Home Top News गिड़गिड़ाता रहा बेटा पर नहीं पसीजा दिल : जिला अस्पताल में किडनी मरीज को नहीं मिला बेड

गिड़गिड़ाता रहा बेटा पर नहीं पसीजा दिल : जिला अस्पताल में किडनी मरीज को नहीं मिला बेड

by Sanjay Kumar Srivastava 30 September 2026, 5:13 PM IST (Updated 30 September 2026, 5:14 PM IST)
30 September 2026, 5:13 PM IST (Updated 30 September 2026, 5:14 PM IST)
गिड़गिड़ाता रहा बेटा पर नहीं पसीजा डॉक्टरों का दिल :अस्पताल में 5 घंटे तक नहीं मिला बेड तो व्हीलचेयर पर बीमार मां को लेकर पहुंचा विधायक के घर

Medical Negligence: तेलंगाना में एक अजीब मामला सामने आया है. बेटा बीमार मां को व्हीलचेयर पर लेकर जिला अस्पताल के बाहर 5 घंटे तक खड़ा रहा. इस दौरान बेटा अपनी बीमार मां को देखने के लिए अस्पताल कर्मियों से लगातार गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों का दिल नहीं पसीजा. जिला अस्पताल में महिला को न तो बेड मिला और न ही व्हीलचेयर तक आकर किसी डॉक्टर ने देखने की जहमत उठाई. सरकारी अस्पताल की लापरवाही से नाराज होकर बेटा अपनी बीमार मां को व्हीलचेयर पर लेकर सीधे स्थानीय विधायक के घर पहुंच गया. यह घटना मंगलवार रात तेलंगाना के मंचेरियल जिले की है.

अस्पताल पर लापरवाही का आरोप

जानकारी के मुताबिक, राज कुमार नाम का युवक अपनी 55 वर्षीय मां बुकिया बुज्जी को व्हीलचेयर पर दो किलोमीटर तक धकेलते हुए मंचेरियल के विधायक के. प्रेमसागर राव के घर तक ले गया. बताया जाता है कि महिला किडनी की बीमारी से पीड़ित थी. वह मंडामर्री मंडल के पुलिमडुगु गांव की रहने वाली है और अपने बेटे के साथ इलाज के लिए मंचेरियल के जिला सरकारी अस्पताल आई थी. राज कुमार ने आरोप लगाया कि अस्पताल के स्टाफ ने उसकी मां को पांच घंटे तक व्हीलचेयर पर ही इंतजार कराया. कोई भी स्टाफ उनकी बीमार मां की देखभाल के लिए आगे नहीं आया.

व्हीलचेयर पर बीमार मां को लेकर पहुंचा विधायक के घर

कहा कि इसी से परेशान होकर वह अपनी मां को सड़क पर व्हीलचेयर पर धकेलते हुए दो किलोमीटर दूर स्थानीय विधायक के घर ले गया ताकि विधायक का ध्यान उनकी परेशानी की ओर खींच सके. बेटे ने दावा किया कि उसने अस्पताल के स्टाफ से कई बार अपनी मां के लिए बेड की व्यवस्था करने और इलाज शुरू करने की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी. पांच घंटे इंतजार करने के बाद भी अस्पताल प्रशासन की तरफ से कोई जवाब नहीं आया. राज कुमार ने कहा कि उसने अस्पताल के अधिकारियों से कम से कम उसकी मां को करीमनगर के अस्पताल में रेफर करने की भी मांग की, लेकिन उन्होंने मना कर दिया. आरोप है कि उससे कहा गया कि वह अपनी मां को प्राइवेट अस्पताल ले जाए.

जानकारी होते ही हरकत में आए डॉक्टर

बेटे ने कहा कि उसके पास अपनी मां को विधायक के घर व्हीलचेयर पर ले जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था ताकि विधायक हस्तक्षेप कर सकें. मामले की जानकारी मिलने पर जिला अस्पताल के रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर (आरएमओ) तुरंत वहां पहुंचे और महिला व उसके बेटे को उचित चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया. इस आश्वासन के बाद महिला को वापस अस्पताल ले जाया गया. अस्पताल प्रशासन ने बेड की व्यवस्था की और उसका इलाज शुरू किया. अधिकारियों ने मरीज की देखभाल में हुई लापरवाही की जांच का भरोसा दिया है.

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