने देश में प्लास्टिक के नोट को कब जारी करने की प्लानिंग की थी, इसकी खास बातें या फायदे क्या हैं. इसके साथ ही जानेंगे कि भारत से पहले दुनिया के किन-किन देशों में प्लास्टिक के नोट चल रहे हैं. हम इन सभी पहलुओं को जानेंगे लेकिन शुरुआत अमेरिकी डॉलर के मुकाबले हालिया भारत की करेंसी रुपये की स्थिति से करेंगे.

डॉलर के मुकाबले रुपये में 73 पैसे की तेजी
शनिवार और आज रविवार की छुट्टी को लेकर बाजार बंद हैं. अब यह सोमवार को खुलेगा. इस बीच बीते कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार की बात करें तो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय करेंसी रुपये में 73 पैसे की तेजी दिखी. शुक्रवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.77 पर खुला, फिर दिन के दौरान 94.85 के उच्च स्तर और 95.78 के निम्न स्तर को छुआ.
वहीं, कारोबारी सत्र के अंत में, रुपया 94.85 पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से 73 पैसे अधिक था. गुरुवार को बकरीद के अवसर पर मार्केट बंद था. वहीं बुधवार को रुपये में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 12 पैसे की तेजी दिखी थी और यह तब 95.58 पर बंद हुआ था.
एक्सपर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर नए सिरे से बनी उम्मीदों ने बाजार की भावनाओं को बढ़ावा दिया और यही वजह रही कि रुपये में मजबूती आई. न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, एचडीएफसी सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार ने कहा कि कच्चे तेल की गिरती कीमतों और आरबीआई द्वारा संभावित हस्तक्षेपों से रुपये को मजबूती मिली और इसने एशियाई मुद्राओं की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया.
बता दें कि गुरुवार को अमेरिका और ईरान के वार्ताकारों ने युद्धविराम को 60 दिनों के लिए बढ़ाने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता का एक नया दौर शुरू करने के लिए एक अस्थायी समझौते पर सहमति व्यक्त की थी. फॉरेक्स कारोबारियों का कहना है कि अब सबका ध्यान 3 से 5 जून को होने वाली आरबीआई मौद्रिक नीति समिति की बैठक पर केंद्रित हो गया है.

भारत का सोने से ‘अटूट नाता’: हर साल 700 टन गोल्ड इंपोर्ट करने की क्या है असली कहानी?
आरबीआई क्यों लाएगा प्लास्टिक के नोट?
विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, देश का केंद्रीय बैंक आरबीआई भारत में एक नई योजना को शुरू करने पर विचार कर रहा है. इसके तहत वह देश में प्लास्टिक के नोट को लाने की तैयारी करेगा. देश में भारतीय करेंसी की छपाई रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के द्वारा की जाती है. अभी की जो व्यवस्था है, उसमें यह केंद्रीय बैंक कागज के नोट को छापता है. लेकिन अब इसकी तैयारी कुछ अलग करने की है. जानकारी के अनुसार, आरबीआई देश में प्लास्टिक के नोट लाने पर फिर से विचार कर रहा है.
आंकड़ों के अनुसार, तय नियम और समय के साथ नोटों की छपाई होती है. लेकिन इस बीच आरबीआई को लाखों पुराने और फट्टे नोट भी बाजार या लोगों के पास से बैंक के जरिए मिलते हैं. इन खराब नोटों के आने से केंद्रीय बैंक को नुकसान होता है क्योंकि ये दोबारा चलन में नहीं आ पाते हैं. इतना ही नहीं इन नोटों के बदले केंद्रीय बैंक को नए नोट छापने पड़ते हैं. इससे उसकी लागत बढ़ जाती है. आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में केंद्रीय बैंक के द्वारा भारत की करेंसी के नोट को छापने का खर्च करीब 6372.8 करोड़ रुपये था, जो इससे पिछले वित्त वर्ष यानी कि 2023-24 में करीब 5101.4 करोड़ रुपये था.

अब हम अगर खराब नोटों के चलन से बाहर जाने के आंकड़ों को देखें तो वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 2.38 लाख के खराब नोटों को बाहर करना पड़ा. वहीं, 2023-24 में इनकी संख्या 2.12 लाख थी. इन आंकड़ों से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि नोटों की छपाई और खराब नोटों की संख्या में बढ़त दर्ज की गई. इसको भी देखते हुए आरबीआई देश में अब प्लास्टिक के नोट लाने का विचार कर रहा है.
पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सरकार का बड़ा फैसला, इन सामानों पर घटाई एक्सपोर्ट ड्यूटी
2012 में प्लास्टिक के नोट को लाने की थी तैयारी
केंद्रीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) आज से करीब 14 साल पहले देश में प्लास्टिक के नोट को चलाने के लिए तैयारी की थी. बैंक ने इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट पर भी काम शुरू किया था. तब की केंद्र सरकार ने देश के पांच शहरों जयपुर, कोच्चि, शिमला, मैसुरू और भुवनेश्वर में इसकी मंजूरी दी थी. सरकार ने इसके लिए 10 रुपये के करीब एक अरब पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दी थी. लेकिन तकनीकी खराबी और दिक्कतों की वजह से इसकी ट्रॉयल को रोक दिया गया था. जानकारी के अनुसार, अब इन दिक्कतों को खत्म कर दिया गया है और एक बार फिर से देश में प्लास्टिक के नोट को चलाने के लिए आरबीआई विचार कर रहा है.

India-US Deal: ट्रंप, टैरिफ और टेंशन; अब ट्रेड डील पर लगेगी मुहर! जानें अभी तक क्या-क्या हुआ
प्लास्टिक नोट के फायदे
प्लास्टिक के नोट के फायदे की बात करें तो सबसे अच्छी बात यह है कि बारिश या पानी से इसे कोई नुकसान नहीं होगा. आज के कागज के नोट जो अधिक पानी में डूबने से फट तक जाते हैं, वहीं प्लास्टिक का नोट एकदम सही सलामत रहेगा. दूसरी चीज कि ये नोट आज के कागज के नोट के मुकाबले अधिक समय तक चल सकते हैं. इससे आरबीआई पर नोट के बदले नोट बनाने पर अधिक और बार-बार खर्च नहीं करना पड़ेगा. कागज के नोट के मुकाबले प्लास्टिक के नोट मजबूत होते हैं और गंदगी का इनपर कोई असर नहीं होता है. इनके फटने या पानी से गलने का डर नहीं होता है.
इनकी खासियत की बात करें तो पॉलिमर बैंक नोट पतली और लचीली प्लास्टिक पर छपते हैं. नोटों की सुरक्षा के लिए इनमें आधुनिक तकनीक के जरिए कई फीचर भी शामिल किए जा सकते हैं. इनकी ब्लैक मार्केटिंग पर भी नजर रखी जा सकती है. खास बात यह है कि माइक्रो-ऑप्टिक होलोग्राम और स्पेशल स्याही के कारण इन नोटों की नकल करना या नकली छपाई करना बहुत मुश्किल है.
ये नोट काफी हल्के होते हैं और आप अपनी जेब में किसी भी तरह से मोड़कर रख सकते हैं. इनके अलावा भी इसके और भी कई सारे फायदे हैं. अगर प्लास्टिक के नोट भारत में चलाए जाते हैं तो इससे देश की करेंसी के क्षेत्र में एक अलग ही क्रांति दिख सकती है और एक बड़ा बदलाव हो सकता है.

सेंसेक्स की टॉप 10 कंपनियों में से 7 का मार्केट कैप 7.54 लाख करोड़ घटा, देखें Full List
दुनिया के किन देशों में प्लास्टिक के नोट?
भारत अगर अपने यहां प्लास्टिक के नोट को जारी करता है और आम जनता के लिए चलन में लाता है तो यहां के लिए यह एक बड़ा कदम होगा. देश के लिए एक नई चीज भी होगी, लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि दुनिया में ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है कि जब कोई देश अपने यहां प्लास्टिक के नोट को चलाने या जारी करने की प्लानिंग करे. भारत से पहले दुनिया के ऐसे कई देश हैं, जहां पर कई वर्षों से प्लास्टिक के नोटों का इस्तेमाल वहां की करेंसी के रूप में किया जाता रहा है.
इनमें सबसे ऊपर नाम ऑस्ट्रेलिया का आता है. रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में साल 1998 में ही प्लास्टिक के नोटों का इस्तेमाल शुरू कर दिया गया था. यह ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश बना था. इसके अलावा ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, थाईलैंड, कनाडा, मलेशिया, रोमानिया, वियतनाम समेत करीब 50 से अधिक देश ऐसे हैं, जो अपने यहां प्लास्टिक के नोटों का इस्तेमाल करते हैं.
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, संभावना जताई जा रही है कि अब भारत भी जल्द ही अपने यहां प्लास्टिक के नोटों के चलन के लिए प्रक्रिया को शुरू कर सकता है. हालांकि, इसकी अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. लेकिन कई जानकार यह अनुमान लगा रहे हैं कि देश में आने वाले समय में प्लास्टिक के नोट आने की संभावना है. अगर भारत सच में अपने यहां प्लास्टिक के नोटों को शुरू कर देता है और आम जनता इसका इस्तेमाल करने लगती है तो अपना देश भी दुनिया के उन तमाम देशों में शामिल हो जाएगा, जहां पर आज के समय में प्लास्टिक के नोटों का इस्तेमाल किया जा रहा है.
