Arvind Kejriwal: अरविंद केजरीवाल शराब पॉलिसी मामले की सुनवाई से जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को हटाने की मांग करते हुए एफिडेविट दाखिल किया है. उन्होंने एफिडेविट में हितों के टकराव की दलील दी है
15 April, 2026
दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल अपने खिलाफ चल रहे शराब पॉलिसी के केस को खुद ही कोर्ट में प्रस्तुत कर रहे हैं. अब उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को सुनवाई से हटाने की मांग करते हुए एफिडेविट दाखिल किया है. उन्होंने दावा किया है कि जज के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में वकील हैं, जिन्हें CBI की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के जरिए काम मिलता है. केजरीवाल ने एफिडेविट में दावा किया है कि “जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के सुनवाई करने से सीधे हितों का टकराव” होता है.
‘मैं नजरअंदाज नहीं कर सकता’
केजरीवाल ने आगे मौखिक और जवाबी दलीलें देने के लिए समय भी मांगा, क्योंकि उन्हें डर था कि जस्टिस शर्मा के सामने मामला जारी रखने से “कानून के हिसाब से न्यायिक अलगाव, स्वतंत्रता और तटस्थता का पूरा आभास नहीं मिलेगा.” 14 अप्रैल के एफिडेविट में दावा किया गया, “इस तरह के क्रिमिनल केस में, जहां प्रॉसिक्यूटिंग एजेंसी CBI है, जहां सेंटर गवर्नमेंट के सबसे बड़े लॉ ऑफिसर मेरे खिलाफ पेश होते हैं और जहां माननीय जज के परिवार के सदस्य केंद्र सरकार के पैनल में रहते हैं, तो यह निष्पक्ष न रहने की आशंका गंभीर हो जाती है और मेरे लिए इसे नजरअंदाज करना नामुमकिन हो जाता है.”
जवाब देने का मौका नहीं मिला
केस में फाइल किए गए एफिडेविट में केजरीवाल ने कहा कि 13 अप्रैल को, शाम 7 बजे तक केस की सुनवाई के बाद, जज ने केस से अलग होने की पिटीशन पर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया, लेकिन उन्हें जवाब देने का पूरा और सही मौका नहीं दिया गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब पिटीशन पेंडिंग थी, तो कोर्ट ने कुछ ऐसे ऑर्डर पास किए जिनसे CBI की पिटीशन पर जवाब फाइल करने के उनके अधिकार पर असर पड़ा. अगर एक हफ्ते के अंदर जवाब फाइल नहीं किया गया, तो वह अपना केस पेश करने का मौका खो देंगे, जिससे उनकी चिंता बढ़ गई.
सॉलिसिटर जनरल ने क्या कहा
केजरीवाल ने यह भी कहा कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने पहले भी उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था. इसके अलावा, मनीष सिसोदिया और के. कविता जैसे दूसरे आरोपियों को भी बेल देने से मना कर दिया गया था और केस में कड़े कमेंट किए गए थे. इस बीच, सॉलिसिटर जनरल मेहता ने पिटीशन का विरोध करते हुए कोर्ट से कहा कि जज के खिलाफ ऐसी मांग करना गलत है और इससे कोर्ट की गरिमा को नुकसान होता है. उन्होंने यहां तक कहा कि ये बेबुनियाद आशंकाएं हैं और जज को किसी दबाव में आकर खुद को केस से अलग नहीं करना चाहिए, नहीं तो इससे गलत मिसाल कायम होगी.
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News Source: PTI
