Rupee vs Dollar: आज मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया बिना किसी बड़े बदलाव के खुला. यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 3 पैसे बढ़कर 95.34 पर पहुंच गया. ग्लोबल रिस्क सेंटीमेंट में सुधार के बीच अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में आई व्यापक कमजोरी से मिले सपोर्ट का असर इंपोर्टर्स की डॉलर की मांग के कारण कम हो गया.
वहीं, फॉरेक्स ट्रेडर्स ने कहा कि तेल की कम कीमतें और कमजोर अमेरिकी डॉलर का असर इंपोर्टर्स की डॉलर की मांग पर भारी पड़ा. अब मार्केट में शामिल लोग आगे की दिशा के लिए RBI MPC के फैसले और इस हफ्ते के आखिर में आने वाले अहम अमेरिकी इकोनॉमिक डेटा पर ध्यान दे रहे हैं.
रुपये में 3 पैसे की बढ़त
न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 95.35 पर खुला और फिर 95.34 तक पहुंचा, जो पिछले बंद भाव से 3 पैसे की बढ़त है. बता दें कि बीते कारोबारी सत्र यानी सोमवार को रुपया अमेरिकी करेंसी के मुकाबले 95.47 पर बंद हुआ था.
रुपये को कैसे मिली मजबूती?
एक्सपर्ट और फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स LLP के ट्रेजरी हेड और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि रुपया बिना किसी बड़े बदलाव के खुला और 95 से 95.50 के दायरे में रह सकता है क्योंकि तेल और डॉलर इंडेक्स भी काफी स्थिर हैं, जबकि मार्केट बुधवार को RBI की मॉनेटरी पॉलिसी के फैसले का इंतजार कर रहा है.
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में व्यापक कमजोरी, ग्लोबल रिस्क सेंटीमेंट में सुधार और भारतीय इक्विटी में लगातार विदेशी पोर्टफोलियो इनफ्लो ने भी रुपये को सपोर्ट किया. उन्होंने कहा कि इसके अलावा, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में एक्टिव रहा (उसे प्रीमियम मिला), जिससे उतार-चढ़ाव को कम करने और पॉजिटिव सेंटीमेंट को मजबूत करने में मदद मिली.
डॉलर दबाव में रहा- एक्सपर्ट
इस बीच, डॉलर इंडेक्स, जो छह करेंसी की बास्केट के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है, 99.99 पर ट्रेड कर रहा था, जो 0.09 प्रतिशत की मामूली बढ़त है. डॉलर इंडेक्स मनोवैज्ञानिक रूप से अहम 100 के लेवल से नीचे आ गया. भंसाली ने कहा कि डॉलर दबाव में रहा क्योंकि हाल के कमजोर अमेरिकी महंगाई डेटा के बाद इन्वेस्टर्स फेडरल रिजर्व के ज्यादा नरम रुख की उम्मीद कर रहे हैं.
कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट
जानकारी के अनुसार, ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स ट्रेड में 1.15 प्रतिशत बढ़कर 84.73 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था, लेकिन जुलाई में देखे गए 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर के हाई लेवल से इसमें तेज गिरावट आई है.
भंसाली ने कहा कि ब्रेंट की कीमतों में आई बड़ी गिरावट की वजह मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल तनाव का कम होना था, जिससे सप्लाई में रुकावट की चिंताएं कम हुईं. साथ ही, OPEC+ द्वारा ज्यादा प्रोडक्शन और ग्लोबल स्तर पर पर्याप्त सप्लाई की उम्मीदों ने भी बाजार में गिरावट का माहौल बनाया.
घरेलू शेयर बाजार का हाल
घरेलू इक्विटी बाजार की बात करें तो, शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 97 अंक चढ़कर 78,736.20 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 173.95 अंक गिरकर 24,600.35 पर आ गया. एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने सोमवार को नेट आधार पर 922.26 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे.
News Source: PTI
