Home Latest News & Updates APK फाइल : जामताड़ा गैंग का भंडाफोड़, साइबर क्राइम ने दबोचा मास्टरमाइंड; ऐसे लगाया पता

APK फाइल : जामताड़ा गैंग का भंडाफोड़, साइबर क्राइम ने दबोचा मास्टरमाइंड; ऐसे लगाया पता

by Nikul Patel 25 June 2026, 6:56 PM IST
25 June 2026, 6:56 PM IST
Gujarat Jamtara gang busted

Gujarat Crime : साइबर अपराधियों ने लोगों को ठगने के लिए अब ऐसा तरीका अपना लिया है, जिससे एक छोटी-सी गलती किसी व्यक्ति का बैंक खाता खाली कर सकती है. अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने देशभर में APK फाइल के जरिए साइबर ठगी करने वाली झारखंड की कुख्यात जामताड़ा गैंग का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने इस गिरोह के मास्टरमाइंड समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच में सामने आया है कि आरोपी बैंक KYC, गैस बिल अपडेट, ट्रैफिक चालान, क्रेडिट कार्ड और सरकारी योजनाओं के नाम पर फर्जी APK फाइल बनाकर लोगों के मोबाइल का पूरा कंट्रोल हासिल कर लेते थे और फिर बैंक खातों से लाखों रुपये निकाल लेते थे.

पीड़ित की शिकायत के बाद एक्शन में पुलिस

यह मामला तब सामने आया जब अहमदाबाद के हांसोल निवासी नरेश सबनानी को व्हाट्सएप पर साबरमती गैस लिमिटेड के नाम से एक संदेश मिला. संदेश में दावा किया गया था कि उनका गैस कनेक्शन बंद होने वाला है और बिल अपडेट करने के लिए ‘Sabarmati Gas Bill Update.apk’ नाम की फाइल डाउनलोड करनी होगी. पीड़ित ने भरोसा करके फाइल डाउनलोड कर ली. इसके बाद साइबर अपराधियों ने उनके मोबाइल का अनधिकृत एक्सेस हासिल कर लिया और HDFC बैंक खाते से करीब 6.69 लाख रुपये विभिन्न ट्रांजेक्शनों के जरिए निकाल लिए. पीड़ित की शिकायत के बाद साइबर क्राइम पुलिस ने जांच शुरू की.

पुलिस ने किया पूरे नेटवर्क का खुलासा

तकनीकी विश्लेषण और मानव स्रोतों की मदद से पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क का खुलासा किया. जांच में पता चला कि झारखंड निवासी पूर्णानंद उर्फ मुकेश तिवारी इस गिरोह का मुख्य APK डेवलपर था. वह फर्जी APK फाइल तैयार करता था और उन्हें साइबर अपराधियों तक पहुंचाता था. अहमदाबाद साइबर क्राइम ने रेलवे सुरक्षा बल की मदद से उसे कोलकाता से सायरंग जा रही ट्रेन से गिरफ्तार कर लिया. इसके अलावा APK फाइल सप्लाई करने वाले विकास दास और ठगी के लिए बैंकिंग संसाधन उपलब्ध कराने वाले सीताराम मंडल को भी गिरफ्तार किया गया है. पुलिस जांच में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. आरोपी टेलीग्राम पर एक विशेष बॉट संचालित करते थे, जहां अपराधी अपनी जरूरत के अनुसार APK फाइल खरीद सकते थे.

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फर्जी APK फाइलें बेची जाती

SBI KYC, बैंक रिवॉर्ड, RTO चालान, बिजली बिल, बैंक ऑफ इंडिया, एक्सिस बैंक, फेडरल बैंक और अन्य संस्थाओं के नाम से तैयार फर्जी APK फाइलें बेची जाती थीं. इन फाइलों की खरीद-बिक्री के लिए SBI YONO Cash जैसी सुविधाओं का भी दुरुपयोग किया जाता था ताकि पैसों के लेन-देन का सीधा लिंक सामने न आए. जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि APK फाइल इंस्टॉल होते ही अपराधियों को मोबाइल का रिमोट एक्सेस मिल जाता था. वे SMS, OTP, कॉल लॉग, कॉन्टैक्ट्स, नोटिफिकेशन और बैंकिंग ऐप्स तक पहुंच बना लेते थे. इसके बाद बैंक खातों से रकम ट्रांसफर कर दी जाती थी. पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन से बैंक ऑफ इंडिया, DBS इंडिया और अन्य नामों की कई संदिग्ध APK फाइलें भी मिली हैं, जिनका उपयोग देशभर में साइबर ठगी के लिए किया जा रहा था.

चेन की तरह लाखों मोबाइलों तक पहुंची जाती

सबसे खतरनाक पहलू यह सामने आया कि एक बार किसी व्यक्ति के मोबाइल में APK फाइल इंस्टॉल हो जाती थी तो वह उसके व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप्स में स्वतः भेजी जाने लगती थी. इस तरह यह फाइल चेन रिएक्शन की तरह कुछ ही दिनों में लाखों मोबाइल फोन तक पहुंच जाती थी और साइबर अपराधियों को लगातार नए शिकार मिलते रहते थे. अहमदाबाद साइबर क्राइम ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक, APK फाइल या व्हाट्सएप संदेश पर भरोसा न करें. केवल Google Play Store या अधिकृत प्लेटफॉर्म से ही ऐप डाउनलोड करें. यदि गलती से कोई संदिग्ध APK फाइल इंस्टॉल हो जाए तो तुरंत इंटरनेट बंद करें, ऐप हटाएं, बैंक पासवर्ड बदलें और 1930 हेल्पलाइन या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं.

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