Satluj: दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ एक बार फिर विवादों के सेंटर में आ गई है. फिल्म को रिलीज होने के सिर्फ 2 दिन बाद ही OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 से हटा दिया गया. सरकार की तरफ से इसे हटाने के पीछे सिक्योरिटी रीजन और आईटी रूल्स 2021 का हवाला दिया गया है. वहीं, पंजाब की कई पॉलिटिकल पार्टियों, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और खुद दिलजीत दोसांझ ने इस फैसले का विरोध किया है.
क्यों हुआ बवाल
दिलजीत दोसांझ की ये फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की लाइफ पर बेस्ड है. इसमें पंजाब के उस दौर को दिखाया गया है, जब 1980 और 1990 के दशक में राज्य आतंकवाद और हिंसा से जूझ रहा था. फिल्म के डायरेक्टर हनी त्रेहान हैं. ये फिल्म पिछले 3 सालों से रिलीज का इंतजार कर रही थी. दरअसल, पहले इस फिल्म का नाम ‘पंजाब 95’ था. मेकर्स ने साल 2022 में इसे थिएटर रिलीज के लिए सेंसर बोर्ड के पास भेजा था. लेकिन सेंसर बोर्ड ने फिल्म में 127 कट लगाने का सुझाव दिया. फिल्म के मेकर्स ने इतने बड़े बदलाव स्वीकार नहीं किए, जिसकी वजह से ‘सतलुज’ की थिएटर रिलीज रुक गई.
2 दिन में ही हटी फिल्म
इसके बाद फिल्म को बिना किसी प्रमोशन के नए नाम ‘सतलुज’ के साथ ZEE5 पर रिलीज कर दिया गया. हालांकि, रिलीज के सिर्फ दो दिन बाद ही इसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, OTT पर आने वाली फिल्मों के लिए भी सूचना प्रौद्योगिकी नियमों का पालन जरूरी है. इसी बेस पर ZEE5 को फिल्म हटाने का निर्देश दिया गया. दिलजीत दोसांझ ने अमेरिका से इंस्टाग्राम लाइव के दौरान इस पूरे मामले पर अपना रिएक्शन दिया. उन्होंने कहा कि उन्हें पहले से अंदाजा था कि फिल्म के साथ ऐसा हो सकता है. उनके मुताबिक, उन्होंने फिल्म का प्रमोशन भी इसलिए नहीं किया क्योंकि उन्हें डर था कि ज्यादा चर्चा होने पर इसे और जल्दी हटाया जा सकता है.
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दिलजीत की खुशी
दिलजीत ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि कम से कम कुछ लोग फिल्म देख पाए. उन्होंने लोगों से कहा कि अगर फिल्म कहीं भी उपलब्ध हो तो उसे जरूर देखें, क्योंकि उनका मकसद लोगों तक अपनी बात पहुंचाना था और वो काफी हद तक पूरा हो चुका है. फिल्म हटाए जाने के बाद पंजाब की राजनीति भी गरमा गई. शिरोमणि अकाली दल, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इस फैसले की आलोचना की. सभी नेताओं का कहना है कि इतिहास के कठिन दौर को लोगों के सामने आने से रोकना सही नहीं है. उनका मानना है कि नई जेनेरेशन को ये जानने का अधिकार है कि उस टाइम पंजाब में क्या हुआ था.
छिपाई जा रही है सच्चाई!
SGPC के नेताओं ने भी इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया. उनका कहना है कि अगर फिल्म ऐतिहासिक घटनाओं और न्यायालयों में साबित हो चुके मामलों को दिखाती है, तो उसे रोकने का क्या मतलब है? उन्होंने कहा कि सच्चाई को छिपाने से इतिहास नहीं बदल सकता. इस बीच ZEE5 ने भी सोशल मीडिया पर बयान जारी किया. प्लेटफॉर्म ने कहा कि वो फिल्म को दोबारा स्ट्रीम कराने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने लोगों से अपील की है कि, वो पायरेसी का सपोर्ट न करें.
जसवंत सिंह खालड़ा
दिलजीत की ‘सतलुज’ जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी है. उन्होंने पंजाब में बड़ी संख्या में अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार के मामलों की जांच की थी. साल 1995 में उनका अपहरण कर लिया गया था. बाद में उनकी हत्या कर दी गई. इस मामले में 2005 में पंजाब पुलिस के चार कर्मचारियों को दोषी ठहराया गया था. बाद में उनकी सजा उम्रकैद में बदल दी गई. फिल्म पहले भी कई विवादों का सामना कर चुकी है. साल 2023 में इसे टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में दिखाया जाना था, लेकिन आखिरी टाइम में लाइन-अप से हटा दिया गया. इसके बाद साल 2025 में भारत को छोड़कर दुनिया भर में रिलीज की प्लानिंग भी पूरी नहीं हो सकी. अब फिल्म के OTT से हटने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है. कई फिल्ममेकर्स और एक्टर्स ने इसे क्रिएटिव फ्रीडम और अभिव्यक्ति की आज़ादी से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताया है.
News Source: PTI
