MP Board: मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की कक्षा 10वीं और 12वीं का बहुप्रतीक्षित परीक्षा परिणाम बुधवार को घोषित कर दिया गया.
MP Board: मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की कक्षा 10वीं और 12वीं का बहुप्रतीक्षित परीक्षा परिणाम बुधवार को घोषित कर दिया गया. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद इन परिणामों की घोषणा करते हुए इसे प्रदेश के शिक्षा जगत के लिए एक स्वर्णिम अध्याय करार दिया. इस वर्ष के परिणाम ने पिछले 16 वर्षों के सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया है. परीक्षा परिणाम में एक बार फिर बेटियों ने अपनी मेधा का लोहा मनवाया और मेरिट सूची में बेटों को काफी पीछे छोड़ दिया.
16 लाख विद्यार्थियों ने दी थी परीक्षा
बता दें इस वर्ष 10 फरवरी से 7 मार्च के बीच आयोजित हुई बोर्ड परीक्षाओं में करीब 16 लाख विद्यार्थी सम्मिलित हुए थे. इनमें 10वीं के 9 लाख और 12वीं के लगभग 7 लाख छात्र शामिल थे. नियमित विद्यार्थियों का कुल पास प्रतिशत 76.01 रहा. लिंगवार आंकड़ों पर नजर डालें तो छात्राओं का पास प्रतिशत 79.41 प्रतिशत रहा, जबकि छात्रों का प्रतिशत 72.39 प्रशित दर्ज किया गया. मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों का यह प्रदर्शन प्रदेश की बदलती और प्रगतिशील तस्वीर को पेश करता है.
झाबुआ और नरसिंहपुर का कमाल
इस बार परीक्षा परिणामों में जिलों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली. आदिवासी बाहुल्य झाबुआ जिला पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान पर रहा, जबकि अनूपपुर ने दूसरा स्थान हासिल किया. वहीं नरसिंहपुर जिले ने भी अपनी शैक्षणिक गुणवत्ता को साबित करते हुए प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त किया है. नरसिंहपुर में नियमित विद्यार्थियों का पास प्रतिशत 92.62 प्रतिशत और प्राइवेट विद्यार्थियों का परिणाम 59.93 प्रतिशत रहा, जो काफी सराहनीय है.
होनहारों ने किया नाम रोशन
राजधानी भोपाल की खुशी राय और चांदनी विश्वकर्मा ने 500 में से 494 अंक हासिल कर प्रदेश की प्रावीण्य सूची में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया. वहीं नरसिंहपुर जिले के साईंखेड़ा स्थित चैतन्य वीपी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के छात्र आदित्य कुशवाहा पिता जनक सिंह कुशवाहा ने विज्ञान-गणित समूह में 485 अंक प्राप्त कर प्रदेश की मेरिट लिस्ट में आठवां स्थान हासिल कर जिले को गौरवान्वित किया है.
मुख्यमंत्री ने बधाई
सीएम डॉ. मोहन यादव ने विशेष तौर पर अनुसूचित जाति वर्ग के बच्चों के शानदार प्रदर्शन की सराहना की. उन्होंने कहा मैं सभी सफल विद्यार्थियों को हृदय से बधाई देता हूं. किसी भी छात्र को पूरक घोषित न करना और 16 साल का सर्वश्रेष्ठ परिणाम आना हमारे शिक्षा तंत्र की मजबूती को दर्शाता है. बता दें कि प्रदेश भर में 3856 केंद्रों पर परीक्षा आयोजित हुई थी. जहां नियमित छात्रों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया, वहीं स्वाध्यायी छात्रों का रिजल्ट 30.60 प्रतिशत रहा. लगभग 1 लाख 99 हजार विद्यार्थी अनुत्तीर्ण रहे हैं. जिन्हें मुख्यमंत्री ने निराश न होने और पुन: कड़ी मेहनत के साथ आगे बढऩे का संदेश दिया है.
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