LEBANON-SYRIA-TRUMP: लेबनान में हिज़्बुल्लाह के साथ इज़राइल की लड़ाई से व्हाइट हाउस की नाराज़गी के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया सुझाव देकर इस इलाके में कई लोगों को चौंका दिया है. कहा कि क्यों न ईरान समर्थित इस चरमपंथी गुट से लड़ने का काम सीरिया को सौंप दिया जाए? उनका कहना है कि इस्लामवादी नेतृत्व वाले और लड़ाई में माहिर उन विद्रोहियों ने, जिन्होंने डेढ़ साल पहले सीरिया के तानाशाह राष्ट्रपति बशर अल-असद को सत्ता से हटाकर नई सरकार बनाई थी, वे हिज़्बुल्लाह को खत्म करने का काम इज़राइली सेना से बेहतर ढंग से कर सकते हैं.
लेबनान और इजराइल की बढ़ी चिंता
सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने कहा है कि उन्हें ऐसा करने में कोई दिलचस्पी नहीं है और ट्रंप की बातों का गलत मतलब निकाला गया है. लेकिन ट्रंप अपनी बात पर अड़े हुए हैं. हालांकि यह साफ नहीं है कि व्हाइट हाउस इस प्रस्ताव को लेकर कितना गंभीर है, लेकिन सीरिया के हमले की संभावना ने लेबनान और इज़राइल दोनों की चिंता बढ़ा दी है. इजराइल, अल-शरा की इस्लामवादी सरकार को शक की नज़र से देखता है और उनके सत्ता में आने के बाद से उसने दक्षिणी सीरिया के एक हिस्से पर कब्ज़ा कर रखा है.

सीरिया, इजराइल और तुर्की के बीच बढ़ते तनाव का केंद्र भी बन गया है. तुर्की, अल-शरा की सरकार का मुख्य समर्थक है और दोनों देश पड़ोसी देश में एक-दूसरे के प्रभाव को कम करना चाहते हैं. मीडिया से बात करने की इजाज़त न होने के कारण नाम न बताने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि इजराइल के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने बुधवार को इस विषय पर एक बैठक की.
हिज्बुल्लाह के खिलाफ सीरिया करेगा बेहतर काम
इस महीने की शुरुआत में G7 समिट के दौरान ट्रंप ने शिकायत की कि हिज्बुल्लाह के साथ इज़राइल की लड़ाई बहुत लंबी खिंच रही है और बहुत सारे लोग मारे जा रहे हैं. 2 मार्च को इज़राइल पर हमले के साथ हिज़्बुल्लाह के ईरान समर्थित युद्ध में शामिल होने के बाद से लेबनान में इज़राइली हमलों में 4,000 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं, जिनमें सैकड़ों महिलाएं और बच्चे शामिल हैं. इज़राइल का कहना है कि उसके हमले हिज़्बुल्लाह को निशाना बनाते हैं और वह आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए उपाय करता है.
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ट्रंप ने कहा कि जब आप किसी को ढूंढ रहे हों तो हर बार आपको अपार्टमेंट की इमारत को गिराने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि उन अपार्टमेंट की इमारतों में बहुत सारे लोग रहते हैं और वे सभी हिज़्बुल्लाह के सदस्य नहीं होते. मैंने इज़राइल को सुझाव दिया कि हिज़्बुल्लाह से निपटने का काम सीरिया को सौंप दे. क्योंकि सच कहूं तो, मुझे लगता है कि वे बेहतर काम करेंगे.
हिज्बुल्लाह का खात्मा न होने पर ट्रंप निराश
कुछ दिनों बाद स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान बातचीत के पहले दिन, फॉक्स न्यूज़ के ट्रे यिंगस्ट ने कहा कि एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने इस बात पर निराशा जताई कि इज़राइल हिज़्बुल्लाह को खत्म नहीं कर पा रहा है. कहा कि वह इसे सीरिया को सौंपने के करीब हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अल-शारा ज़्यादा सटीक कार्रवाई करेंगे. व्हाइट हाउस ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और ट्रंप के पिछले बयानों का हवाला दिया.
सीरिया ने लेबनान में दखल देने से किया इनकार
13 जून को दमिश्क में एक भाषण में सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने कहा कि ऐसे लोग अफवाहें फैला रहे हैं कि सीरिया लेबनान में हस्तक्षेप करेगा. यह सच नहीं है. हम युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने और संस्थानों को मजबूत करने, आर्थिक संबंधों और लेबनान में स्थिति को शांत करने का आह्वान कर रहे हैं. अमीराती नेटवर्क अल मशहद के साथ 21 जून को एक साक्षात्कार में अल-शरा ने कहा कि ट्रंप की टिप्पणियों को गलत समझा गया है.
अल-शरा ने कहा कि ट्रंप ने सुरक्षित और शांतिपूर्ण समाधान खोजने में सीरिया की भूमिका के बारे में बात की, लेकिन बयान की गलत व्याख्या की गई, जैसे कि सीरिया कल सुबह ही लेबनान पर आक्रमण करने जा रहा हो. उन्होंने कहा कि सीरिया ने संयुक्त राज्य अमेरिका के सामने समाधान के लिए हमारा दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है, जो युद्ध को रोकना और लेबनान व सीरिया पर नकारात्मक प्रभावों को संबोधित करना और विभिन्न आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक समाधान ढूंढना है.

हिज्बुल्लाह से हिसाब बराबर नहीं करना चाहता सीरिया
सीरिया के 14 साल लंबे गृहयुद्ध के दौरान ईरान के साथ मिलकर हिज़्बुल्लाह ने असद का साथ दिया था, जबकि अल-शरा उस विद्रोही गुट के नेता थे जो असद को सत्ता से हटाना चाहता था. लेकिन दिसंबर 2024 में सत्ता संभालने के बाद से दमिश्क के नए नेताओं ने कहा है कि वे देश के पुनर्निर्माण पर ध्यान दे रहे हैं, बदला लेने की कोशिश नहीं कर रहे हैं और किसी भी क्षेत्रीय संघर्ष से दूर रहना चाहते हैं. जब इज़राइल और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया, जिससे एक बड़ा क्षेत्रीय संघर्ष छिड़ गया तो सीरिया ने इससे दूर रहने का फैसला किया.
तनाव कम करने के लिए तुर्की ने की मध्यस्थता
युद्ध के शुरुआती हफ्तों में सीरियाई सेना ने लेबनान की सीमा पर अतिरिक्त सैनिक भेजे. सीरियाई अधिकारियों का कहना था कि इसका मकसद सीमा पार हथियारों की तस्करी या संघर्ष के असर को फैलने से रोकना था. मार्च में एक समय सीरिया ने हिज़्बुल्लाह पर आरोप लगाया कि उसने सीमा पार से सीरियाई सेना के ठिकानों पर तोप के गोले दागे हैं, लेकिन हिज़्बुल्लाह ने इससे इनकार किया. इसके बाद तनाव और नहीं बढ़ा.
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तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने मार्च में ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि तनाव कम करने के लिए तुर्की ने मध्यस्थता की थी. अल-शरा ने ‘अल मशहद’ से कहा कि सीरियाई संघर्ष में शामिल होने का (हिज़्बुल्लाह का) फैसला गलत था, लेकिन वे इस चरमपंथी गुट के साथ बातचीत करने और हिज़्बुल्लाह के के भविष्य पर चर्चा कर रहे लेबनान के अलग-अलग गुटों के बीच मध्यस्थता करने को भी तैयार हैं.
ट्रंप के प्रस्ताव से कब्जे की यादें फिर से ताजा
मार्च में सीरिया में अमेरिकी दूत टॉम बैरक ने उन खबरों का खंडन किया था जिनमें कहा गया था कि वाशिंगटन ने हिज़्बुल्लाह के खिलाफ सीरिया के दखल का विचार रखा था. लेकिन तब से, ट्रंप ने खुलकर यह मांग करना शुरू कर दिया है. वाशिंगटन स्थित स्टिमसन सेंटर में मिडिल ईस्ट प्रोग्राम की डायरेक्टर रंडा स्लिम ने कहा कि ट्रंप का प्रस्ताव ज्यादा से ज्यादा ज़मीनी हालात की गहरी अज्ञानता पर आधारित है.
उन्होंने कहा कि सीरिया को कई जटिल और मुश्किल चुनौतियों पर ध्यान देने की ज़रूरत है, जिनमें सबसे अहम है बर्बाद हो चुके देश का पुनर्निर्माण और लाखों शरणार्थियों की वापसी. सीरियाई सेना एक संगठित सैन्य संस्था बनने से अभी बहुत दूर है. इसमें हज़ारों विदेशी जिहादी लड़ाके शामिल हैं जिनकी वफादारी और अनुशासन संदिग्ध है.
सीरिया में कई बार भड़की हिंसा
सीरिया में असद के सत्ता से हटने के बाद के महीनों में, अल-शरा के समर्थक और विरोधी गुटों के बीच कई बार हिंसा भड़की, जो बाद में सांप्रदायिक बदले की कार्रवाई में बदल गई. इसमें नई सरकार से जुड़े सुन्नी इस्लामी लड़ाकों ने अलावी और ड्रूज़ नागरिकों पर हमले किए. इन हमलों की वजह से लेबनान की शिया, ईसाई और ड्रूज़ आबादी के बीच सीमा-पार हिंसा का डर पैदा हो गया. लेबनान के कई लोगों के मन में लेबनान पर सीरिया के दशकों लंबे कब्ज़े की कड़वी यादें भी हैं. यह कब्ज़ा लेबनान के गृहयुद्ध के दौरान शुरू हुआ था.
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शुरुआत में लेबनान के अधिकारियों के अनुरोध और अरब देशों के समर्थन से 2005 में खत्म हुआ. नाम न बताने की शर्त पर बात करने वाले अधिकारी ने कहा कि इज़राइल को इस बात की भी चिंता है कि सीरिया लेबनान की राजनीति में अपनी पुरानी भूमिका फिर से निभा सकता है. लेकिन अधिकारी ने कहा कि हालांकि इज़राइल सीरिया और लेबनान के बीच हो रही गतिविधियों पर बारीकी से नज़र रख रहा है, फिर भी उसकी मुख्य चिंता हिज़्बुल्लाह है.

मध्य पूर्व की राजनीति में मचा हड़कंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक चौंकाने वाले सुझाव ने इस समय मध्य पूर्व की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है. ट्रंप ने प्रस्ताव दिया है कि इज़राइल के बजाय सीरिया को लेबनान में सक्रिय आतंकी संगठन हिज़्बुल्लाह का खात्मा करना चाहिए. ट्रंप का मानना है कि इज़राइल का युद्ध बहुत लंबा खिंच रहा है और इसमें काफी नागरिक मारे जा रहे हैं, जबकि बशर अल-असद को हटाने वाले सीरिया के नए विद्रोही नेता इस काम को अधिक सटीक तरीके से कर सकते हैं.
ट्रंप के बयान से लेबनान में खौफ
ट्रंप के इस बयान से लेबनान में पुराना खौफ लौट आया है, क्योंकि सीरिया करीब तीन दशकों तक लेबनान पर सैन्य नियंत्रण रख चुका है. व्हाइट हाउस के इस सीक्रेट प्लान को सीरिया के वर्तमान राष्ट्रपति अहमद अल-शरा (विद्रोही सरकार के प्रमुख) ने पूरी तरह खारिज कर दिया है. अल-शरा ने साफ किया कि सीरिया की लेबनान में सैन्य हस्तक्षेप करने की कोई योजना नहीं है. उन्होंने कहा कि ट्रंप के बयान को गलत समझा गया और सीरिया केवल आर्थिक व शांतिपूर्ण समाधान चाहता है, न कि किसी नए युद्ध में पड़ना.
असद सरकार के पतन के बाद सत्ता में आई नई सीरियाई सरकार और हिज़्बुल्लाह के बीच पुराना वैचारिक और सैन्य टकराव रहा है. गृहयुद्ध में हिज़्बुल्लाह ने असद का साथ दिया था, जबकि वर्तमान शासक उनके खिलाफ लड़े थे. ट्रंप इसी दुश्मनी का फायदा उठाकर हिज़्बुल्लाह को घेरना चाहते हैं, लेकिन 14 साल के गृहयुद्ध से जूझ रहा सीरिया इस समय बदला लेने के बजाय अपने आर्थिक पुनर्निर्माण पर ध्यान दे रहा है.
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