Home Latest News & Updates गंगा-यमुना का रौद्र रूप: प्रयागराज के अरैल, किला और दशाश्वमेध घाट पूरी तरह पानी में डूबे, संगम क्षेत्र जलमग्न

गंगा-यमुना का रौद्र रूप: प्रयागराज के अरैल, किला और दशाश्वमेध घाट पूरी तरह पानी में डूबे, संगम क्षेत्र जलमग्न

by Live Times 21 August 2026, 5:56 PM IST (Updated 21 August 2026, 5:57 PM IST)
21 August 2026, 5:56 PM IST (Updated 21 August 2026, 5:57 PM IST)
गंगा-यमुना का रौद्र रूप: प्रयागराज के अरैल, किला और दशाश्वमेध घाट पूरी तरह पानी में डूबे

Prayagraj Flood: प्रयागराज में गंगा और यमुना के लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच संगम क्षेत्र में बाढ़ का असर अब मठों और धार्मिक स्थलों तक पहुंच गया है. शास्त्री ब्रिज और रेलवे ब्रिज के बीच स्थित देवरहा बाबा के शिष्य रामदास महाराज की कुटिया पूरी तरह बाढ़ के पानी में घिर गई है. कुटिया के नीचे का पूरा इलाका जलमग्न है. हवन कुंड भी पानी में डूब चुका है, लेकिन करीब 60 फीट की ऊंचाई पर स्थापित अखंड ज्योति अब भी लगातार जल रही है. प्रयागराज में पिछले कुछ दिनों से गंगा और यमुना के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. अरैल घाट, किला घाट, गऊघाट और दशाश्वमेध घाट समेत कई घाटों का बड़ा हिस्सा पानी में डूब चुका है.

देवरहा बाबा की कुटिया जलमग्न

पानी बढ़ने के साथ संगम क्षेत्र में स्थित धार्मिक स्थलों के आसपास भी हालात बदल गए हैं. घाटों पर पहुंचने वाले लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है और कई स्थानों पर सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है. देवरहा बाबा के शिष्य रामदास महाराज की कुटिया भी बाढ़ की चपेट में है. कुटिया के आसपास पानी का तेज बहाव बना हुआ है. इसके बावजूद ऊंचाई पर स्थापित अखंड ज्योति के लगातार जलते रहने को श्रद्धालु आस्था से जोड़कर देख रहे हैं.

संगम क्षेत्र में नावों के संचालन पर रोक

बताया जाता है कि इस अखंड ज्योति का संबंध वर्ष 1989 में शुरू हुए राम मंदिर आंदोलन से है. आंदोलन के दौरान जलाई गई यह ज्योति तब से लगातार प्रज्वलित बताई जाती है. माघ मेला और कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान इस कुटिया में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. सामान्य दिनों में भी संगम आने वाले लोगों के लिए यह स्थान आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है. बाढ़ के पानी के बीच भी अखंड ज्योति के जलते रहने की तस्वीर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. इधर, गंगा और यमुना में बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव को देखते हुए प्रशासन ने संगम क्षेत्र में नावों के संचालन पर रोक लगा दी है.

हालात पर रख रहा नजर प्रशासन

सुरक्षा के मद्देनजर करीब चार हजार नावें फिलहाल घाटों के किनारे खड़ी हैं. तेज बहाव के कारण किसी तरह की दुर्घटना न हो, इसके लिए नाविकों को भी सतर्क किया गया है. प्रशासन की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने घाटों और आसपास के धार्मिक स्थलों की निगरानी बढ़ा दी है. लोगों से नदी के किनारे जाने से बचने और प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है. जलस्तर बढ़ने के साथ संगम क्षेत्र में हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है.

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  • प्रयागराज से विकास मिश्र की रिपोर्ट

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