Sarvanand Kaul Murder: कश्मीर घाटी में 90 के दशक के आतंकवाद के उस भयावह दौर की पुरानी फाइलें एक बार फिर खुलने लगी हैं. वह दौर, जब आतंकियों ने कश्मीरी हिंदुओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया और घाटी का सामाजिक ताना-बाना हिंसा और भय से प्रभावित हुआ. अब प्रसिद्ध लेखक, कवि और संस्कृत विद्वान सर्वानंद कौल ‘प्रेमी’ और उनके बेटे की हत्या से जुड़े मामले की जांच स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने दोबारा शुरू की है.SIA के इस कदम का कश्मीरी पंडित समाज ने स्वागत किया है.
तीन दशक बाद इंसाफ की जगी उम्मीद
समाज की मांग है कि 90 के दशक में कश्मीरी हिंदुओं को निशाना बनाकर की गई अन्य हत्याओं की पुरानी फाइलें भी फिर से खोली जाएं. कश्मीरी पंडित संगठनों का कहना है कि अगर इन मामलों में कोई आरोपी आज भी कानून की गिरफ्त से बाहर है तो उसकी तलाश की जानी चाहिए. सर्वानंद कौल ‘प्रेमी’ कश्मीर की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े प्रमुख नाम थे. आतंकियों ने उन्हें और उनके बेटे को निशाना बनाया. यह घटना उस दौर की हिंसा की गंभीरता को दर्शाती है, जब आतंक के कारण बड़ी संख्या में कश्मीरी हिंदू परिवारों को अपना घर-बार छोड़कर घाटी से पलायन करना पड़ा था. तीन दशक बीत जाने के बाद भी कई परिवारों के जख्म आज तक ताजा हैं.
जल्द हो आरोपियों की पहचान
कई मामलों में पीड़ित परिवार न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं. ऐसे में पुरानी जांच फाइलों को दोबारा खोलने की पहल ने उम्मीद जगाई है कि उन घटनाओं की नए सिरे से जांच हो सकती है. मांग है कि पुराने मामलों में उपलब्ध सबूतों की दोबारा समीक्षा की जाए, गवाहों के बयान दर्ज किए जाएं और तकनीकी तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की जल्द पहचान की जाए. अगर किसी आरोपी की मौजूदगी भारत से बाहर है, तो उसके खिलाफ भी कानून के तहत उपलब्ध प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जाए. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या तीन दशक पुराने इन मामलों में अब इंसाफ का रास्ता खुलेगा? क्या जांच एजेंसियां उन आतंकियों और साजिशकर्ताओं तक पहुंच पाएंगी, जो इन हत्याओं के लिए जिम्मेदार बताए जाते हैं?
कश्मीरी पंडितों ने किया स्वागत
SIA की ओर से सर्वानंद कौल ‘प्रेमी’ और उनके बेटे की हत्या की फाइल दोबारा खोले जाने के बाद कश्मीरी पंडित समाज की उम्मीद बढ़ी है और उन्होंने इस पहल का स्वागत किया है. मांग अब सिर्फ एक मामले तक सीमित नहीं है. समाज चाहता है कि 90 के दशक की सभी प्रमुख हत्याओं की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने वालों को कानून के मुताबिक सजा मिले. तीन दशक बाद खुलती ये फाइलें सिर्फ अतीत की घटनाओं की जांच नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए न्याय की उम्मीद भी हैं, जो आज तक अपने अपनों को खोने का दर्द लेकर जी रहे हैं.
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- जम्मू से रविंदर कुमार श्रीवास्तव की रिपोर्ट
