Home Latest News & Updates गोवा में महिलाओं में बढ़ रहा लंग कैंसर, एंटी-टोबैको NGO ने की तुरंंत जांच की मांग, एक दशक में 4 गुना बढ़े मामले

गोवा में महिलाओं में बढ़ रहा लंग कैंसर, एंटी-टोबैको NGO ने की तुरंंत जांच की मांग, एक दशक में 4 गुना बढ़े मामले

by Neha Singh 9 September 2026, 11:02 AM IST (Updated 9 September 2026, 11:03 AM IST)
9 September 2026, 11:02 AM IST (Updated 9 September 2026, 11:03 AM IST)
Women Lung Cancer Surge

Women Lung Cancer Surge: एक एंटी-टोबैको एडवोकेसी ग्रुप ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि गोवा में लंग कैंसर के मरीजों में महिलाओं की संख्या बढ़ रही है. सेकंड-हैंड स्मोक, पर्यावरण प्रदूषण और काम से जुड़े खतरों जैसे संभावित रिस्क फैक्टर्स की तुरंत जांच की जरूरत है. गोवा में हर साल लंग कैंसर के 120 से 150 नए मामले सामने आते हैं. नेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर टोबैको इरेडिकेशन (NOTE) इंडिया ने मंगलवार को दावा किया कि लगभग एक दशक पहले इन मामलों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 10 प्रतिशत थी, लेकिन हाल के सालों में यह बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत हो गई है.

जांच करने की जरूरत

NOTE इंडिया के अध्यक्ष डॉ. शेखर साल्कर ने एक बयान में कहा, “यह महामारी विज्ञान से जुड़ा एक बड़ा बदलाव है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. हालांकि तंबाकू स्मोकिंग लंग कैंसर के सबसे बड़े रिस्क फैक्टर्स में से एक है, लेकिन फिर भी गोवा में लंग कैंसर के मरीजों में महिलाओं की बढ़ती हिस्सेदारी के पीछे के कारणों की एक सिस्टमैटिक जांच की जरूरत है.” संस्था ने गोवा सरकार, मेडिकल इंस्टीट्यूशन्स और एकेडमिक रिसर्च ऑर्गनाइजेशन्स से बदलते लंग कैंसर प्रोफाइल की पूरी स्टडी करने की अपील की.

सालकर ने कहा कि गोवा में लंग कैंसर के बदलते जेंडर प्रोफाइल की जांच की जानी चाहिए, खासकर उन महिलाओं में जो कभी एक्टिव स्मोकर नहीं रही हैं. उन्होंने कहा, “घर पर, काम की जगह पर या दूसरी बंद जगहों पर तंबाकू के धुएं के संपर्क में आने से गंभीर नतीजे हो सकते हैं. हमें यह समझने की जरूरत है कि गोवा में महिलाओं में बदलते लंग कैंसर के बोझ का कितना हिस्सा पैसिव स्मोकिंग और दूसरी रोकी जा सकने वाली चीजों से जुड़ा हो सकता है.” सालकर ने कहा, “हमें इस बढ़ोतरी के कारण के बारे में जल्दबाज़ी में कोई नतीजा नहीं निकालना चाहिए. लेकिन साथ ही, हम इस सिग्नल को नजरअंदाज भी नहीं कर सकते. पुरुष-महिला अनुपात में इतने बड़े बदलाव की तुरंत जांच करने की जरूरत है.”

कानून लागू करने की मांग

NGO ने स्मोकिंग न करने वालों को तंबाकू के धुएं के अनजाने संपर्क में आने से बचाने की जरूरत पर भी ज़ोर दिया और स्मोक-फ्री कानूनों को और मजबूती से लागू करने की मांग की. साल्कर ने कहा, “सेकंड-हैंड स्मोक एक ऐसा खतरा है जो दिखता नहीं है, लेकिन इसके नतीजे बहुत असली होते हैं. जो महिलाएं और बच्चे स्मोकिंग नहीं करते हैं, उन्हें किसी दूसरे व्यक्ति के तंबाकू इस्तेमाल से सेहत पर पड़ने वाले असर नहीं झेलने चाहिए.”

सेकंड हैंड स्मोक से बढ़ रही मौतों की संख्या

द लैंसेट में छपी एक स्टडी का हवाला देते हुए, इसमें कहा गया है कि भारत में सेकंड-हैंड स्मोक से होने वाली मौतें 1990 में लगभग 2.17 लाख से बढ़कर 2023 में लगभग 3.26 लाख हो गईं. इसमें आगे कहा गया है कि देश में सेकंड-हैंड स्मोक के संपर्क में आने वाले लोगों की संख्या 2023 में लगभग 44.4 करोड़ होने का अनुमान है, जो 1990 में 37.5 करोड़ थी. संस्था के अनुसार, स्टडी में यह भी अनुमान लगाया गया है कि सेकंड-हैंड स्मोक से कई गंभीर हेल्थ कंडीशन का खतरा बढ़ जाता है, जिसमें लंग कैंसर, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, लोअर रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन, इस्केमिक हार्ट डिजीज, ब्रेस्ट कैंसर, अस्थमा और स्ट्रोक शामिल हैं.

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News Source: PTI

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