NEET-UG: देश की सबसे बड़ी और सबसे चर्चित मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 का री-एग्जाम रविवार को संपन्न हो गया. देश के 22 लाख 79 हजार से ज्यादा छात्रों ने आज भारी मानसिक तनाव के बीच दोबारा परीक्षा दी. लेकिन परीक्षा खत्म होने के बाद भी छात्रों के चेहरों पर खुशी से ज्यादा एक अनजाना डर दिखाई दे रहा था और वो डर था परीक्षा के फिर से निरस्त होने का. परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे. नियमों की भारी पाबंदी थी. जिसके चलते कई केंद्रों पर अफरा तफरी और भावुक कर देने वाले नजारे भी देखने को मिले.
सूबे में बनाए गए थे 283 केंद्र
बता दें देश के 551 शहरों में बनाए गए 5440 परीक्षा केंद्रों पर रविवार दोपहर 2 बजे से शाम 5.15 बजे के बीच नीट की दोबारा परीक्षा आयोजित की गई. अगर बात मध्य प्रदेश की करें तो सूबे के 283 केंद्रों पर 13 हजार 774 परीक्षार्थियों ने इस री-एग्जाम में भाग लिया. एनटीए की नई और सख्त गाइडलाइन के मुताबिक दोपहर ठीक डेढ़ बजे परीक्षा केंद्रों के गेट पूरी तरह से बंद कर दिए गए.
निरस्त होने का सता रहा था डर
कड़े नियमों और समय की पाबंदी के कारण कई केंद्रों पर भारी अफरा तफरी का माहौल देखा गया, जो छात्र महज कुछ मिनट या सेकंड की देरी से पहुंचे, उन्हें अंदर प्रवेश नहीं मिला. केंद्रों के बाहर रोते-बिलखते छात्र और मिन्नतें करते माता-पिता के भावुक नजारे आज कई शहरों में देखने को मिले. लेकिन असली चुनौती परीक्षा हॉल के भीतर थी. पेपर देकर बाहर निकले छात्रों के चेहरों पर परीक्षा की थकावट तो थी ही साथ ही एक बड़ा डर भी साफ झलक रहा था.
लाखों छात्रों का भविष्य लॉक
पेपर लीक के साए और पिछली कड़वी यादों के बीच परीक्षा देने वाले छात्रों को अब भी डर सता रहा है कि कहीं इतनी मेहनत के बाद यह परीक्षा फिर से निरस्त न हो जाए. लाखों छात्रों का भविष्य आज एक बार फिर ओएमआर शीट्स में बंद हो चुका है. एनटीए और प्रशासन के लिए यह परीक्षा साख का सवाल थी, जिसे कड़े पहरे में कराने की कोशिश की गई. लेकिन अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करने की है कि छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ अब दोबारा कोई खिलवाड़ न हो और उनका खोया हुआ भरोसा वापस लौट सके.
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