Home Latest News & Updates उज्जैन में परछाई ने छोड़ा साथ, लोग भी हुए हैरान; वैज्ञानिक भाषा में कहा जाता है- ‘शून्य छाया दिवस’

उज्जैन में परछाई ने छोड़ा साथ, लोग भी हुए हैरान; वैज्ञानिक भाषा में कहा जाता है- ‘शून्य छाया दिवस’

by Live Times 21 June 2026, 6:58 PM IST (Updated 21 June 2026, 8:12 PM IST)
21 June 2026, 6:58 PM IST (Updated 21 June 2026, 8:12 PM IST)
Ujjain shadow parted ways

MP News : उज्जैन में 300 साल पुरानी ऐतिहासिक वेधशाला में रविवार को एक दुर्लभ खगोलीय घटना देखने को मिली. इस दौरान सूर्य ठीक सिर के ऊपर पहुंच गया और इसके कारण कुछ पलों के लिए वस्तुओं की परछाई गायब हो गई. यह अनोखा नजारा विज्ञान और खगोल प्रेमियों के लिए बेहद खास रहा. साथ ही रोमांचक अनुभव साबित करने वाला हुआ.

पेड़ और खंभों की भी हुई परछाई गायब

21 जून को एक बेहद खास खगोलीय नजारा लेकर आया. दोपहर 12 बजकर 28 मिनट पर सूर्य ठीक कर्क रेखा के ऊपर लंबवत स्थिति में पहुंचा जहां एक अनोखी घटना के चलते कुछ पलों के लिए पेड़, खंभों और अन्य वस्तुओं की परछाइयां लगभग गायब सी हो गई. इसके वैज्ञानिक भाषा में ‘शून्य छाया दिवस’ भी कहा जाता है. आम बोलचाल में लोग इसे यूं भी कहते हैं कि आज परछाई भी साथ छोड़ देगी. सुनने में जितनी दिलचस्प, यह घटना उतनी ही रोमांचकारी और दुर्लभ अनुभव वाली होती हे।

आज साल का सबसे बड़ा दिन हुआ

21 जून को सूर्य अपनी अधिकतम उत्तरी स्थिति में रहेगा, इसके कारण उत्तरी गोलार्द्ध में वर्ष का सबसे बड़ा दिन और सबसे छोटी रात होगी. उज्जैन में इस दिन सूर्योदय सुबह 5:42 बजे और सूर्यास्त शाम 7:16 बजे होगा. इस तरह दिन की अवधि 13 घंटे 34 मिनट और रात की अवधि 10 घंटे 26 मिनट रहेगी.

शंकु यंत्र के माध्यम से दिखी खगोलीय घटना

उज्जैन, जो कर्क रेखा के निकट स्थित है, एक दुर्लभ खगोलीय घटना का प्रत्यक्ष गवाह बना. जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेन्द्र प्रकाश गुप्त के अनुसार, साफ आसमान और तेज धूप की मौजूदगी में शंकु यंत्र के माध्यम से इस अद्भुत खगोलीय दृश्य का अवलोकन किया गया. वहीं, यहां आये कई लोगों ने भी जब इस दृश्य को देखा तो वे भी आश्चर्य चकित रह गये.

आपको बता दें इस वेधशाला को जयपुर के महाराजा जयसिंह ने 300 साल पहले 1733 ईस्वी में बनवाया था. जैसा कि भारत के खगोलशास्त्री तथा भूगोलवेत्ता यह मानते आये हैं कि देशांतर रेखा उज्जैन से होकर गुजरती है. यहां के प्रेक्षाग्रह का भी विशेष महत्व रहा है.

सात रेखाएं खींची गईं

शंख यंत्र यहां स्थित एक यंत्र है जो क्षितिज वृत्त के तल में बना है, जिसकी छाया से सात रेखाएं खींची गई हैं. जो 12 राशियों का प्रतिनिधित्व करता है. ये रेखाएं 21 जून को सबसे बड़ा दिन, 22 दिसंबर को सबसे छोटा दिन और 21 मार्च और 23 सितंबर को बराबर दिन और रात दर्शाती हैं. बता दें कि यहां बनने वाली शंकु की छाया दिन की अवधि बढ़ने या घटने के साथ घटती-बढ़ती रहती है.

  • उज्जैन से विजय यादव की रिपोर्ट

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