Cyber Fraud in India: इंटरनेट, ऑनलाइन पेमेंट और मोबाइल बैंकिंग के जमाने में आपको हर सुविधा फोन पर मिल जाती है, लेकिन सुविधाओं के साथ सतर्क रहना भी जरूरी है. डिजिटल दुनिया के साथ अब अपराध करने का तरीका भी डिजिटल हो गया है. चोर आपकी पॉकेट से पैसे नहीं निकालते, बल्कि आपका पूरा बैंक अकाउंट ही खाली कर देते हैं और आप कुछ समझें, तब तक बहुत देर हो जाती है. साइबर अपराधी आपको बहला-फुसला कर, लालच देकर या डरा-धमकाकर आपकी जिंदगी भर की कमाई को कुछ सेकंड में गायब कर सकते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में हर 37 सेकंड में कोई न कोई शख्स इन अपराधियों का शिकार बनता है.
बैंक अकाउंट से पैसे उड़ाने से लेकर, लोगों को नकली इन्वेस्टमेंट के वादे करके फंसाने, OTP और KYC का इस्तेमाल करके ठगने या सोशल मीडिया के जरिए लोगों को फंसाने तक, साइबर अपराधियों के तरीके लगातार बदल रहे हैं. सबसे चिंता की बात यह है कि 2025 में पूरे देश में साइबर फ्रॉड से लोगों को लगभग ₹22,495 करोड़ का नुकसान हुआ. यह आंकड़ा न सिर्फ फाइनेंशियल नुकसान दिखाता है बल्कि लाखों लोगों के भरोसे और डिजिटल सिक्योरिटी पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है. साइबर क्रिमिनल्स अब नई टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके लोगों को पहले से कहीं ज्यादा आसानी से टारगेट कर रहे हैं.
सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि बिजनेसमैन से लेकर सरकारी अधिकारी तक इनके झांसे में आ जाते हैं. हाल ही में पूर्व प्रधानमंत्री रहे इंदर कुमार गुजराल के बेटे नरेश गुजराल के साथ 7.8 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हुई है. इस खबर में आप आंकड़ों की मदद से जानेंगे कि साइबर क्राइम कितना गंभीर खतरा बन चुका है और सबसे जरूरी बात आप खुद को इससे कैसे बचा सकते हैं?
पूर्व प्रधानमंत्री के बेटे के साथ ठगी
पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल के साथ कथित तौर पर 7.8 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हुई है. पुलिस के अनुसार, यह धोखाधड़ी 12 जून से 16 जून के बीच हुई है. इस दौरान, जालसाजों ने नरेश गुजराल की तस्वीर का इस्तेमाल करके एक ऑनलाइन मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर खाता बनाया. उसके बाद अपराधियों ने उनके एक कर्मचारी को मैसेज भेजकर निर्देश दिया कि वह रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) के माध्यम से एक बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करे. पुलिस ने बताया कि गुजराल द्वारा वित्तीय पहुंच प्राप्त कर्मचारी ने निर्देशों को वैध मानते हुए चार दिनों के दौरान चार अलग-अलग आरटीजीएस लेनदेन किए, जिससे 7.8 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. इस धोखाधड़ी के संबंध में दिल्ली पुलिस में एक ई-एफआईआर दर्ज कराई गई, जिसके बाद जांच शुरू की गई.

जानकारी के मुताबिक, इस घोटाले का पर्दाफाश 16 जून को हुआ, जब गुजराल की बेटी को इन लेन-देन के बारे में पता चला, जिसने तुरंत अपने पिता से इसके बारे में बताया. पुलिस ने बताया कि नरेश गुजराल ने इस तरह के किसी भी निर्देश जारी करने से इनकार किया और तबादलों के बारे में किसी भी तरह की जानकारी होने से इनकार किया, जिसके बाद परिवार और कंपनी के कर्मचारियों को एहसास हुआ कि वे घोटाले का शिकार हो गए हैं. तुरंत कार्रवाई से अधिकारियों को धोखाधड़ी से जुड़ी कई खातों पर रोक लगाकर पैसे का लगभग 70 प्रतिशत, यानी लगभग 4 करोड़ रुपये फ्रीज करने में मदद मिली.
अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि जब देश के नेता तक इन साइबर अपराधियों से बच नहीं पा रहे हैं, तो आम आदमी को फंसाना इनके लिए कितना आसान है. आपकी एक छोटी सी गलती आपकी जीवन भर की सेविंग उड़ा सकती है. अब जरा इन आंकड़ों पर गौर करिए.
एक साल में 22,495 करोड़ का नुकसान
केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक, साल 2025 में साइबर फ्रॉड से भारतीयों को 22,495 करोड़ रुपए का भारी नुकसान हुआ है. हालांकि 8,189 करोड़ रुपये को फ्रीज करवा दिया गया या पीड़ितों को वापस किया गया. इस दौरान, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर साइबर फ्रॉड से जुड़ी 24.02 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गईं. इससे पहले साल 2024 में 22,846 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था और लगभग 19.18 लाख शिकायतें रिपोर्ट की गई थीं. साल 2023 में 7,465 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ और 13.1 लाख शिकायतें दर्ज की गई. इसके अलावा पिछले पांच सालों में अलग-अलग तरह के साइबर फ्रॉड से 55,659 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है.
सिर्फ 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, कुल नुकसान का 77 प्रतिशत फर्जी इन्वेस्टमेंट स्कैम के कारण हुआ. वहीं सरकारी अधिकारी बनकर डराने वाले स्कैम में 8 प्रतिशत का नुकसान हुआ.7 प्रतिशत नुकसान क्लोनिंग और ओटीपी फ्रॉड से हुआ. इसके अलावा सेक्सटॉर्शन में 4 प्रतिशत, ई-कॉमर्स में 3 प्रतिशत और ऐप के जरिए 1 प्रतिशत का नुकसान हुआ. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये आंकड़े बताते हैं कि ऑनलाइन फ्रॉड एक मामूली अपराध से आगे बढ़कर एक गंभीर आर्थिक चुनौती बन गया है.
| वर्ष | पोर्टल पर आईं शिकायतें (NCRP Complaints) | थानों में दर्ज मामले (NCRB FIRs) | वित्तीय नुकसान (करोड़ रुपये में) |
|---|---|---|---|
| 2021 | 2,62,846 | ~52,974 | ₹551 करोड़ |
| 2022 | 6,94,446 | ~65,893 | ₹2,300 करोड़ |
| 2023 | 13,10,357 | ~86,128 | ₹7,465 करोड़ |
| 2024 | 19,18,835 | ~63,000 (अनुमानित) | ₹22,848 करोड़ |
| 2025 | 24,02,579 | ~65,000+ (अनुमानित) | ₹22,495 करोड़ |
| कुल योग | 65,89,063 (लगभग 65.89 लाख) | ~3,32,995 (लगभग 3.32 लाख) | ₹55,659 करोड़ |
कुल ₹55,659 करोड़ में से, लगभग 81% नुकसान (₹45,343 करोड़) सिर्फ पिछले दो सालों- 2024 और 2025 में हुआ. इससे पता चलता है कि हाल के दिनों में साइबर अपराध में तेजी से बढ़ोतरी हुई है.

हर 37 सेंकड में नया शिकार
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक साइबर क्राइम सम्मेलन में कहा था कि हर 37 सेकंड में एक व्यक्ति साइबर अपराध का शिकार हो रहा है और प्रति घंटे औसतन 100 लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं. दिसंबर 2025 तक गृह मंत्रालय ने 12 लाख से अधिक संदिग्ध सिम कार्ड रद्द करवाए और 3 लाख मोबाइल उपकरणों के IMEI को ब्लॉक किया. अब तक 20,853 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
महाराष्ट्र को हुआ सबसे ज्यादा नुकसान
राज्यवार आंकड़ों की बात करें, तो सबसे ज्यादा नुकसान महाराष्ट्र को हुआ है. 2,833,20 शिकायतों के साथ महाराष्ट्र में 3,203 करोड़ का नुकसान हुआ. इसके बाद कर्नाटक में 2,413 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ और 2,132,28 शिकायतें आईं. रिपोर्ट में कहा गया है कि तमिलनाडु में 1,897 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ और 1,232,90 शिकायतें आईं. वहीं उत्तर प्रदेश में 1,443 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ और 2,752,64 शिकायतें आईं. तेलंगाना में 1,372 करोड़ का नुकसान हुआ और 95,000 शिकायतें आईं. इन पांच राज्यों में देश के कुल साइबर फ्रॉड नुकसान का आधे से अधिक हिस्सा दर्ज किया गया.
साइबर क्राइम से निपटने में आने वाली चुनौतियां
साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई में कई तरह की चुनौतियां सामने आती हैं.
ज्यादातर पीड़ित साइबर फ्रॉड के बारे में रिपोर्ट ही नहीं करते, जिस कारण बहुत कम मामले ही शिकायत से आधिकारिक एफआईआर में बदल पाते हैं. लाखों में शिकायत आने के बावजूद केवल हजारों में एफआईआर हो पाती है, जिससे न्याय मिलना मुश्किल हो जाता है.
साइबर अपराधी फ्रॉड को अंजाम देने के लिए VPN और एन्क्रिप्टेड लेयर का इस्तेमाल करते हैं, जिससे लोकल पुलिस के लिए उन्हें ट्रेस करना मुश्किल हो जाता है. 2025 में भारतीय अस्पतालों पर हुए रैंसमवेयर हमलों की जांच रुक गई क्योंकि हमलावर वीपीएन जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर रहे थे.
एक राज्य में होने वाले अपराध में अक्सर दूसरे राज्य के बैंक अकाउंट और तीसरे राज्य के मोबाइल नंबर का इस्तेमाल होता है. जैसे दिल्ली में 2025 में हुआ एक स्कैम केरल के म्यूल अकाउंट और पश्चिम बंगाल में जारी सिम कार्ड से जुड़ा पाया गया, जिससे गिरफ्तारी की प्रक्रिया मुश्किल हो गई.
डिजिटल सबूतों को संभालने के लिए स्टेशन लेवल पर ट्रेंड साइबर फोरेंसिक एक्सपर्ट की कमी भी एक बड़ी चुनौती है. भारत में अब 459 डेडिकेटेड साइबर पुलिस स्टेशन हैं, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में जब्त डिजिटल डिवाइस की जांच करने वाले एक्सपर्ट की संख्या बहुत कम है, जिससे केस पेंडिंग रह जाता है.

साइबर फ्रॉड होने पर क्या करें?
साइबर फ्रॉड का शिकार होने पर अक्सर लोग घबरा जाते हैं. कई लोग अपने परिवार को बताने से डरते हैं, लेकिन आपके देर करने से पैसे रिकवर होने की संभावना कम हो जाती है. अगर आप किसी भी तरह के साइबर फ्रॉड का शिकार होते हैं तो घबराएं नहीं और तुरंत नेशनल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें. फ्रॉड के बाद पहले दो घंटे बहुत जरूरी होते हैं और इस दौरान तुरंत कार्रवाई करने से आपके पैसे वापस मिलने की सबसे ज़्यादा संभावना होती है.
तुरंत अपने बैंक के कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करें. किसी भी बिना इजाजत वाले ट्रांजैक्शन की रिपोर्ट करें और अपना अकाउंट फ्रीज करवाएं. अपने डेबिट/क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग और UPI ID तुरंत ब्लॉक करें. अपने ईमेल, बैंकिंग ऐप और सोशल मीडिया अकाउंट के पासवर्ड तुरंत बदलें. RBI के नियमों के मुताबिक, अगर आप तीन दिन के अंदर बैंक को फ्रॉड की रिपोर्ट करते हैं, तो आपकी लायबिलिटी जीरो हो सकती है.
इसके बाद 1930 पर कॉल करें और फ्रॉड की डिटेल्स दें. इसके बाद साइबर क्राइम पोर्टल पर जाएं. “रजिस्टर एंड ट्रैक” ऑप्शन पर क्लिक करें और घटना की पूरी डिटेल्स सबमिट करें. ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने के बाद आपको जो 14 अंकों का एक्नॉलेजमेंट नंबर मिलेगा, उसे पुलिस स्टेशन जाकर दिखाएं, ताकि आपकी FIR जल्दी और आसानी से रजिस्टर हो सके.
APK फाइल : जामताड़ा गैंग का भंडाफोड़, साइबर क्राइम ने दबोचा मास्टरमाइंड; ऐसे लगाया पता
News Source: PTI
