Andy Burnham: ब्रिटेन में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, देश को पिछले दस सालों में अब अपना सातवां प्रधानमंत्री मिल गया है. कीर स्टारमर के इस्तीफे के बाद एंडी बर्नहैम यूनाइटेड किंगडम (UK) के नए प्रधानमंत्री बन गए हैं. किंग चार्ल्स III ने बर्नहैम को नई सरकार बनाने का न्योता दिया और बर्नहैम ने प्रधानमंत्री के तौर पर पदभार संभाला. उन्हें पिछले शुक्रवार को पार्टी का नया लीडर चुना गया था. उन्होंने देश में “स्थिर और जिम्मेदार राजनीति” का माहौल लाने का वादा किया है. हालांकि नई सियासी पारी उनके लिए आसान नहीं होगी.
एंडी बर्नहैम मंगलवार को UK के प्रधानमंत्री के तौर पर अपना पहला पूरा दिन शुरू कर रहे हैं. वे जोश और चुनौतियों के पहाड़ के साथ 10 डाउनिंग स्ट्रीट में दाखिल हुए. उनके लिए जरूरी मुद्दे जाने-पहचाने हैं, जिनका सामना पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने भी किया था. इनमें धीमी अर्थव्यवस्था, रहने-सहने की लागत का संकट, सरकारी सेवाओं पर बहुत ज्यादा दबाव और विदेश नीति जिसमें यूक्रेन और मिडिल ईस्ट में युद्ध और US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ रिश्ते संभालना शामिल है.
बर्नहैम के सामने कौन सी चुनौतियां हैं
बर्नहैम पिछले दस साल ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर रहने के बाद प्रधानमंत्री बने हैं. ग्रेटर मैनचेस्टर 30 लाख लोगों वाला नॉर्थ-वेस्ट इंग्लैंड का इलाका है. पिछले महीने उन्होंने सांसद चुने जाने के बाद मेयर के पद से इस्तीफा दे दिया और सीधा प्रधानमंत्री का पद संभाला. 70 मिलियन लोगों को सेवाएं देने वाली राष्ट्रीय सरकार का नेतृत्व करना एक बहुत बड़ा काम है, जिसमें बड़ी समस्याएं भी हैं. बर्नहैम के सामने ये कुछ मुख्य मुद्दे हैं-
इकॉनमी को बढ़ावा देना और सरकार को डीसेंट्रलाइज करना
घरेलू मुद्दे बर्नहैम के एजेंडा में सबसे ऊपर हैं और उन्होंने पहले ही कहा है कि वह मंगलवार को अपना प्लान बताएंगे कि उनकी सरकार रहने की बढ़ती लागत कम करने के लिए कैसे फंड देगी. बर्नहैम को विरासत में ऐसी इकॉनमी मिली है, जो पहले अच्छी चल रही थी, लेकिन अब ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण खराब होने लगी है. अब अनुमान है कि इस साल देश की ग्रोथ रेट काफी धीमी हो जाएगी. इस मंदी के साथ-साथ महंगाई भी तेजी से बढ़ेगी. उनके पॉलिसी ब्लूप्रिंट का मुख्य हिस्सा सरकार को डीसेंट्रलाइज करना, लोकल सरकारों को पैसा देना और कुछ ऐसी सेवाओं को वापस लाना है, जिन्हें चार दशक पहले प्राइवेट कर दिया गया था. उनके बिजनेस-फ्रेंडली समाजवाद का मॉडल, जिसे “मैनचेस्टरिज्म” के नाम से जाना जाता है, को लागू होने में सालों में लग सकते हैं. इस मॉडल का मकसद ट्रांसपोर्टेशन, हाउसिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे एरिया में निवेश करने के लिए प्राइवेट और पब्लिक पैसे का एक साथ इस्तेमाल करना है.

सरकारी खर्च बढ़ाने की चुनौती
मैनचेस्टर न्यूज साइट द मिल के फाउंडर जोशी हरमन, जिन्होंने सालों तक बर्नहैम को कवर किया है, ने कहा कि नए प्राइम मिनिस्टर कुछ ऐसे लोगों को राहत दे सकते हैं जो मुश्किल में हैं. हरमन ने कहा, “लेकिन अगर सवाल यह है कि यूरोपीय यूनियन से निकलने के बाद वित्तीय संकट के दौर में आर्थिक ग्रोथ कौन ला सकता है और अर्थव्यवस्था को कौन रीमॉडल कर सकता है, तो मुझे बहुत हैरानी होगी अगर उस सवाल का जवाब एंडी बर्नहैम हैं।”
एंडी बर्नहैम के पास सरकारी खर्च बढ़ाने की बहुत कम गुंजाइश है, क्योंकि स्टारमर ने चुनाव से पहले मुख्य टैक्स न बढ़ाने का वादा किया था. अब पीएम की कुर्सी संभालने के बाद उनके पास स्टारमर के वादों को तोड़ने के अलावा कोई और ऑप्शन नहीं है. हालांकि बर्नहैम ने साफ किया है कि वे अमीरों की संपत्ति पर वेल्थ टैक्स लगा सकते हैं. देश को चलाने और विकास के लिए इसकी जरूरत है. उन्होंने पिछले हफ्ते एक पॉडकास्ट पर कहा था कि सरकार को “शायद थोड़ा और मांगना पड़ सकता है.”
विदेश नीति और ट्रंप के साथ रिश्ते
बर्नहैम को विदेश नीति का अनुभव नहीं है, लेकिन उन्होंने NATO के प्रति कमिटमेंट्स का सम्मान करने, UK के न्यूक्लियर डिटरेंट का समर्थन करने और यूक्रेन का एक मजबूत सहयोगी बने रहने का वादा किया है. उन्होंने कहा है कि वे US के साथ खास रिश्ते बनाए रखेंगे, जो भविष्य में इस बात पर निर्भर करेगा कि वे राष्ट्रपति ट्रंप के साथ कैसे बातचीत करते हैं. ट्रंप ने शुरू में स्टारमर की तारीफ की थी, लेकिन बाद में उन पर बुरी तरह भड़के भी. ईरान के साथ युद्ध में ब्रिटेन ने खुलकर US का साथ नहीं दिया. इसके अलावा ब्रिटेन ने नॉर्थ सी में क्रूड ऑयल और गैस ड्रिलिंग के लिए नए रास्ते खोलने या नए लाइसेंस देने से मना कर दिया. ट्रंप चाहते थे कि ब्रिटेन ऑयल प्रोडक्शन बढ़ाए, लेकिन पर्यावरण और दूसरी पॉलिसी की वजह से ब्रिटेन ने ऐसा नहीं किया. इन वजहों से ट्रंप कीर स्टारमर से नाराज हो गए. बर्नहैम के प्रधानमंत्री बनने के बाद ट्रंप ने उनके साथ रिश्ते अच्छे होने का संकेत दिया और कहा कि बर्नहैम नॉर्थ सी में ड्रिलिंग का समर्थन कर सकते हैं.
बता दें, बर्नहैम ने पहले भी ट्रंप की सबके सामने बुराई की है, हालांकि उन्होंने कहा कि वह उनके साथ सम्मान से पेश आएंगे, जैसा वह दूसरों के साथ करते हैं, लेकिन सही मुद्दों पर असहमत होने को भी तैयार रहेंगे. दोनों नेताओं ने सोमवार को पहली बार आधिकारिक तौर बात की। बर्नहैम ने ट्रंप से कहा कि वह होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग को सुरक्षित करने और उसके सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. वहीं ट्रंप ने बर्नहैम पर स्टारमर द्वारा तय किए गए डिफेंस खर्च के लक्ष्यों को बढ़ाने का दबाव डाला। 15 बिलियन पाउंड (USD 20 बिलियन) तक खर्च बढ़ाने की मांग करने वाला डिफेंस प्लान मिलिट्री नेताओं की मांग से बहुत कम है और मौजूदा बजट के तहत पूरी तरह से फंड न मिलने के लिए इसकी आलोचना की गई है।
यह देखना होगा कि यूरोपीय संघ से निकलने के बाद बर्नहैम दोबारा रिश्ते ठीक करने में कितना आगे जाते हैं। स्टारमर के मैनिफेस्टो में संघ में दोबारा शामिल न होने का वादा किया गया था, लेकिन वह यूरोप के साथ रिश्ते सुधार रहे थे।

हमास-इजराइल युद्ध
बर्नहैम ने हमास के साथ इजराइल की लड़ाई और गाजा की तबाही पर स्टारमर के नजरिए की आलोचना की है. बर्नहैम ने कहा है कि UK गाजा हिंसा और वेस्ट बैंक में गैर-कानूनी बस्तियां बसाने वाले इजराइलियों के खिलाफ सख्त बैन लगाने पर विचार करेगा. यह मुद्दा लेबर पार्टी के लिए संवेदनशील है, जिसे स्टारमर के सत्ता में आने से पहले यहूदियों के खिलाफ माना गया था. बर्नहैम के इन विचारों पर यहूदी गुटों ने गुस्सा दिखाया. वहीं, इजराइल द्वारा गाजा पर बमबारी को नरसंहार घोषित न करने के लिए फिलिस्तीनी समर्थक गुटों ने भी उनकी आलोचना की है.
माइग्रेशन का मुश्किल मुद्दा
प्रधानमंत्री के तौर पर अपने पहले भाषण में, बर्नहैम ने इमिग्रेशन का जिक्र नहीं किया, जो कई ब्रिटिश वोटर्स के लिए एक बड़ा मुद्दा है. यूरोप के दूसरे अमीर देशों की तरह, UK में भी संकटग्रस्त इलाकों से बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं. ये लोग युद्ध, अकाल, भूख, क्लाइमेट चेंज, राजनीतिक ज़ुल्म और बहुत ज़्यादा गरीबी से बचने के लिए अपना देश छोड़ रहे हैं. ये अप्रवासी बहुत खतरनाक हवा वाली नावों में इंग्लिश चैनल पार करके गैर-कानूनी तरीके से ब्रिटेन में घुस रहे हैं. यह मुद्दा देश की सुरक्षा और संसाधनों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है.
गैर-कानूनी प्रवासियों के आने पर जनता के गुस्से और चिंता का सीधा फायदा रिफॉर्म UK नाम के राजनीतिक दल को हुआ. यह पार्टी पूरी तरह से एंटी-इमिग्रेशन पॉलिसी पर काम करती है. इसी मुद्दे के दम पर, उन्होंने हाल के लोकल चुनावों में बड़ी जीत हासिल की और रूलिंग लेबर पार्टी को बड़ा झटका लगा. इस नाकामी के लिए लेबर पार्टी के अंदर कीर स्टारमर की पॉलिसी को दोषी ठहराया गया और अपने ही नेताओं में असंतोष पैदा हो गया. नतीजतन लेबर पार्टी ने कीर स्टारमर को पद से हटा दिया.
आंकड़े बताते हैं कि सरकार ने अप्रवासियों की संख्या में काफी कमी की है. 2023 में नेट माइग्रेशन 9,00,000 से ज्यादा था, जो पिछले साल (2025 में) सिर्फ 1,71,000 रह गया. नेट माइग्रेशन में इस बड़ी कमी के बावजूद, लोग अभी भी लेबर पार्टी से नाराज हैं क्योंकि जमीनी स्तर पर जनता को इस गिरावट से कोई सीधा फायदा नहीं दिख रहा है और यह मुद्दा अब आंकड़ों से आगे बढ़कर कई प्रैक्टिकल समस्याओं से जुड़ गया है. बर्नहैम ने कहा है कि वह माइग्रेशन पर मौजूदा लेबर प्लेबुक को फॉलो करेंगे. बर्नहैम ने इससे जुड़े एक बिल के समर्थन में वोट भी दिया है, जिसका मकसद चैनल पार करने वालों की संख्या को और कम करना और लोगों को सुरक्षित, कानूनी रास्तों के जरिए भेजना है.
कुल मिलाकर कहें, तो एंडी बर्नहैम ऐसे समय में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने हैं, जब देश कई चुनौतियों से जूझ रहा है, जिसमें आर्थिक मंदी, महंगाई, सरकारी सेवाओं पर दबाव, गैर-कानूनी इमिग्रेशन और मुश्किल ग्लोबल संकट शामिल हैं, उनकी प्राथमिकताएं अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना, पावर को डीसेंट्रलाइज करना, सरकारी खर्च को बैलेंस करना और विदेश नीति में ब्रिटेन की भूमिका को मजबूत करना होंगी. उन्हें US, यूरोपियन यूनियन, यूक्रेन और मिडिल ईस्ट से जुड़े मुद्दों पर भी एक बैलेंस्ड स्ट्रैटेजी अपनानी होगी. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बर्नहैम अपने वादों को पॉलिसियों में बदल पाएंगे, जिससे राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक सुधार आ सकें या उन्हें कीर स्टारमर की तरह ही चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा.
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