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युवा IAS अफसरों को राष्ट्र-निर्माण का मंत्रः मोदी ने कहा- संवेदनशील, जवाबदेह प्रशासन की आवश्यकता

by Sanjay Kumar Srivastava 23 June 2026, 4:26 PM IST (Updated 23 June 2026, 4:57 PM IST)
23 June 2026, 4:26 PM IST (Updated 23 June 2026, 4:57 PM IST)
युवा IAS अफसरों को राष्ट्र-निर्माण का मंत्रः मोदी ने कहा- संवेदनशील, जवाबदेह और समावेशी प्रशासन की आवश्यकता

PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को युवा IAS अधिकारियों से कहा कि हर फाइल अनगिनत नागरिकों की उम्मीदों, चिंताओं और जिंदगी को दिखाती है. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे हर फैसले में लोगों को केंद्र में रखें और यह निश्चित करें कि शासन संवेदनशील, जवाबदेह और समावेशी बना रहे. मोदी IAS-2024 बैच के 183 ट्रेनी अधिकारियों से बातचीत कर रहे थे. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि विकास से जुड़ी बड़ी चुनौतियों को अलग-अलग रहकर हल नहीं किया जा सकता. सार्थक व स्थायी नतीजे पाने के लिए विभागों के बीच बेहतर तालमेल ज़रूरी है.

राष्ट्र-निर्माण के लिए खुद को समर्पित करें अधिकारी

उन्होंने युवा सिविल सेवकों से कहा कि वे मज़बूत मकसद, इनोवेशन और नागरिक-केंद्रित शासन के साथ राष्ट्र-निर्माण के लिए खुद को समर्पित करें. उनसे आग्रह किया कि वे हमेशा हर प्रशासनिक फ़ाइल के पीछे मानवीय असर को याद रखें. एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, मोदी ने कहा कि हर फाइल अनगिनत नागरिकों की उम्मीदों, चिंताओं और जिंदगी को दिखाती है. ‘नागरिक देवो भव’ के मंत्र पर ज़ोर देते हुए प्रधानमंत्री ने युवा अधिकारियों से कहा कि वे हर फ़ैसले में नागरिकों को केंद्र में रखें और यह पक्का करें कि शासन संवेदनशील, जवाबदेह और समावेशी बना रहे.

पद से नहीं, बल्कि नतीजों से पाएं संतुष्टि

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे देश के निर्माण में अपने योगदान का लगातार मूल्यांकन करें और केवल अपने पद से नहीं, बल्कि हासिल किए गए ठोस नतीजों से संतुष्टि पाएं. मोदी ने कहा कि फील्ड में काम करने और प्रशासनिक कामकाज सीखने के दो साल बाद अधिकारी अब एक अहम मोड़ पर हैं, जहां उनके फैसले न सिर्फ़ उनके अपने करियर को, बल्कि करोड़ों नागरिकों के भविष्य को भी आकार देंगे. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि जनसेवा की असली परीक्षा ईमानदारी, संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ असल ज़िंदगी की स्थितियों को संभालने से शुरू होती है.

विभागों में बेहतर तालमेल का किया जिक्र

‘विकसित भारत 2047’ के विज़न का ज़िक्र करते हुए मोदी ने कहा कि आने वाले दशकों में हर नीति और प्रशासनिक फैसले का मकसद एक विकसित भारत का निर्माण करना होना चाहिए. सरकार के सभी विभागों के मिलकर काम करने के तरीके पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा कि आज देश की प्राथमिकताओं में आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ोतरी, ऊर्जा सुरक्षा और युवाओं के लिए मौके पैदा करना शामिल है. प्रधानमंत्री ने पिछले 10 सालों में गवर्नेंस में आए बदलावों का ज़िक्र करते हुए कहा कि प्रशासन अब प्रक्रिया पर केंद्रित मॉडल से हटकर नतीजों पर केंद्रित तरीके की ओर बढ़ गया है.

डिजिटल गवर्नेंस पर की चर्चा

उन्होंने सर्विस डिलीवरी को बेहतर बनाने और नागरिकों को आसानी व पारदर्शिता के साथ सर्विस पाने में मदद करने के लिए डिजिटल गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी की बढ़ती भूमिका का ज़िक्र किया. डेटा-आधारित गवर्नेंस के महत्व पर ज़ोर देते हुए मोदी ने कहा कि डेटा को सिर्फ़ नंबरों के तौर पर नहीं, बल्कि लाखों लोगों की सामूहिक ज़िंदगी, चुनौतियों और उम्मीदों की झलक के तौर पर देखा जाना चाहिए. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे नियमित रूप से यह जांचें कि क्या नीतियां ज़मीनी स्तर पर असरदार नतीजों में बदल रही हैं या नहीं.

महिलाओं के हूनर को सराहा

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र-निर्माण में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर भी ज़ोर दिया और बताया कि मौजूदा बैच में 40 प्रतिशत से ज़्यादा महिला अधिकारी हैं. उन्होंने भरोसा जताया कि उनकी ऊर्जा, हुनर ​​और लगन भारत की विकास यात्रा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में अहम भूमिका निभाएंगे. इस मौके पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा और शक्तिकांत दास, कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के निदेशक श्रीराम तरणीकांती समेत कई अन्य लोग मौजूद थे.

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News Source: PTI

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