Temple Gold Monetization: सरकार के द्वारा कहा गया है कि अपुष्ट जानकारी फैलाने से अनावश्यक भ्रम पैदा होता है और जनता गुमराह हो सकती है. सरकार ने सभी लोगों से आग्रह किया है कि वे केवल अधिकृत चैनलों के माध्यम से जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें.
Temple Gold Monetization: पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने भारत सहित दुनिया के कई देशों को काफी प्रभावित किया है. अमेरिका और ईरान के बीच इस तनातनी ने दुनिया की एनर्जी सप्लाई के लिए अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बाधित कर दिया है. इस वजह से दुनिया के कई देशों समेत भारत में भी तेल और गैस के दाम बढ़ गए हैं. बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर रखने के लिए नागरिकों से अपील की थी कि वे अगले एक साल तक सोने की खरीदारी न करें. उन्होंने लोगों से अगले एक साल तक के लिए विदेशी यात्रा से परहेज करने की भी अपील की थी.
इस दौरान यह खबर या यूं कहें कि यह अफवाह फैलाई गई कि सरकार देश के मंदिरों में रखे सोने को बेचकर पैसे कमाने की योजना बना रही है. कई लोगों ने इसे देश की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने वाला भी कदम बताया. लेकिन इस बीच केंद्र की मोदी सरकार की ओर से इस अफवाह पर बड़ी जानकारी दी गई है. आइए जानते हैं सरकार का क्या कहना है.
सोने को बेचकर पैसे बनाने कोई योजना नहीं- सरकार
मंगलवार को सरकार ने सभी अफवाहों और अटकलों का खंडन करते हुए कहा कि वह देश भर में मंदिर ट्रस्टों या किसी भी धार्मिक संस्था के पास मौजूद सोने के मुद्रीकरण (Gold Monetization) की योजना शुरू करने की योजना नहीं बना रही है. जी हां, वित्त मंत्रालय ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि इस तरह की अफवाहें पूरी तरह से झूठी, भ्रामक और निराधार हैं.
इसमें यह भी स्पष्ट किया गया कि मंदिर के टावरों, दरवाजों या अन्य मंदिर संरचनाओं पर लगी सोने की प्लेटों को ‘भारत के रणनीतिक स्वर्ण भंडार’ के रूप में माना जाएगा, ऐसे दावे झूठे, भ्रामक और पूरी तरह से निराधार हैं. मंत्रालय ने देश के नागरिकों से ऐसी अफवाहों पर विश्वास न करने और उन्हें फैलाने से बचने का आग्रह किया है.
सरकार के द्वारा कहा गया है कि अपुष्ट जानकारी फैलाने से अनावश्यक भ्रम पैदा होता है और जनता गुमराह हो सकती है. सरकार ने सभी लोगों से आग्रह किया है कि वे केवल अधिकृत चैनलों के माध्यम से जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें. इसमें आगे कहा गया है कि नीतिगत निर्णयों या सरकारी योजनाओं से संबंधित कोई भी जानकारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी वेबसाइटों और सत्यापित सार्वजनिक संचार प्लेटफार्मों के माध्यम से साझा की जाएगी.
मंदिरों के सोने को मुद्रीकरण का था प्रस्ताव
मिली जानकारी के अनुसार, बीते दिनों इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) ने देश में सोने की मांग को कम करने के लिए करीब 1000 टन ‘निष्क्रिय’ मंदिर के सोने के मुद्रीकरण योजना का प्रस्ताव रखा था. उन्होंने इससे उम्मीद जताई थी कि इस प्रस्ताव से आयात पर प्रेशर कम हो सकता है और छोटे ज्वेलरों, कारीगरों व मजदूरों को भी सुरक्षित रखने में मदद हो सकती है. हालांकि, सरकार की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि मंदिरों में रखे सोने को मुद्रीकरण योजना की कोई प्लानिंग नहीं है. इस तरह की जानकारी केवल अफवाह है और इस पर विश्वास न करें.
यह भी पढ़ें: Stock Market में पैसा बरसा! IT शेयर्स के दम पर Sensex जबरदस्त दौड़ा, Nifty भी उछला
News Source: PTI
