Shri Krishna Janmashtami: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री निवास का माहौल पूरी तरह भक्तिमय रहा. यहां चारों ओर कृष्ण भजन गूंजे, महारास हुआ और राधा-कृष्ण बने बच्चों ने जमकर मस्ती की. पवित्रता के इस वातावरण के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नन्हें गोपाल को हाथ में लेकर मटकी फोड़ी. उन्होंने बच्चों को खुद माखन-मिश्री खिलाई. श्री कृष्ण भक्ति में डूब ये पल लोगों के लिए यादगार बन गए. कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों के अलावा आम नागरिक और संत समाज भी मौजूद था.
गौरवशाली इतिहास है भगवान कृष्ण का
इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज का यह मौका हमारे लिए सौभाग्य की बात है. भगवान कृष्ण का इतिहास गौरवशाली है. उनके जीवन के सारे पक्ष आज भी समसामयिक हैं. भगवान कृष्ण के जीवन की घटनाओं से हम सभी बहुत कुछ सीख सकते हैं. उन्होंने कहा कि हमारा देश राम-कृष्ण के नाम से जाना जाता है. उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण के विभिन्न पक्षों से प्रेरणा मिलती है.
श्री कृष्ण ने बताया शिक्षा का महत्व
सीएम डॉ. यादव ने कहा कि चाहे कालिया मर्दन हो, इंद्र के घमंड को चूर-चूर करना हो, चाहे कंस को उसके घर में मारने का घटनाक्रम हो, ये सभी हमें ये प्रेरणा देते हैं. जीवन के कठिन काल में भी भगवान श्री कृष्ण ने दुनिया को शिक्षा का महत्व बताया. उन्होंने सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण की और दुनिया के सामने उदाहरण पेश किया. सांदीपनि आश्रम में ही भगवान श्री कृष्ण की सुदामा से मित्रता हुई.
उन्होंने संस्मरण सुनाते हुए कहा कि जामनगर एयरपोर्ट पर पंडित दिनकर जोशी ने पुस्तक लिखी है. उसके सार में यह है कि भगवान श्री कृष्ण जब शिक्षा लेने गए थे, तब तक सांदीपनि आश्रम की ख्याति फैल गई थी. मूलरूप से महर्षि सांदीपनि का पहला आश्रम बनारस में था, लेकिन कंस से शासन की अराजकता के कारण उन्होंने वह आश्रम बंद कर दिया और 6 माह के बच्चे को लेकर आगे बढ़ गए. सीएम डॉ. यादव ने कहा कि उस समय तक महर्षि सांदीपनि की ख्याति इतनी था कि विश्व उनके आगे नतमस्तक था. उन्होंने 64 कलाएं-14 विद्या से श्री कृष्ण का व्यक्तित्व निर्माण किया.
PM मोदी ने किया देश को मजबूत
CM डॉ. यादव ने कहा कि हमने निर्णय लिया कि केवल छुट्टी करने से काम नहीं चलेगा. हमारी नई पीढ़ी के सामने भगवान के वो सारे पक्ष आने चाहिए, जिससे उन्हें जानकारी और आगे बढ़ने का अवसर मिले. इसलिए हमने सारे त्योहार मनाने की परंपरा सरकार के जरिये शुरू की. जब समाज त्योहार मनाता है तो सरकार को भी उसमें शामिल होना चाहिए. भगवानों के जीवन पर और भी शोध होना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व के सामने आर्थिक ताकत बनकर खड़ा हो रहा है. उन्होंने विश्व के सामने भारत की पहचान मानवता को रखा. उन्होंने विश्व बंधुत्व की भावना को बढ़ाते हुए विश्व को बताया कि सनातन संस्कृति की धारा देने वाली है, लेने वाली नहीं है. सनातन संस्कृति की धारा सत्ता आधारित दुनिया को दबाने वाली नहीं है.
