Russia sanctions Bill: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक फिर से भारत को बहुत ही बड़ा झटका दिया है. यह झटका अमेरिका के द्वारा भारतीय सामानों पर टैरिफ लगाने का है.
जी हां, अमेरिकी सीनेट (संसद) में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक पारित किया गया और इस बिल को भारी बहुमत से मंजूरी भी मिल गई है. इसके तहत भारत और चार अन्य देशों पर 100% टैरिफ लगाने का प्रावधान है. बता दें कि अभी तक अमेरिका भारत पर 10 फीसदी का टैरिफ लगाते आ रहे है. आइए जानते हैं पूरी खबर.
भारत समेत इन 5 देशों पर 100% का टैरिफ
न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूएस सीनेट ने रूस और उसके पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के मुख्य खरीदारों, जैसे चीन और भारत को सजा देने वाले बिल को भारी वोटिंग से मंजूरी दे दी है. सीनेट का दावा है कि इस तरह के ट्रेड से यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा मिलता है. इस बिल का नाम बदलकर लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 (Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026) कर दिया गया है. इसे सीनेट ने 86-11 वोटों से मंजूरी दी है.
इससे प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप उन देशों के सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगा सकते हैं जो रूसी तेल और गैस के टॉप पांच इंपोर्टर हैं. अभी चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया रूस से तेल और गैस के टॉप पांच इंपोर्टर हैं.
इस बिल में और क्या है?
रूस पर बैन के अलावा, यह बिल ईरान सैंक्शन्स एक्ट ऑफ 1996 की एक्सपायरी डेट 2031 तक बढ़ा देगा, जो ईरान के एनर्जी सेक्टर में इन्वेस्ट करने वाली कंपनियों पर सजा देता है. इस बिल का समर्थन रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम, जिनका 11 जुलाई को निधन हो गया, और डेमोक्रेट रिचर्ड ब्लूमेंथल ने किया था.
कीव की यात्रा के बाद ग्राहम की अचानक मौत के बाद, सभी पार्टियों के नेताओं ने बिल पास कराने और यूक्रेन के सहयोगी के तौर पर दिवंगत सीनेटर की विरासत का सम्मान करने के लिए नए जोश के साथ काम किया. दिवंगत सीनेटर की बहन डार्लिन ग्राहम, जिन्हें उनकी मौत के बाद उनकी सीट पर नियुक्त किया गया था, ने कहा, “यह बिल रूस की अर्थव्यवस्था को चलाए रखने वाले मुख्य देशों को एक आसान लेकिन जरूरी चुनाव करने के लिए मजबूर करता है – अमेरिका के साथ बिजनेस करने या सस्ती रूसी एनर्जी खरीदने के बीच चुनाव.”
इसमें रूसी नेताओं और अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने की भी कोशिश की गई है, जिसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, अमीर लोगों और फाइनेंशियल संस्थानों को निशाना बनाया गया है.
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में मंजूरी के लिए जाएगा बिला
वोट के बाद, सेनेटर ब्लूमेंथल ने रिपोर्टर्स से कहा कि ग्राहम को “हमने जो किया है, उस पर गर्व होगा.” ब्लूमेंथल ने कहा, “ये बड़े पैमाने पर लगाए गए बैन और टैरिफ उन सभी को रोक देंगे जो बहादुर आजाद लोगों के खिलाफ इस जानलेवा, क्रिमिनल लड़ाई में शामिल हैं.”
कुछ डेमोक्रेट्स ने चेतावनी दी है कि यह बिल ट्रंप को ऐसे समय में नए टैरिफ पावर देगा जब उन्होंने ऐसे लेवी को अपनी ट्रेड पॉलिसी के सेंटर में रखा है. यह बिल अब 31 अगस्त को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में मंजूरी के लिए जाएगा जब वह फिर से बैठेगी.
टैरिफ वाले बिल की आलोचना
वहीं, डेमोक्रेट कांग्रेसी ग्रेगरी मीक्स और डॉन बेयर ने इस बिल की आलोचना करते हुए कहा है कि यह “बड़े पैमाने पर नए टैरिफ अथॉरिटीज बनाता है जिनका इस्तेमाल प्रेसिडेंट बिना किसी रोक-टोक के हथियार के तौर पर कर सकते हैं, जैसा कि उन्होंने पहले भी कई बार किया है.”
दोनों नेताओं ने कहा, “हम यूक्रेन को सपोर्ट करने और रूस को उसके लगातार गैर-कानूनी युद्ध के लिए सजा देने के लिए अपने सीनेट के साथियों की तुरंत कोशिश का स्वागत करते हैं, लेकिन यह बिल उन लक्ष्यों को हासिल नहीं करेगा. इसके बजाय, यह प्रेसिडेंट ट्रंप को रूस को जिम्मेदार ठहराने से बचने और अपने नुकसान पहुंचाने वाले ट्रेड वॉर में और ज्यादा टैरिफ लगाने का मौका देगा, जिससे अमेरिकियों को बिल भरना पड़ेगा.”
भारत पर ट्रंप ने लगाया था 50% का टैरिफ
मालूम हो कि बीते साल अमेरिका के द्वारा भारत पर मनमाने ढंग से टैरिफ लगाने के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते थोड़े तनाव वाले हो गए थे. अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने सबसे पहले ब्रिक्स सदस्यों पर 10 फीसदी का टैरिफ लगाया, क्योंकि इन देशों ने अपने ट्रेड को डॉलर में नहीं बल्कि अपनी-अपनी करेंसी में करने का फैसला किया था. उसके बाद ट्रंप ने भारत पर कुल 25 फीसदी का टैरिफ लगा दिया था, यह पारस्परिक टैरिफ (Reciprocal Tariff) था. उसके बाद अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड में तनाव और बढ़ता गया.
अगस्त 2025 में अमेरिकी प्रेसिडेंट ने भारत पर अतिरिक्त 25 फीसदी का और टैरिफ लगा दिया, जिससे अमेरिका के द्वारा भारत पर कुल टैरिफ 50 फीसदी का हो गया. मतलब कि भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले सामानों पर ट्रंप 50 फीसदी का टैक्स वसूलने लगे.
ट्रंप के इस मनमाने टैरिफ से भारत-अमेरिका ट्रेड के बीच टेंशन वाला माहौल हो गया. दोनों देशों के बीच जारी द्विपक्षीय ट्रेड बातचीत भी थम गई. शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई. कई कंपनियों के शेयर औंधे मुंह गिर गए. उसके बाद ट्रंप की भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में आलोचना होने लगी. अमेरिका में ही कई दिग्गज लोग ट्रंप का विरोध करने लगे. हालांकि, इस साल फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप के बीच बैठक से दोनों देशों के रिश्ते में आई कड़वाहट कम हुई और ट्रंप ने भारत पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ को वापस लेने का फैसला कर लिया.
उसके बाद ट्रंप को अमेरिकी अदालत से भी झटका लगा. तब भारत समेत दुनिया के कई देशों पर अमेरिका केवल 10 फीसदी टैरिफ लगाने लगा, लेकिन अब ट्रंप एक बार फिर से टैरिफ वार शुरू कर रहे हैं. उन्होंने भारत समेत पांच देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने वाले बिल का समर्थन किया है. अब देखने वाली बात यह होगी कि आगे भारत और अमेरिका का ट्रेड किस ओर रुख करता है.
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News Source: PTI
