Dementia: डिमेंशिया (Dementia) और पार्किंसन (Parkinson’s Disease) दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही न्यूरोलॉजिकल बीमारियों में शामिल हैं. पहले इन्हें केवल बढ़ती उम्र से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब शोध बताते हैं कि जीवनशैली, खानपान, तनाव, नींद की गुणवत्ता और शारीरिक सक्रियता भी मस्तिष्क के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं. हालांकि इन बीमारियों को हर मामले में रोका नहीं जा सकता, लेकिन स्वस्थ आदतें अपनाकर इनके जोखिम को कम करने और बेहतर जीवन गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
समझें डिमेंशिया और पार्किंसन में अंतर?
डिमेंशिया कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि कई लक्षणों का समूह है. इसमें याददाश्त का कमजोर होना, सोचने-समझने की क्षमता में कमी, निर्णय लेने में कठिनाई और दैनिक कार्यों को करने में परेशानी होने लगती है. अल्ज़ाइमर रोग डिमेंशिया का सबसे सामान्य प्रकार माना जाता है. तो वहीं पार्किंसन रोग मुख्य रूप से शरीर की गतिविधियों को प्रभावित करता है. इसमें मस्तिष्क की डोपामिन बनाने वाली कोशिकाएं धीरे-धीरे कम होने लगती हैं, जिससे हाथों में कंपन, शरीर में जकड़न, संतुलन बिगड़ना और चलने-फिरने में कठिनाई जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
किन कारणों से बढ़ सकता है जोखिम?
विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती उम्र के अलावा कई अन्य कारक भी इन बीमारियों के खतरे को बढ़ा सकते हैं. इनमें आनुवंशिक प्रवृत्ति, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, लंबे समय तक तनाव, पर्याप्त नींद न लेना, धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन, शारीरिक निष्क्रियता और वायु प्रदूषण जैसे पर्यावरणीय कारक शामिल हैं।
मस्तिष्क के लिए कौन-से पोषक तत्व जरूरी हैं?
संतुलित आहार मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के सामान्य कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. विटामिन B12 नसों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक माना जाता है. जबकि विटामिन D मांसपेशियों और मस्तिष्क के कार्यों में सहायक होता है. ओमेगा-3 फैटी एसिड, मैग्नीशियम, जिंक, विटामिन C और विटामिन E जैसे पोषक तत्व कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने और सामान्य न्यूरोलॉजिकल कार्यों को बनाए रखने में योगदान दे सकते हैं. दूध, दही, अंडा, मछली, हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, अखरोट, बादाम, अलसी के बीज, चिया सीड्स, आंवला, अनार, संतरा और अन्य मौसमी फल संतुलित आहार का हिस्सा बनाए जा सकते हैं।
इन चीजों को खाने से करें परहेज
अत्यधिक चीनी, प्रोसेस्ड फूड, ट्रांस फैट, बार-बार तला हुआ भोजन, मीठे पेय, धूम्रपान और शराब का अधिक सेवन शरीर और मस्तिष्क दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इनकी मात्रा सीमित रखना या इनसे बचना बेहतर विकल्प माना जाता है।
क्या योग और व्यायाम फायदेमंद हैं?
नियमित व्यायाम और योग मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं. ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन, सेतुबंधासन और शवासन जैसे योगासन शरीर के संतुलन और लचीलेपन में मदद करते हैं. वहीं अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, नाड़ी शोधन और गहरी श्वास जैसी प्राणायाम तकनीकें तनाव कम करने, मानसिक शांति और बेहतर नींद में सहायक मानी जाती हैं. इसके साथ प्रतिदिन 30–45 मिनट पैदल चलना और 15–20 मिनट ध्यान करना भी लाभदायक हो सकता है।
Disclaimer: मस्तिष्क की देखभाल भी उतनी ही जरूरी है जितनी हृदय या शरीर के अन्य अंगों की. संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, तनाव प्रबंधन और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच जैसी आदतें लंबे समय तक मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती हैं. यदि किसी व्यक्ति में लगातार भूलने की समस्या, हाथों में कंपन, चलने में कठिनाई या व्यवहार में स्पष्ट बदलाव दिखाई दें, तो स्वयं उपचार करने के बजाय जल्द से जल्द न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए. ध्यान रखें कि योग और संतुलित आहार चिकित्सा के पूरक हो सकते हैं.लेकिन वे चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं हैं.
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