Mirzapur: को लेकर विवाद अब दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच गया है. फिल्म के एक फाइट सीक्वेंस में महाराणा प्रताप की वीरता को समर्पित गाने ‘शूरवीर’ को बैकग्राउंड में इस्तेमाल किया गया है. अब इस पर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए इसे गलत बताया है. अदालत ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी CBFC को निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि, फिल्म के निर्माता की तरफ से गाने और सीन में बदलाव को लेकर दिए एक हफ्ते के अंदर फैसला लिया जाए. गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच इस मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी. सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि पहली नजर में ये प्रयोग ठीक नहीं लगता. साथ ही सवाल उठाया कि कहीं ऐसा तो नहीं कि हम हिंसा को ही महिमामंडित करने की कोशिश कर रहे हैं.
बैकग्राउंड में बजता ‘शूरवीर’
फिल्म के निर्माता की तरफ से पेश वकील ने अदालत को बताया कि ‘शूरवीर’ गाने का इस्तेमाल सिर्फ बैकग्राउंड में किया गया है. ये गाना फिल्म के क्लाइमेक्स में उस समय सुनाई देता है, जब लीड कैरेक्टर गुंडों से लड़ते हैं. निर्माता के वकील ने ये भी कहा कि फिल्म में किसी भी किरदार की तुलना किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व से नहीं की गई है. उनका कहना था कि ये कहानी दो गुटों के बीच संघर्ष की है. इसका अपराध से सीधे तौर पर कोई संबंध नहीं जोड़ा जाना चाहिए.
CBFC के सामने प्रस्ताव
सुनवाई के दौरान CBFC की तरफ से अदालत को बताया गया कि फिल्म के निर्माता ने खुद आगे बढ़कर सीन में जरूरी बदलाव करने का प्रस्ताव बोर्ड के सामने रखा है. अब CBFC इस प्रस्ताव पर जल्द फैसला लेगा. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी. इस बीच बदलाव के प्रस्ताव पर फैसला लेने का निर्देश दिया है.
क्या आरोप लगाए गए?
याचिकाकर्ता प्रशांत कुमार सिंह की PIL में दावा किया गया है कि ‘शूरवीर’ गाना महाराणा प्रताप को समर्पित है. इसे फिल्म के हिंसक दृश्यों के साथ इस्तेमाल करने से एक गलत मैसेज जा सकता है. याचिका में कहा गया है कि ‘मिर्जापुर: द मूवी’ अपराध, गैंगवार और हिंसक आपराधिक गतिविधियों से जुड़ी है. फिल्म में कालीन भईया समेत कई किरदारों को एक ऐसे आपराधिक साम्राज्य से जुड़ा दिखाया गया है. इसमें हथियारों का इस्तेमाल, ड्रग्स, वसूली, धमकी और हत्या शामिल हैं. याचिकाकर्ता का तर्क है कि ऐसे दृश्यों के साथ महाराणा प्रताप के साहस, सम्मान और बलिदान से जुड़े गीत का इस्तेमाल दर्शकों के मन में दोनों के बीच गलत संबंध पैदा कर सकता है. फिलहाल गेंद CBFC के पाले में है. अब देखना होगा कि बोर्ड निर्माता के बदलाव वाले प्रस्ताव को मंजूरी देता है या इसे लेकर दूसरा फैसला करता है.
News Source: PTI
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