120 Bahadur: बॉलीवुड स्टार फरहान अख्तर की नई फिल्म ‘120 बहादुर’ लगातार चर्चा में हैं. हालांकि, ये फिल्म रिलीज़ से पहले ही कंट्रोवर्सी में फंस चुकी है. आप भी जानें पूरा मामला.
18 November, 2025
120 Bahadur: फरहान अख्तर की आने वाली फिल्म ‘120 बहादुर’, रिलीज से पहले विवादों में घिर गई है. दरअसल, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल एक पिटीशन पर सोमवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने साफ कहा कि वो याचिकाकर्ताओं की शिकायत पर 2 दिनों के अंदर फैसला लिया जाएगा. आपको बता दें कि ये पिटीशन ‘संयुक्त अहीर रेजिमेंट मोर्चा’ और रेज़ांग ला वॉर में शहीद हुए सैनिकों के रिलेटिव्स ने दायर की थी. उनकी सबसे बड़ी मांग ये थी कि फिल्म का नाम ‘120 बहादुर’ बदलकर 120 अहीर वीर रखा जाए. उनका कहना है कि रेज़ांग ला के 120 में से 113 सैनिक अहीर समुदाय से थे. यही वजह है कि फिल्म में इस सामूहिक शौर्य को बराबरी से दिखाया जाना चाहिए.

जोड़ें जाएं सैनिकों के नाम
याचिका में ये भी कहा गया कि फिल्म में सभी 120 सैनिकों के नाम जोड़े जाएं, ऐतिहासिक तथ्य सुधारे जाएं और एक सही डिस्क्लेमर शामिल किया जाए. अगर ये नहीं हो सकता, तो इस फिल्म को पूरी तरह से फिक्शन घोषित किया जाए. सरकार की तरफ से पेश सीनियर वकील धीरज जैन ने बताया कि, याचिकाकर्ताओं की शिकायत पर सिनेमैटोग्राफ एक्ट की धारा 6 के तहत कार्रवाई की जाएगी. 2 दिनों के अंदर केंद्र इसकी समीक्षा करके अपना फैसला सुनाएगा.
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फिल्म की खासियत
साल 1962 में लद्दाख के चुशूल सेक्टर में 18,000 फीट की ऊंचाई पर हुआ रेज़ांग ला युद्ध भारतीय सैन्य इतिहास में बहुत ही खास माना जाता है. ऑफिशियल रिकॉर्ड के मुताबिक, 120 सैनिकों में से 114 ने शहादत दी थी. पिटीशन के अनुसार, फिल्म में इस सामूहिक बलिदान को धुंधला कर दिया गया है. इसके अलावा मेजर शैतान सिंह को अकेले हीरो की तरह पेश किया गया है, जबकि ये लड़ाई एक पूरी टीम की वीरता का प्रतीक थी. आपको बता दें कि मेजर शैतान सिंह को इस लड़ाई में शहादत के बाद परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था. वहीं, याचिकाकर्ताओं का कहना है कि फिल्म में सिर्फ उन्हीं को सेंटर में दिखाकर पूरे अहीर रेजिमेंट के योगदान को कम दिखाया जा रहा है.

कहानी के साथ छेड़छाड़
फिल्म के प्रोड्यूसर एक्सेल एंटरटेनमेंट की तरफ से वकील अभिनव सूद ने कहा कि पिटीशन सिर्फ टीज़र और ट्रेलर देखकर फाइल की गई है. कानून के मुताबिक सिर्फ प्रमोशन कंटेंट को देखकर फिल्म की कहानी का फैसला नहीं किया जा सकता. पूरी फिल्म देखे बिना किसी भी तरह का बैन या कमेंट करना ठीक नहीं है. वही, याचिकाकर्ताओं ने ये भी आरोप लगाया कि ये फिल्म इतिहास को गलत तरीके से पेश कर रही है, जो सिनेमैटोग्राफ एक्ट और 1991 के सर्टिफिकेशन गाइडलाइंस का उल्लंघन है. उनका ये भी कहना है कि रक्षा मंत्रालय और सेंसर बोर्ड ने फैक्ट्स चेक करने और परिवारों से सलाह लेने में लापरवाही बरती है. दूसरी तरफ, ‘120 बहादुर’ की टीम का कहना है कि याचिकाकर्ता पहले ही धारा 6 के तहत केंद्र से फिर से विचार करने की मांग कर चुके हैं, इसलिए सीधे हाईकोर्ट जाना सही नहीं है. खैर, अब मेकर्स की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार अगले दो दिनों में क्या फैसला सुनाती है.
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