Home Top News अमेरिका, चीन या रूस, भारत का सबसे अधिक किसके साथ ट्रेड? जानें पिछले 5 वर्षों के आंकड़े

अमेरिका, चीन या रूस, भारत का सबसे अधिक किसके साथ ट्रेड? जानें पिछले 5 वर्षों के आंकड़े

by Amit Dubey 19 May 2026, 3:17 PM IST (Updated 19 May 2026, 4:40 PM IST)
19 May 2026, 3:17 PM IST (Updated 19 May 2026, 4:40 PM IST)
India Top Trade Partners

India’s Top Trade Partners: पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने पूरी दुनिया समेत भारत को भी काफी प्रभावित किया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, अमेरिका और ईरान के इस तनाव का केंद्र बना हुआ है. यहां दोनों देशों ने एक तरह से नाकाबंदी कर रखी है. यह समुद्री रास्ता दुनिया के एनर्जी सेक्टर (गैस, तेल) के लिए काफी अहम है क्योंकि यहां से पूरी दुनिया की करीब 20 फीसदी एनर्जी सप्लाई का काम होता रहा है. ईरान और अमेरिका की इस तनाव रूपी जंग ने इस रास्ते को एक तरह से बंद और बाधित कर दिया है. इस वजह से भारत समेत दुनिया के कई देशों में महंगाई बढ़ गई है. तेल और गैस के दाम आसमान छू रहे हैं.

पश्चिम एशिया तनाव को खत्म होने में आगे और कितना समय लगेगा, इसकी कोई सटीक जानकारी फिलहाल किसी के पास नहीं है, लेकिन इतनी तो संभावना जरूर है कि हाल-फिलहाल में यह संघर्ष थमता हुआ नहीं दिख रहा है. इस तनाव का भारत और इसके विदेशी मुद्रा भंडार पर जितना संभव हो सके, उतना कम प्रभाव पड़े, इसको लेकर भारत सरकार कई सारे कदम उठा रही है. बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नागरिकों से कुल 7 अपील की थी. इसमें अगले एक साल तक सोने की खरीदारी न करना, अगले एक साल तक के लिए विदेशी यात्रा से परहेज करना समेत पेट्रोल-डीजल का कम प्रयोग कर पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करना, वर्क फ्रॉम होम और विदेशी की जगह स्वदेशी सामानों का यूज करना शामिल है.

पीएम की इस अपील का देश के नागरिकों के द्वारा अमल में लाए जाने की कोशिश भी दिख रही है. जानकारों का मानना है कि जितनी अधिक सोने की खरीदारी कम होगी, पेट्रोल, डीजल और गैस का कम इस्तेमाल होगा, विदेशी यात्रा कम होगी, इससे देश का उतना ही पैसा डॉलर के रूप में बाहर जाने से बच सकेगा. इसका सीधा फायदा भारतीय विदेशी मुद्रा भंडार पर देखने को मिलेगा. मतलब कि एक तरह से कहा जा सकता है कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए और भी तेजी के साथ काम करने की तैयारी होनी चाहिए. दूसरे पर निर्भरता को कम करना होगा ताकि देश की अर्थव्यवस्था, विदेशी मुद्रा भंडार और शेयर बाजार भी मजबूत हो सके.

इन सभी के बीच भारत का अन्य देशों के साथ व्यापार की खास चर्चा हो रही है. लोग जानना चाह रहे हैं कि भारत का विश्व के प्रमुख देशों के साथ कितने का व्यापार होता है, वे यह भी जानना चाहते हैं कि देश के प्रमुख और टॉप ट्रेड पार्टनर कौन-कौन से देश हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए हम यहां दुनिया में भारत के टॉप 5 ट्रेड पार्टनर देशों के बारे में बताने जा रहे हैं. इसके साथ ही हम यह जानेंगे कि इनके साथ भारत कितने रुपये का आयात और कितने रुपये का निर्यात करता है. इतना ही नहीं हम पिछले 5 वर्षों (वित्तीय वर्ष) में भारत के टॉप 5 ट्रेड वाले देशों के बारे में भी जानेंगे, तो चलिए इसकी शुरुआत करते हैं…

भारत का अमेरिका के साथ सबसे अधिक ट्रेड

भारत के साथ शीर्ष 5 ट्रेड वाले देशों में सबसे अधिक व्यापार अमेरिका के साथ होता है. बता दें कि बीते साल अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी तक का टैरिफ लगा दिया था. इसमें 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ भी शामिल था, जो भारत पर रूस से तेल की खरीदारी करने पर लगाया गया था. इस वजह से भारतीय सामानों को अमेरिका में भेजने पर काफी अधिक टैक्स देना पड़ता था. लेकिन 2 फरवरी 2026 को पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई ऐतिहासिक ट्रेड डील और बातचीत के बाद 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ को हटा दिया गया था और मूल टैरिफ को घटाकर मात्र 18 फीसदी कर दिया गया था. उसके बाद 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ आदेश के खिलाफ एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया. इस फैसले में ट्रंप के टैरिफ वाले आदेश को असंवैधानिक करार दिया गया. इसके बाद अमेरिका के द्वारा दुनिया के तमाम देशों पर 10 से 15 फीसदी का नया और अस्थायी ग्लोबल टैरिफ लागू कर दिया है. भारत पर यह 10 फीसदी का है.

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भारत और अमेरिका के व्यापार में पीछे भी कई चुनौतियां आती रही हैं, लेकिन इसके बावजूद भी दोनों देशों के बीच व्यापार बड़ा रहा है. वाणिज्य मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर भारत का अन्य देशों के साथ ट्रेड, एक्सपोर्ट और इंपोर्ट के आंकड़े दिए गए हैं. इनमें से सबसे ताजा आंकड़ा फिलहाल वित्त वर्ष 2024-25 का है. इसके अनुसार, भारत का सबसे अधिक ट्रेड अमेरिका के साथ होता है. भारत और अमेरिका के बीच कुल ट्रेड 9 लाख 91 हजार 85 करोड़ रुपये का है. इनमें भारत के द्वारा अमेरिका को करीब 6 लाख 41 हजार 766 करोड़ रुपये (641766.35 करोड़ रुपये)के सामान का निर्यात होता है. मतलब कि भारत इन सामानों को अमेरिका में भेजता है. वहीं, अमेरिका से भारत करीब 3 लाख 49 हजार 318.73 करोड़ रुपये के सामानों का आयात करता है.

चीन के साथ 9,80,352.51 करोड़ रुपये का ट्रेड

भारत का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर देश चीन है. इसके साथ कुल 9 लाख 80 हजार 352.51 करोड़ रुपये का ट्रेड है. ये आंकड़े 2024-25 वित्त वर्ष के हैं, जो अभी वाणिज्य मंत्रालय की आधिकारिक साइट पर मौजूद हैं. इसमें भारत, चीन से 8 लाख 42 हजार 386.06 करोड़ रुपये के सामानों का आयात करता है. वहीं, चीन को भारत 1 लाख 37 हजार 966.45 करोड़ रुपये सामानों को भेजता (एक्सपोर्ट) करता है. भारत और चीन के बीच 2024-25 का चालू व्यापार घाटा करीब 7 लाख 4 हजार 419.60 करोड़ रुपये का रहा है. जब किसी दो देशों के बीच आयात और निर्यात की राशि समान होती है तो इनका व्यापार घाटा शून्य होता है. वहीं, निर्यात से अधिक आयात करने पर व्यापार घाटा बढ़ता है.

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तीसरे पर यूएई और पांचवें पर है सऊदी अरब

भारत के साथ सबसे अधिक व्यापार करने के मामले में तीसरे स्थान पर यूएई और पांचवें स्थान पर सऊदी अरब है. यहां हमने अभी चौथे स्थान रूस का जिक्र नहीं किया है. यूएई और सऊदी अरब के साथ ट्रेड की जानकारी देने के बाद हम विस्तार से रूस की भी बात करेंगे. भारत के साथ सबसे अधिक व्यापार करने के मामले में तीसरे स्थान पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) है. यूएई के साथ भारत का कुल व्यापार (वित्त वर्ष 2024-25 में) 6 लाख 92 हजार 920.54 करोड़ रुपये का रहा है. इनमें भारत का एक्सपोर्ट 2 लाख 95 हजार 94.37 करोड़ रुपये का है. वहीं, भारत का यूएई से आयात (इंपोर्ट) 3 लाख 97 हजार 826.18 करोड़ रुपये का रहा है. भारत का यूएई के साथ व्यापार घाटा करीब 1 लाख 2 हजार 731 करोड़ रुपये का रहा है.

भारत के साथ सबसे अधिक ट्रेड करने के मामले में सऊदी अरब पांचवें स्थान पर है. इन दोनों देशों के बीच कुल ट्रेड 3 लाख 55 हजार 830.69 करोड़ रुपये का रहा है. इसमें भारत का व्यापार घाटा 1 लाख 64 हजार 401.76 रुपये का है. भारत का एक्सपोर्ट 95 हजार 714.47 करोड़ रुपये और इंपोर्ट 2 लाख 60 हजार 116.23 करोड़ रुपये का रहा है.

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रूस-भारत व्यापार और 25% अतिरिक्त टैरिफ

अब बात रूस और भारत के व्यापार की करते हैं. ताजा मामला देखें तो पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत लगातार रूस से कच्चे तेल की खरीदारी कर रहा है. भारत का कहना है कि अमेरिका प्रतिबंध हटाए या फिर लगाए, इसका प्रवाह किए बगैर भारत राष्ट्र हित में रूस से अधिक से अधिक मात्रा में तेल की खरीदारी को जारी रखेगा. बता दें कि बीते चार साल से अधिक समय से रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध जारी है. इसको देखते हुए अमेरिका ने रूस पर कई सारे प्रतिबंध लगाए थे. इसके लपेटे में तब भारत भी आया था. अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त 25 फीसदी का टैरिफ लगा दिया था क्योंकि भारत रूस से तेल की खरीदारी कर रहा था.

ट्रंप का मानना था कि भारत के द्वारा तेल की खरीदारी से मिलने वाले पैसों का इस्तेमाल रूस और पुतिन यूक्रेन के खिलाफ जंग में कर रहे हैं. ट्रंप के इस अतिरिक्त टैरिफ की वजह से भारत पर असर भी पड़ा था, लेकिन ट्रंप और पीएम मोदी की मीटिंग ने इस अतिरिक्त टैरिफ को हटाने में बड़ी भूमिका निभाई. उसके बाद इस साल फरवरी से ईरान और अमेरिका में जंग शुरू हो गई. इस वजह से तेल के आने-जाने के लिए प्रमुख समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बाधित हो गया. तब ट्रंप ने भारत को रूस से तेल खरीदने की अस्थाई छूट दे दी. मार्च 2026 में भारत को अमेरिकी प्रतिबंध से छूट मिल गई और ट्रंप ने 30 दिनों तक रूस से तेल की खरीदारी करने की बात कह दी. उसके बाद उन्होंने इस छूट को बढ़ाकर 16 मई कर दिया था. 16 मई को बीते करीब 3 दिन हो गए हैं, लेकिन अब भारत का कहना है कि वह रूस से तेल की अपनी खरीदारी को आगे भी जारी रखेगा. वह किसी भी अमेरिकी प्रतिबंध और टैरिफ से प्रभावित नहीं होगा.

रूस के साथ 5 लाख 41 हजार 674.30 करोड़ का ट्रेड

वित्त वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत का रूस के साथ 5 लाख 41 हजार 674.30 करोड़ रुपये का ट्रेड है. इनमें भारत 35 हजार 288.03 करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट करता है. वहीं, रूस, भारत को 5 लाख 6 हजार 386.27 करोड़ रुपये के सामानों को भेजता है. रूस के साथ भारत का व्यापार घाटा 4 लाख 71 हजार 98.23 करोड़ रुपये का है.

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पिछले 5 वर्षों के आंकड़े

वित्त वर्ष 2023-24 (कुल ट्रेड)

  1. भारत-अमेरिका: 10 लाख 38 हजार 772.46 करोड़ रुपये
  2. भारत-चीन: 9 लाख 13 हजार 705.62 करोड़ रुपये
  3. भारत-यूएई: 6 लाख 81 हजार 258.02 करोड़ रुपये
  4. भारत-सऊदी अरब: 4 लाख 23 हजार 843.24 करोड़ रुपये
  5. भारत-रूस: 3 लाख 99 हजार 466 करोड़ रुपये

वित्त वर्ष 2022-23 (कुल ट्रेड)

  1. भारत-अमेरिका: 8 लाख 90 हजार 994.20 करोड़ रुपये
  2. भारत-चीन: 8 लाख 63 हजार 338.61 करोड़ रुपये
  3. भारत-यूएई: 5 लाख 43 हजार 628.09 करोड़ रुपये
  4. भारत-सऊदी अरब: 3 लाख 19 हजार 987.81 करोड़ रुपये
  5. भारत-इराक: 2 लाख 56 हजार 387.61 करोड़ रुपये

वित्त वर्ष 2021-22 (कुल ट्रेड)

  1. भारत-चीन: 6 लाख 39 हजार 697.39 करोड़ रुपये
  2. भारत-अमेरिका: 5 लाख 95 हजार 569.24 करोड़ रुपये
  3. भारत-यूएई: 3 लाख 19 हजार 684.46 करोड़ रुपये
  4. भारत-हांगकांग: 1 लाख 87 हजार 419.70 करोड़ रुपये
  5. भारत-सऊदी अरब: 1 लाख 63 हजार 117.51 करोड़ रुपये

वित्त वर्ष 2020-21 (कुल ट्रेड)

  1. भारत-अमेरिका: 6 लाख 29 हजार 529 करोड़ रुपये
  2. भारत-चीन: 5 लाख 79 हजार 198.08 करोड़ रुपये
  3. भारत-यूएई: 4 लाख 18 हजार 684.84 करोड़ रुपये
  4. भारत-सऊदी अरब: 2 लाख 34 हजार 512.09 करोड़ रुपये
  5. भारत-हांगकांग: 1 लाख 97 हजार 751.42 करोड़ रुपये

वित्त वर्ष 2019-20 (कुल ट्रेड)

  1. भारत-अमेरिका: 6 लाख 15 हजार 034.17 करोड़ रुपये
  2. भारत-चीन: 6 लाख 09 हजार 368.39 करोड़ रुपये
  3. भारत-यूएई: 4 लाख 18 हजार 761.70 करोड़ रुपये
  4. भारत-सऊदी अरब: 2 लाख 38 हजार 249.15 करोड़ रुपये
  5. भारत-हांगकांग: 2 लाख 17 हजार 089.33 करोड़ रुपये

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