Home मनोरंजन Meena Kumari की जिंदगी गुजरी ‘तन्हा चांद’ की तरह, ‘कमाल’ से शादी भी ना कर सकी कमाल; नसीब में आईं तन्हाइयां

Meena Kumari की जिंदगी गुजरी ‘तन्हा चांद’ की तरह, ‘कमाल’ से शादी भी ना कर सकी कमाल; नसीब में आईं तन्हाइयां

by Preeti Pal 1 August 2024, 4:22 PM IST (Updated 25 August 2025, 11:34 AM IST)
1 August 2024, 4:22 PM IST (Updated 25 August 2025, 11:34 AM IST)
Meena Kumari की जिंदगी गुजरी तन्हा चांद की तरह, कमाल से शादी भी ना कर सकी कमाल; नसीब में आईं तन्हाइयां

Meena Kumari: जिंदगी में अगर तमाम तमन्नाएं पूरी हो जाएं तो जिंदगी क्या रही…. बस इन्हीं लाइनों के सहारे मीना कुमारी ने भी जिंदगी काट दी.

01 August, 2024

Meena Kumari: मीना कुमारी वो अदाकारा थीं जिन्हें देखकर बड़े-बड़े एक्टर अपने डायलॉग भूल जाया करते थे. नूर ऐसा कि उनकी खूबसूरती की तारीफ में हर लफ्ज कम पड़ जाता. हालांकि, वह जितनी सफल और खूबसूरत थीं, उतनी ही अधूरी थी ट्रैजेडी क्वीन की जिंदगी. कहते हैं, हर किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता.. किसी को जमीन तो किसी को आसमां नहीं मिलता…निदा फाज़ली का यह शेर मीना कुमारी की जिंदगी पर एक दम फिट बैठा. उन्हें दौलत मिली, शोहरत मिली मगर प्यार नहीं मिला.

‘बैजू बावरा’, ‘पाकीज़ा’, ‘साहिब बीवी और गुलाम’ जैसी बेहतरीन फिल्मों से हर दिल पर राज करने वालीं मीना कुमारी अक्सर अपना दर्द बयां करने के लिए शायरी का सहारा लिया करती थीं. जीते जी मीना ने कभी यह ख्वाहिश नहीं की कि उनकी शायरी कहीं भी छपे. हां मगर मरने के बाद उनकी कुछ शायरी की एक किताब ‘नाज़’ के नाम से जरूर छपी. गुलजार ने मीना कुमारी की शायरी को ‘तन्हा चांद’ का नाम दिया.

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बचपन से ही ट्रैजेडी क्वीन

अगर आपको लग रहा है कि मीना कुमारी की जवानी ट्रैजेडी से भरी रही तो गलतफहमी है दोस्त… उनका तो बचपन भी रुला देने वाला रहा. वह अपने माता-पिता की तीसरी बेटी थीं, क्योंकि पहले से ही दो बेटियां थीं तो मीना कुमारी के पैदा होते ही पिता उन्हें अनाथ आश्रम ले गए. मगर नन्ही सी जान का रोना पिता अली बख्श देख नहीं पाए और मीना को वापस घर ले आए और उसका नाम रखा महजबीं बानो. घर के आर्थिक हालात ठीक नहीं थे तो 4 साल की उम्र से महजबीं के अब्बू उन्हें फिल्मों के सेट पर ले जाने लगे. ऐसे में ना वो पढ़ाई कर पाईं और ना ही अपना बचपन जी पाईं.

ऐसे पड़ा मीना कुमारी नाम

4 साल की छोटी सी उम्र से महजबीं ने फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था. उनकी पहली फिल्म थी ‘लैदरफेस’ जो साल 1939 में रिलीज हुई थी. 1940 में फिल्म एक ही भूल के एक्टर विजय भट्ट ने उनका नाम महजबीं से बदलकर बेबी मीना रख दिया. बचपन छूटा तो उनके नाम से बेबी हट गया और वह बन गईं मीना कुमारी. फिर साल 1952 में रिलीज हुई फिल्म ‘बैजू बावरा’ ने मीना कुमारी के करियर को नई उड़ान दी. यह फिल्म 100 हफ्तों तक थिएटर्स में लगी रही. इसके बाद ‘दो बीघा जमीन’, ‘परिणीता’, ‘एक ही रास्ता’ जैसी फिल्मों ने उन्हें हिंदी सिनेमा की टॉप एक्ट्रेस बना दिया.

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