Strait of Hormuz: पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ ईरान और अमेरिका के बीच टकराव का एक बड़ा मुद्दा बन गया है. 28 फरवरी को अमेरिका ने ईरान में तख्तापलट की कोशिश को लेकर हमला किया था. वहीं, युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को एक रणनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया है. होर्मुज जलडमरूमध्य आर्थिक लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है. दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरती है. ऐसे में अगर ईरान इसे पूरी तरह बंद कर देता है, तो दुनिया के कई देशों में ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है. इसका असर अब सीधे अमेरिका में भी दिखाई देने लगा है. जलडमरूमध्य बंद होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है और अमेरिका में भी ऊर्जा की कीमतें बढ़ी हैं.
इस बीच अमेरिकी जनता ने इस मुद्दे को लेकर ट्रंप प्रशासन के खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन भी किया है. ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब अपनी पुरानी रणनीति के उलट ईरान के साथ समझौते की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं. हालांकि, रिपब्लिकन राष्ट्रपति के लिए ईरान को कोई रियायत देना राजनीतिक रूप से आसान नहीं होगा. दूसरी ओर जॉर्ज डब्ल्यू. बुश प्रशासन में स्टेट डिपार्टमेंट के काउंसलर रहे एलियट कोहेन ने कहा कि ट्रंप दुनिया को ‘जीतने वालों’ और ‘हारने वालों’ में बांटते हैं और अगर उन्हें ईरान के साथ समझौता करना पड़ा, तो इससे उनकी नजर में वह खुद ‘हारने वाले’ बन जाएंगे.

क्या सफल होगा दोनों देशों के बीच समझौता?
इस वक्त पूरा विवाद होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर केंद्रित हो गया है. हालांकि, दोनों पक्षों की ओर से समझौते की संभावना के संकेत दिए जा रहे हैं, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने किसी भी संभावित समझौते से इनकार किया है. वहीं, ईरान ने जलडमरूमध्य पर कुछ हद तक अपना नियंत्रण बनाए रखने पर जोर दिया है. उसका कहना है कि युद्ध से पहले की तरह यह समुद्री मार्ग पूरी तरह खुला अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग नहीं रहेगा. हजारों अमेरिकी हमलों के बावजूद ईरान के पास अभी भी जहाजों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला करने की क्षमता है. इस पूरे मुद्दे पर एलियट कोहेन का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप के लिए ईरान के सामने झुकना मुश्किल होगा, भले ही इस टकराव के कारण पेट्रोल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहें और नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो जाए.
वहीं, ट्रंप के पहले कार्यकाल में विदेश विभाग के अधिकारी रहे डेविड शेंकर का कहना है कि लगातार बढ़ते आर्थिक दबाव के बीच ट्रंप प्रशासन को होर्मुज के मुद्दे पर समझौता करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. शेंकर ने कहा कि दोनों पक्षों की ओर से बहुत कुछ कहा जाएगा, लेकिन उनका अनुमान है कि राष्ट्रपति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनके लिए इस संकट का समाधान कितना महत्वपूर्ण है.

होर्मुज खोलने के लिए डील लगभग डन, लेकिन ऐलान में देरी क्यों? जानें ईरान-यूएस व ओमान की भूमिका
जेल भेजने की दी थी ट्रंप ने धमकी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस युद्ध को लेकर बहुत कम जानकारी सार्वजनिक की है. उन्होंने गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि अमेरिकी सेना के पास अभी भी बड़ी मात्रा में हथियार मौजूद हैं और भारी संख्या में नए हथियार भी बनाए जा रहे हैं. इसके साथ ही ट्रंप ने हथियारों के भंडार से जुड़ी जानकारी लीक करने वालों को जेल भेजने की धमकी भी दी. इस दौरान ट्रंप ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ की एक रिपोर्ट का जिक्र कर रहे थे. रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पिछले सप्ताह कैंप डेविड में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान उन्नत हथियारों की कमी को लेकर ट्रंप रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से नाराज थे. प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कैबिनेट बैठक में ईरान के मुद्दे पर अच्छी और सार्थक चर्चा हुई थी. हालांकि, उन्होंने कथित विवाद के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी, लेकिन स्पष्ट किया कि बैठक में कोई बड़ा झगड़ा नहीं हुआ था. प्रशासन की अंदरूनी चर्चाओं के बारे में बात करने के लिए अधिकारी ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर यह जानकारी दी.
बिना स्पष्ट रणनीति के ईरान पर किए हमले?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अमेरिका की स्थिति बहुत अच्छी है. इसके बावजूद उन्होंने माना कि अमेरिका को हमेशा अधिक हथियारों की जरूरत रहती है. उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी सेना दुनिया भर में मौजूद गोला-बारूद के भंडार का इस्तेमाल कर सकती है. रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ इस सप्ताह कैपिटल हिल में थे, जहां उन्होंने रिपब्लिकन सीनेटरों के साथ निजी तौर पर मुलाकात की. वह रिपब्लिकन पार्टी के बड़े बजट पैकेज के तहत पेंटागन के लिए अरबों डॉलर के अतिरिक्त खर्च की वकालत कर रहे हैं. सीनेटर मार्क केली ने कहा कि हथियारों की कमी उस युद्ध की वजह से हुई है, जिसमें 14,000 से अधिक ठिकानों पर हमले किए गए, लेकिन इसकी कोई स्पष्ट रणनीति नहीं थी. केली ने यह भी कहा कि मेरा मानना है कि अगर आपको मकसद पता होता, तो शायद टारगेट की सूची में सिर्फ 500 ठिकाने होते. उन्होंने बताया कि पेंटागन अब उस समस्या को ठीक करने के लिए अरबों डॉलर खर्च करना चाहता है, जिसे उसने खुद पैदा किया है.

‘रूस की रिफाइनरियों पर यूक्रेन का हमला…’ जेलेंस्की का दावा, कहा- रणनीतिक क्षमता पर प्रहार
अमेरिकी मानते हैं कि युद्ध से कोई फायदा नहीं हुआ
ट्रंप ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया कि उनके पोलिंग नंबर अब तक के सबसे अच्छे हैं. इस दौरान उन्होंने रोजगार के आंकड़ों और ईरान के परमाणु-मुक्त होने जैसी उपलब्धियों का जिक्र किया. एक सर्वे के मुताबिक, अमेरिका के लगभग दो-तिहाई वयस्कों का कहना है कि ईरान के साथ युद्ध का कोई खास फायदा नहीं हुआ. इसमें डेमोक्रेट और निर्दलीय लोगों की बड़ी संख्या के साथ-साथ लगभग 37 प्रतिशत रिपब्लिकन भी शामिल थे. रोजगार के मामले में जून में अमेरिका में लगभग 159 मिलियन नौकरियां थीं और यह एक बड़ा रिकॉर्ड था. हालांकि, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में नौकरियों में बढ़ोतरी काफी धीमी हो गई है. दूसरी तरफ ट्रंप यह भी दावा करते रहे हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य कमर्शियल शिपिंग के लिए खुला है. उन्होंने गुरुवार को कहा कि होर्मुज अभी कुछ हद तक खुला है और उन्होंने ईरानी बंदरगाहों की नौसेना द्वारा की गई नाकेबंदी की ओर इशारा किया. ट्रंप ने ईरान के बारे में कहा कि वे कभी भी कुछ भी शूट कर सकते हैं, उनके पास हमेशा कुछ न कुछ होता है या वे कोई भी समुद्री सुरंग को गिरा सकते हैं.
पिछले हफ्ते दो जहाजों पर हुए हमले
मैरीटाइम डेटा कंपनी ‘लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस’ के अनुसार, पिछले हफ्ते होर्मुज जलडमरूमध्य में कम से कम दो जहाजों पर हमले हुए, जबकि कई जहाज बाल-बाल बचे. अच्छी बात यह है कि पिछले हफ्ते इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या बढ़कर 84 हो गई, जो उससे पहले के हफ्ते में 45 थी. लेकिन ‘लॉयड्स लिस्ट’ का कहना है कि यह संख्या संकट से पहले के आम हफ्ते में देखे जाने वाले 700 से ज्यादा जहाजों के मुकाबले अभी भी बहुत कम है. अमेरिका और ईरान के अधिकारियों का कहना है कि वे स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए किसी समझौते के करीब हैं. यह तब हो रहा है जब अमेरिकी सेना का कहना है कि ओमान के तट के पास जिस रास्ते की निगरानी में वह मदद करती है, उससे यह जलडमरूमध्य खुला हुआ है. सेना ने इस हफ्ते कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरने वाले सभी कमर्शियल जहाजों के लिए यह रास्ता आज भी आजाद और खुला है.

अब US में पैदा हुए विदेशियों के बच्चों को नहीं मिलेगी नागरिकता! ट्रंप ने ‘बर्थ टूरिज्म’ पर लगाई रोक
क्या होगा अस्थायी समाधान?
एसोसिएटेड प्रेस ने बुधवार को रिपोर्ट दी कि जलडमरूमध्य को लेकर चल रहे विवाद के बीच अस्थायी समाधान हो सकता है. इसके बाद मालवाहक जहाज ईरान के कंट्रोल वाले रास्ते से फारस की खाड़ी में प्रवेश कर सकेंगे और ओमान के कंट्रोल वाले रास्ते से बाहर निकल सकेंगे. ट्रंप प्रशासन ने बार-बार कहा है कि वह किसी भी ऐसी व्यवस्था का कड़ा विरोध करता है जिसके तहत ईरान फीस वसूले. गुरुवार को नाम न बताने की शर्त पर बात करने वाले एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि जलमार्ग से गुजरने वाले किसी भी अस्थायी रास्ते पर कोई टोल, चार्ज या दूसरी रुकावटें नहीं होंगी. अधिकारी ने यह भी कहा कि ट्रंप कूटनीति को प्राथमिकता देते हैं और ईरान से निपटने के मामले में उनके पास सभी विकल्प मौजूद हैं.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कितना अहम?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की बात करें तो यह दुनिया का बहुत ही महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है. यह जब से ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव में युद्ध का केंद्र बना है, तब से इसने दुनिया की अर्थव्यवस्था को काफी प्रभावित किया है. फारस और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला यह समुद्री मार्ग 33 किमी चौड़ा और करीब 167 किमी लंबा है. विश्व की एनर्जी सप्लाई इस रास्ते पर बहुत ही अधिक निर्भर है. रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया का करीब 20 से 25 फीसदी तेल और गैस का व्यापार इसी समुद्री मार्ग से होता है. यह रास्ता एशियाई बाजारों तक करीब 80 फीसदी से अधिक तेल की सप्लाई का माध्यम है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से पूरी दुनिया तो प्रभावित हुई ही है और इससे सबसे अधिक एशियाई बाजार प्रभावित हुए हैं. वहीं, भारत के लिए भी यह रास्ता बहुत ही अहम है क्योंकि यहां से वह 30 से 50 फीसदी तक कच्चे तेल और गैस का आयात करता है. भारत इसी समुद्री मार्ग से ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात समेत अन्य देशों से तेल का आयात करता है. अब यह समुद्री मार्ग प्रभावित हो गया है तो भारत ने अपने खास मित्र रूस से कच्चे तेल की सप्लाई को और अधिक बढ़ा दी है. हालांकि, ईरान एक मित्र राष्ट्र के नाते भारतीय जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जाने देने की बात कहता रहा है.
‘एक पर हमला, तीनों पर वार’… पाक, सऊदी और तुर्की का बड़ा रक्षा दांव, क्या बना इस्लामिक NATO?
